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Mere Sandhi-Patra

Mere Sandhi-Patra

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  • Pages: 136p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388933957
  •  
    हिन्दी साहित्य में जिस रचना पीढ़ी को साठोत्तरी पीढ़ी कहा जाता है, सूर्यबाला उसकी प्रमुख हस्ताक्षर हैं। उनकी लेखकीय पहचान के केन्द्र में उनका पहला उपन्यास ‘मेरे संधि-पत्र’ है। उपन्यास का प्रकाशन सत्तर के दशक के मध्य में प्रसिद्ध साप्ताहिक ‘धर्मयुग’ में हुआ था। उपन्यास की कथा के केन्द्र में ‘शिवा’ नामक स्त्री का किरदार है जो अपने समय की नारी का प्रतिनिधित्व करती है और नारी-जीवन को लेकर उठनेवाले सतत सवालों की चुनौती को स्वीकार करती है। वह मध्यवर्गीय शिक्षित स्त्री है और उपन्यास में उसके कई रूप दिखाई देते हैं। वह आत्मविश्वास से भरपूर है, स्वाभिमानी है। अपनी पहचान को लेकर सजग है लेकिन विद्रोह नहीं करती है, न ही अपने आपको परिस्थितियों का दास बन जाने देती है; बल्कि अपने विवेक से ऐसे निर्णय लेती है जो उसके, परिवार और समाज के हित में हों। यही उसके संधि-पत्र हैं। ‘मेरे संधि-पत्र’ के केन्द्र में मध्यवर्गीय स्त्री के मन के द्वन्द्व हैं, निर्णय-अनिर्णय की स्थितियाँ हैं, इसमें स्त्री का शोषण नहीं है, बल्कि उसको बेपनाह प्यार करनेवाला पति है और उसके सौतेले बच्चे। समाज, परिवार, मान-मर्यादा को लेकर उपन्यास में जो सवाल उठाए गए हैं, वे आज भी स्त्री-विमर्श के लिए गौण मुद्दे नहीं हैं। उपन्यास में यह बात तो है कि स्त्री ऐसे पुरुष के सामने ही समर्पण कर पाती जो बौद्धिक रूप से उससे श्रेष्ठ हो, लेकिन उपन्यास की नायिका अन्त में सामाजिकता का वरण करती है। मुखर स्त्री-विमर्श के दौर में मितकथन वाला यह उपन्यास अपने प्रश्नों के कारण समकालीन लगने लगता है।

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    Suryabala

    जन्म : 25 अक्टूबर, 1943, वाराणसी ।

    शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी., काशी विश्वविविद्यालय, वाराणसी ।

    प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : 'मेरे संधि-पत्र’, ‘सुबह के इंतजार तक’, ‘अग्निपंखी’, 'यामिनी-कथा’, ‘दीक्षांत’ (उपन्यास) ; ‘एक इंद्रधनुष जुबेदा के नाम’, 'दिशाहीन’, 'थाली-भर चाँद’, 'मुँडेर पर’, 'गृह-प्रवेश', ‘साँझवाती', ‘कात्यायनी संवाद’, ‘मानुष-गंध’, ‘गौरा गुनवंती’ (कहानी); 'अजगर करे न चाकरी’, ‘धृतराष्ट्र टाइम्स’, ‘देश सेवा के अखाड़े में’, 'भगवान ने कहा था’, 'यह व्यंग्य कौ पंथ’, (व्यंग्य); ‘अलविदा अन्ना’ (विदेश संस्मरण); ‘झगडा निपटाकर दफ्तर' (बाल हास्य उपन्यास) ।

    कई रचनाएँ भारतीय एवं विदेशी भाषाओँ में अनुदित ।

    टीवी धारावाहिकों के माध्यम से अनेक कहानियों, उपन्यासों तथा हास्य-व्यंग्यपरक रचनाओं का रूपांतर प्रसारित । ‘सजायाफ्ता’ कहानी पर बनी टेलीफिल्म को वर्ष 2007 का सर्वश्रेष्ठ टेलीफिल्म पुरस्कार ।

    कोलंबिया विश्वविद्यालय (न्यूयार्क), वेस्टइंडीज विशवविद्यालय (त्रिनिदाद) एवं नेहरू सेंटर (लंदन) में कहानी एवं व्यंग्य रचनाओं का पाठ । न्यूयार्क के शब्द टी.वी. चैनल पर कहानी एवं व्यंग्य-पाठ ।

    सम्मान : प्रियदर्शिनी पुरस्कार, व्यंग्य-श्री पुंरस्करर, रत्नादेवी गोयनका वाग्देवी पुरस्कार, हरिशंकर परसाई स्मृति सम्मान, महाराष्ट्र साहित्य अकादेमी का राजस्तरीय सम्मान, महाराष्ट्र साहित्य अकादेमी का सर्वोच्च शिखर सम्मान, राष्ट्रीय शरद जोशी प्रतिष्ठा पुरस्कार, भारतीय प्रसार-परिषद का भारती गौरव सम्मान आदि से सम्मानित ।

    सम्पर्क : बी- 504, रूनवाल सेंटर,

    गोबंडी स्टेशन रोड, देवनार, चेम्बूर,

    मुम्बई - 400088

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