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Narak-Yatra

Narak-Yatra

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  • Pages: 239p
  • Year: 2018, 5th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8171786936
  • ISBN 13: 9788171786930
  •  
    ज्ञान चतुर्वेदी का यह उपन्यास नरक-यात्रा महान रूसी उपन्यासों की परंपरा में है, जो कहानी और इसके चरित्रों के हर संभव पक्ष तथा तनावों को अपने में समेटकर बढ़ा है। यह उपन्यास भारत के किसी भी बड़े सरकारी अस्पताल के किसी एक दिन मात्र की कथा कहता है, अस्पताल, जो नरक से कम नहीं, विशेषतौर पर गरीब आम आदमी के लिए। लेखक हमें अस्पताल के इसी नरक की सतत यात्रा पर ले जाता है, जो अस्पताल के हर कोने में तो व्याप्त है ही, साथ ही इसमें कार्यरत लोगों की आत्मा से भी फैल गया है। ऑपरेशन थिएटर से अस्पताल के रसोईघर तक, वार्ड बॉय से सर्जन तक - हर चरित्र और स्थिति के कर्म-कुकर्म को लेखक ने निर्ममता से उजागर किया है। उसकी मीठी छुरी-सी पैनी जुबान और उछालकर मजा लेने की प्रवृत्ति इस निर्मम लेखन कर्म को और भी महत्त्वपूर्ण बनाती है। किसी सुधारक अथवा क्रांतिकारी लेखक का लबादा ओढ़े बगैर ज्ञान चतुर्वेदी ने निर्मम, गलीज यथार्थ पर सर्जनात्मक टिप्पणी की है और खूब की है। यह उपन्यास अद्भुत जीवन तथा उतने ही अद्भुत जीवन-चरित्रों की कथा को ऐसी भाषा में बयान करता है जो आम आदमी के मुहावरों और बोली से संपन्न है, जिसमें मज़े लेकर बोली जानेवाली अदा और बाँध लेने की शक्ति है। - स्वदेश दीपक

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    Gyan Chaturvedi

    मऊरानीपुर (झाँसी) उत्तर प्रदेश में 2 अगस्त, 1952 को जन्मे डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी की मध्य प्रदेश में ख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ की तरह विशिष्ट पहचान। चिकित्सा शिक्षा के दौरान सभी विषयों में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले छात्र का गौरव हासिल किया। भारत सरकार के एक संस्थान (बी.एच.ई.एल.) के चिकित्सालय में कोई तीन दशक से ऊपर सेवाएँ देने के पश्चात् हाल ही में शीर्षपद से सेवा-निवृत्ति।

    लेखन की शुरुआत सत्तर के दशक से 'धर्मयुग’ से। प्रथम उपन्यास 'नरक-यात्रा’ अत्यन्त चर्चित रहा, जो भारतीय चिकित्सा-शिक्षा और व्यवस्था पर था। इसके पश्चात् 'बारामासी’ तथा 'मरीचिका’ जैसे उपन्यास आए और 'हम न मरब’ उनकी ताजा औपन्यासिक कृति।

    दस वर्षों से 'इंडिया टुडे’ तथा 'नया ज्ञानोदय’ में नियमित स्तम्भ। इसके अतिरिक्त राजस्थान पत्रिका और 'लोकमत समाचार’ दैनिकों में भी व्यंग्य स्तम्भ।

    अभी तक तकरीबन हजार व्यंग्य रचनाओं का प्रकाश। 'प्रेत कथा’, 'दंगे में मुर्गा’, 'मेरी इक्यावन व्यंग्य रचनाएँ’, 'बिसात बिछी हैं’, 'खामोश! नंगे हमाम में हैं’, 'प्रत्यंचा’ ओर 'बाराखड़ी’ व्यंग्य-संग्रह।

    शरद जोशी के 'प्रतिदिन’ के प्रथम खंड का अंजनी चौहान के साथ सम्पादन।

    'राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान’ म.प्र. सरकार। दिल्ली अकादमी का व्यंग्य लेखन के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित दिल्ली 'अकादमी सम्मान’। अन्तर्राष्ट्रीय इन्दु  शर्मा कथा-सम्मान (लन्दन) तथा 'चकल्लस पुरस्कार’ के अलावा कई विशिष्ट सम्मान।

    पुत्री नेहा डॉक्टर हैं तथा बेटा दुष्यन्त इंजीनियर। पत्नी शशि चतुर्वेदी भारत सरकार के चिकित्सा-संस्थान में स्त्रीरोग विशेषज्ञ।

    सम्पर्क  : ए-40, अलकापुरी, भोपाल : 402-024 दूरभाष : 0755-2450408

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