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Nabhag

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  • Pages: 111p
  • Year: 1998
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171194168
  •  
    नभग ' 'भागवतपुराण में यह कथा मनु-पौत्र (नभग के पुत्र) नाभाग से संबद्ध मिलती है तो शिवपुराण में यह कथा मनु-पुत्र नभग से जोड़ी गई है । मैंने शिवपुराण तथा वैदिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए नभग को ही इस घटना के मूल में खड़ा किया है, नाभाग को नहीं । नभग के चरित्र के निर्माण में मुझे भागवत के 'कविर्भवति मंत्रज्ञो' वाक्य से प्रेरणा मिली और मैंने नभग को प्रारंभ से ही कवि के रूप में चित्रित कर उसकी क्रांतिकारिता को उजागर किया । 'कवय: क्रान्त दर्शिन:' की सार्थकता इस कथा का प्राण है । इक्ष्वाकु तथा अन्य भाइयों द्वारा नभग को राज्याधिकार से वंचित करने के पीछे भी कोई कारण होना चाहिए । मैंने इसके लिए वर्णव्यवस्था, नारी-शिक्षा, शिक्षा का समानाधिकार तथा राजप्रभाव से मुक्त शिक्षा के बिंदुओं को उठाया है । नभग इसके कट्टर समर्थक हैं तथा इक्ष्वाकु आदि परंपरा के अंधसमर्थक हैं । फलत: दोनों में मतभेद होता है और कट्टर द्विज संघों के कारण नभग को राज्याधिकार से वंचित कर दिया जाता है । वह वर्णव्यवस्था को जन्म के आधार पर स्वीकार न कर गुण-कर्म के आधार पर स्वीकार करते हैं । पुरानी तथा नई विचारधारा के संघर्ष की परिणति है, नभग का जीवन । वह गुरुकुल की स्थापना कर जर्जर रूढ़ियों को तोड़ते हैं । समान शिक्षा, समान भोजन, समान परिधान तथा ज्ञान-विज्ञान से समन्वित चरित्राधारित क्षेत्रकार्य मूलक शिक्षाप्रणाली का सूत्रपात कर वह नई शिक्षाप्रणाली को जन्म देते हैं । इस प्रकार नभग या नाभानेदिष्ठ को सहृदय, क्रांतिकारी, समतावादी, न्यायनिष्ठ तथा जर्जर प्रथाओं का विध्वंसक कवि मानकर मैंने आधुनिक बोध संकलित एक सर्वथा नए संदर्भ की सृष्टि की है । इस युग में महर्षि दयानंद सरस्वती तथा स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी ही क्रांति उपस्थित की थीं । इस काव्य के पाठकों को यदि नभग के व्यक्तित्व में स्वामी श्रद्धानंद प्रतिबिंबित होते हुए दिखाई दें तो उन्हें आश्चर्य नहीं करना चाहिए । श्रद्धा के पुत्र नभग वास्तव में श्रद्धानंद ही थे । मेरे लिए यह और भी परितोष का कारण है ।' ' -भूमिका से

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    Vishnu Dutt Rakesh

    डॉ. विष्णुदत्त राकेश

    जन्म:  8 मार्च, 1941; उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का किनौनी गाँव।

    शिक्षा: उच्च शिक्षा देहरादून तथा संस्कृत शास्त्रों का अध्ययन वाराणसी में। एम.ए., पी-एच.डी., डी.लिट्।

    विशेषज्ञता: हिन्दी, संस्कृत साहित्य तथा पुरा विद्याओं के पंडित। कवि-समीक्षक।

    सम्प्रति: गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार में हिंदी विभाग में आचार्य एवं अध्यक्ष पद पर कार्यरत।

    प्रकाशन: ‘तुलनात्मक साहित्य शास्त्र’, ‘हिंदी साहित्य का मध्यकाल’, ‘कुलपति मिश्र’, ‘उत्तर भारत के निर्गुण पंथ साहित्य का इतिहास’, ‘रीतिकाल के ध्वनिवादी हिंदी आचार्यों का तुलनात्मक अध्ययन’, ‘पंत का सत्यकाम’, ‘दश महाविद्या मीमांसा’, ‘वैदिक साहित्य, संस्कृति और समाजदर्शन’, ‘आचार्य किशोरीदास वाजपेयी और हिंदी शब्द-शास्त्र’, ‘आधुनिक हिंदी लेखन की ऊर्जा’ आदि।

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