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Maithili Sharan Gupta Sanchayita

Maithili Sharan Gupta Sanchayita

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  • Pages: 302p
  • Year: 2002
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: MSGS190
  •  
    मैथिलीशरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और गजानन माधव मुक्तिबोध खड़ीबोली के तीन महान् कवि हैं । इनमें गुप्तजी की स्थिति विशिष्ट है । बे एक तरह से खड़ीबोली के आदि कवि हैं, जिसने कविता में एक साथ तीन महार्ध उपलब्धियाँ कीं; वे हैं-कविता में नए भाषिक माध्यम का प्रयोग, उसे व्यापक स्वीकृति दिलाना और उसमें अत्यंत श्रेष्ठ काव्य का सृजन करना । कुछ विद्वान् आधुनिक हिंदी कविता में उनके महत्त्व को स्वीकार करते हैं, लेकिन उसे सिर्फ 'ऐतिहासिक' कहकर रह जाते हैं, साहित्यिक नहीं मानते । ज्ञातव्य है कि साहित्य में 'ऐतिहासिक' महत्त्व जैसी कोई चीज नहीं होती, क्योंकि उसमें ऐतिहासिक महत्त्व साहित्यिकता के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है । इस दृष्टि से गुप्तजी के यश का कलश हिंदी के सभी कवियों के ऊपर स्थापित है । गुप्तजी के काव्य में जितना विस्तार है, उतना ही वैविध्य भी । उन्होंने कबिता में प्रबंध से लेकर मुक्तक तक और निबंध से लेकर प्रगीत तक विपुल मात्रा में लिखे हैं । एक तरफ उनकी कविता में राष्ट्र और समाज बोलता है, तो दूसरी तरफ उसमें पीड़ित नारी के हृदय की धड़कन भी सुनाई देती है । कुल मिलाकर गुप्त-काव्य भारतीय राष्ट्र की संपूर्ण संस्कृति, उसके संपूर्ण सौंदर्य और उसके संपूर्ण संघर्ष को अभिव्यक्त करता है । आश्चर्य नहीं कि उन्हें स्वयं महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की अभिधा प्रदान की थी । विद्वानों ने उचित ही उनकी काव्य-संवेदना को अत्यंत गतिशील माना है । उस गतिशीलता में भारत के परंपरागत और आधुनिक मूल्यों का संगीत निरंतर सुनाई पड़ता है । प्रस्तुत संचयन गुप्त जी के काव्य के उत्तमांश को पाठकों के समुख उपस्थित करने का एक विनम्र प्रयास है । निश्चय ही इस संचयन से गुजरकर बे भी कवि के प्रति सुमित्रानंदन पंत के शब्दों में बोल उठेंगे : सूर सुर तुलसी शशि-लगता मिथ्यारोपण स्वर्गंगा तारापथ में कर अापके भ्रमण?

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    Nandkishore Naval

    नंदकिशोर नवल

    जन्म: 2 सितंबर, 1937 (चाँदपुरा, वैशाली, बिहार)।

    शिक्षा: एम.ए., पी-एच.डी.(पटना विश्वविद्यालय)।

    वृत्ति: पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक। अब अवकाशप्राप्त। फिलहाल स्वतंत्र लेखन और संपादन।

    मौलिक मुख्य कृतियाँ: हिंदी आलोचना का विकास, मुक्तिबोध: ज्ञान और संवेदना, निराला: कृति से साक्षात्कार, उत्तर-छायावाद और रामगोपाल शर्मा ‘रुद्र’, मैथिलीशरण, तुलसीदास, आधुनिक हिंदी कविता का इतिहास, सूरदास, समकालीन काव्य-यात्रा, मुक्तिबोध की कविताएँ: बिंब-प्रतिबिंब, पुनर्मूल्यांकन, कविता: पहचान का संकट, निकष, दिनकर: अर्धनारीश्वर कवि, रीति काव्य, निराला-काव्य की छवियां, कविता के आर-पार।

    मुख्य संपादित कृतियाँ: निराला रचनावली (आठ खंड), दिनकर रचनावली (पाँच काव्य-खंड), स्वतंत्रता पुकारती, हिंदी साहित्यशास्त्र, मैथिलीशरण संचयिता, नामवर संचयिता, संधि-वेला, पदचिद्द, हिंदी साहित्य: बीसवीं शती, हिंदी की कालजयी कहानियाँ।

    मुख्य संपादित पत्रिकाएँ: ‘आलोचना’ (सह-संपादक के रूप में), कसौटी।

    वर्तमान पता: 301, राजप्रिया अपार्टमेंट, बुद्धा कॉलोनी, पटना-800 001

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