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Maryada Purushottam Bhagwan Ram : Jivan Aur Darshan

Maryada Purushottam Bhagwan Ram : Jivan Aur Darshan

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  • Pages: 318p
  • Year: 2014, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180315053
  •  
    श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम तो हैं ही, पूर्ण ब्रह्म के अवतार भी हैं ! महामानव और आदर्श मानव के रूप में वह सद्प्रेरणा के अजस्त्र स्रोत हैं ! पर श्रीराम के अवतार स्वरुप को, मोक्ष को जीवन का परम पुरुषार्थ मानने वाला आस्तिक बुद्धिसंपन्न ईश्वरवादी ही ठीक-ठीक जानता-समझता है ! श्रीराम भारतीय धर्म-संस्कृति के अनिवार्य और अपरिहार्य अंग हैं ! इसीलिए ईश्वर के विभिन्न नामों में साधना की दृष्टि से रामनाम का महत्त्व सर्वोपरि है ! आज के पंकिल कुहासे को नष्ट करने के लिये श्रीराम जैसे चन्दन चर्चित चरित्र में अवगाहन की महती आवश्यकता मानवता को है ! वह श्रीराम, जो समस्त भारतीय साधना और ज्ञान-परम्परा के वागद्वार हैं, जिनका दृढचरित्र लोक-मर्यादा के कठोर अंकुश से अनुशासित है और जो जन-जन के मन को 'रस विशेष' से आप्लावित कर सकता है ! इस पुस्तक के लेखक डॉ. जयराम मिश्र राम-साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान ही नहीं, राम-स्वरुप के ज्ञाता और उसमे रमे हुए संत हैं ! हमें विश्वास है कि यह ग्रन्थ वाल्मीकि और तुलसी की रामकथा-परंपरा की एक कड़ी बनेगा !

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    Jairam Mishra

    डॉ. जयराम मिश्र
    डॉ. जयराम मिश्र का जन्म सन् 1915 में मुकुन्दपुर, जिला इलाहाबाद में हुआ था । पिता एवं आध्यात्मिक गुरु आत्मज विभूति पं. रामचन्द्र मिश्र ।
    एम.ए., एम-एड, पी-एच.डी., उपाधियाँ प्राप्त करने के उपरांत हिन्दी संस्कृत, अंग्रेजी के साथ-साथ बॉगला और पंजाबी भाषा-साहित्य का गहन
    अध्ययन किया तथा उनके अनेक ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद किया ।
    युवावस्था में स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय रहे । सन् 1942 के आन्दोलन में भाग लेने पर राजद्रोह का मुकदमा चला और छह वर्ष का कारावास भोगा । जेल
    में रहकर आध्यात्मिक ग्रन्थों-गीता, उपनिषद, ब्रह्मसूत्र आदि का गहन चिन्तन-मनन किया फलत: दिव्य आध्यात्मिक अनुभूतियाँ प्राप्त कीं ।
    इलाहाबाद डिग्री कॉलेज में अध्यापन करते हुए अनेक ग्रन्थों का प्रणयन किया ।
    'श्री गुरुग्रन्थ-दर्शन' तथा 'नानक वाणी' कृतियों ने हिन्दी तथा पंजाबी में स्थायी प्रतिष्ठा प्रदान कीं। जीवनी-ग्रन्थों जैसे गुरु नानक, स्वामी रामतीर्थ, आदि गुरु शंकराचार्य, मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम, लीलापुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण, शक्तिपुज हनुमान ने अपनी कथात्मक ललित शैली, सहज भाषा-प्रवाह तथा स्वयं एक सन्त की लेखनी से प्रणीत होने के कारण अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त की ।
    नैतिक ब्रह्मचारी डॉ. मिश्र मूलत: आत्मस्वरुप में स्थित उच्चकोटि के सन्त और धार्मिक विभूति थे । एषणाविहीन, निरन्तर नामजप एवं नित्य चैतान्यमृत, निरन्तर नामजप एवं नित्य चैतान्यमृत में लीन, परम लक्ष्य संकल्पित उनका जीवन आज के युग में एक दुर्लभ उदाहरण है ।
    डॉ. जयराम मिश्र सन् 1987 में पंचतत्व में विलीन हो गये ।
    

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