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Mahatma Jotiba Phoole Rachanawali : Vols. 1-2

Mahatma Jotiba Phoole Rachanawali : Vols. 1-2

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  • Pages: 695
  • Year: 2015, 4th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171197323
  •  
    यह किताब जोतिबा फुले (जोतीराव गोविंदराव फुले : 1827-1890) की सम्पूर्ण रचनाओं का संग्रह है ! सन 1855 से सन 1890 तक उन्होंने जितने ग्रंथो की रचना की, सभी को इसमें संगृहीत किया गया है ! उनकी पहली किताब 'तृतीय रत्न' (नाटक) सन 1855 में और अंतिम 'सार्वजानिक सत्यधर्म' सन 1891 में उनके परिनिर्वाण के बाद प्रकाशित हुई थी ! जोतीराव फुले की कर्मभूमि महाराष्ट्र रही है ! उन्होंने अपनी साडी रचनाएँ जनसाधारण की बोली मराठी में लिखीं ! उनका कार्य और रचनाएँ अपने समय में भी विवादस्पद रहीं और आज भी हैं ! लेकिन उनका लेखन हर पीढ़ी में सामाजिक क्रांति की चेतना जगाता रहेगा, इसमें कोई संदेह नहीं ! उनकी यह रचनावली उनके कार्य और चिंतन का ऐतिहासिक दस्तावेज है !

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    L. G. Meshram Vimalkirti

    जन्म: 5 फरवरी, 1949 को महाराष्ट्र के भंडारा जिले के देवरीदेव नामक गाँव में।

    रा.तु.म. नागपुर विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और इसी विश्वविद्यालय में 1985 से स्नातकोत्तर पालि- प्राकृत विभाग में अध्यापन किया। वर्तमान में पालि-प्राकृत विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं।

    भदन्त आनन्द कौसल्यायन जी के सम्पर्क में बौद्ध भिक्षु रहे। अपने छात्र जीवन से ही महात्मा ज्योतिबा फुले एवं डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के सिद्धांतों को अपनाकर सामाजिक क्रान्ति के आन्दोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। दलित मुक्ति आन्दोलन, बौद्ध धम्म, बौद्ध साहित्य के अध्ययन-अध्यापन में विशेष रुचि।

    महात्मा ज्योतिबा फुले के संपूर्ण साहित्य का हिन्दी में अनुवाद किया। मराठी और हिन्दी में करीब 36 पुस्तकें प्रकाशित। डॉ. अम्बेडकर, ज्योतिबा फुले, बौद्ध धम्म, बौद्ध दर्शन, बौद्ध इतिहास, संस्कृति, पालि साहित्य आदि विषयों पर अनेकों शोध निबंध प्रकाशित।

    सामाजिक परिवर्तन, जाति विनाश, सामाजिक समानता के प्रति प्रतिबद्धता। ‘अंगुत्तर’ पत्रिका का प्रकाशन एवं संपादन।

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