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Marang Goda Neelkanth Hua

Marang Goda Neelkanth Hua

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  • Pages: 404p
  • Year: 2019, 2nd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126727612
  •  
    महुआ माजी का उपन्यास ‘मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ’ अपने नए विषय एवं लेखकीय सरोकारों के चलते इधर के उपन्यासों में एक उल्लेखनीय पहलकदमी है। जब हिन्दी की मुख्यधारा के लेखक हाशिए के समाज को लेकर लगभग उदासीन हों, तब आदिवासियों की दशा, दुर्दशा और जीवन संघर्ष पर केन्द्रित यह उपन्यास एक बड़ी रिक्ति की भरपाई है। इस उपन्यास में महुआ माजी यूरेनियम की तलाश से जुड़ी जिस सम्पूर्ण प्रक्रिया को उजागर करती हैं वह हिन्दी उपन्यास का जोखिम के इलाके में प्रवेश है। महुआ माजी ने गहरे शोध, सर्वेक्षण और समाजशास्त्रीय दृष्टि का सहारा लेकर इस उपन्यास के माध्यम से एक जरूरी हस्तक्षेप किया है। उपन्यास का केन्द्रीय पात्र सगेन प्रतिरोध की स्थानिकता को बरकरार रखते हुए विकिरणविरोधी वैश्विक आन्दोलन के साथ भी संवाद बनाता है। हिरोशिमा की दहशत और चेरनोबिल व फुकुशिमा सरीखे हादसे उसकी चेतना को लगातार प्रतिरोधी दिशा देते हैं। अच्छा यह भी है कि यह सबकुछ मानवीय सम्बन्धों की ऊष्मा एवं अन्तर्द्वन्द्व में घुल-मिलकर प्रस्तुत हुआ है। सचमुच उपन्यास में वर्णित बहुत से तथ्य व मुद्दे अभी तक गम्भीर चर्चा का विषय नहीं बन सके हैं। इस रूप में यह उपन्यास एक नई भूमिका के रूप में भी प्रस्तुत है। दृवीरेन्द्र यादव

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    Mahua Maji

    जन्म : 10 दिसम्बर। शिक्षा : समाजशास्त्र में एम.ए., पी-एच.डी., यू.जी.सी. नेट। फिल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट, पुणे से फिल्म ऐप्रिसिएशन कोर्स। फाइन आर्ट्स में 'अंकन विभाकर’ (रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल)।

    हंस, नया ज्ञानोदय, कथादेश, कथाक्रम, वागर्थ आदि पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ प्रकाशित।

    अंग्रेजी, बांग्ला, पंजाबी सहित कई भाषाओं में कहानियाँ अनूदित।

    पहले उपन्यास 'मैं बोरिशाइल्ला’ का पहला संस्करण 2006 में राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित। इसका अंग्रेजी अनुवाद 'मी बोरिशाइल्ला’ 2008 में रूपा ऐंड कम्पनी, नई दिल्ली से प्रकाशित हुआ जिसे वर्ष 2010 में रोम, इटली स्थित यूरोप के सबसे बड़े विश्वविद्यालय 'सापिएन्जा युनिवर्सिटी ऑफ रोम’ में मॉडर्न लिट्रेचर के बी.ए. के कोर्स में शामिल किया गया। यह उपन्यास राजकमल प्रकाशन की 60वीं वर्षगाँठ के अवसर पर घोषित 60 वर्षों में प्रकाशित हिन्दी के ऐसे 30 शिखर उपन्यासों में भी शामिल है, जिन्हें मील का पत्थर कहा गया। इंटरनेट से जारी राजकमल प्रकाशन की बेस्टसेलर पुस्तकों में भी शामिल।

    दूसरा उपन्यास 'मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ’ 2012 में राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित।

    दिल्ली, मुम्बई, जम्मू, शिमला, कोचीन, मेरठ, गोरखपुर, हैदराबाद, बंगलुरू, केरल, इलाहाबाद, सोलापुर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बीकानेर, राजकोट, जे.एन.यू., पटियाला, सौराष्ट्र आदि विभिन्न विश्वविद्यालयों में महुआ माजी के उपन्यासों पर शोधकार्य हो रहे हैं।

    सम्मान/पुरस्कार : वर्ष 2007 में लन्दन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में ब्रिटेन के आन्तरिक सुरक्षा मंत्री के हाथों 'अन्तर्राष्ट्रीय कथा यू.के. सम्मान’। वर्ष 2010 में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी तथा संस्कृति परिषद् द्वारा 'अखिल भारतीय वीर सिंह देव सम्मान’। वर्ष 2010 में उज्जैन की कालिदास अकादमी में 'विश्व हिन्दी सेवा सम्मान’। लोक सेवा समिति, झारखंड द्वारा 'झारखंड रत्न सम्मान’, 'झारखंड सरकार का राजभाषा सम्मान’। वर्ष 2012 में राजकमल प्रकाशन कृति सम्मान : 'मैला आँचल-फणीश्वरनाथ रेणु पुरस्कार’।

    सम्प्रति : झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष।

    सम्पर्क : 18-सी, राधा गोविन्द स्ट्रीट, थड़पकना, रांची-834001, झारखंड।

    फोन : 09835193111,  09431577481

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