• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Nirala Aur Muktibodh : Chaar Lambi Kavitayen

Nirala Aur Muktibodh : Chaar Lambi Kavitayen

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 350

Special Price Rs. 315

10%

  • Pages: 176p
  • Year: 2014, 5th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171195210
  • ISBN 13: 9788171195213
  •  
    हिंदी में लंबी कविता का इतिहास नया नहीं है, भले उसे पारिभाषिक अभिधा मुक्तिबोध की लंबी कविताओं से प्राप्त हुई हो । पुराने कवियों को छोडू दें, तो लंबी कविता द्विवेदी-युग के कवियों से लेकर समवर्ती युग के कवियों तक ने लिखी हे । हिंदी के सुपरिचित युवा आलोचक नंदकिशोर नवल ने अध्ययन के लिए चार लंबी कविताएँ चुनी हैं । उनमें से दो निरालाकृत है और दो मुक्तिबोधकृत । कहने की आवश्यकता नहीं किए ये चारों कविताएँ हिंदी की चर्चित और विवादास्पद ही नहीं, महान कविताएँ भी हैं, जिनके सोपानों पर चरण रखते हुए हिंदी कविता ने ऊँचाई प्राप्त की है । लंबी कविता का संबंध निश्चय ही केवल आकार से न होकर प्रकार से भी है । इसे संयोग ही कहेंगे कि लेखक द्वारा चुनी गई चारों कविताएँ चार तरह की हैं । 'सरोज-स्मृति' के चित्रों को यदि स्मृति का सूत्र गुंफित करता है, तो 'राम की शक्ति-पूजा' कथा के सहारे आगे बढ़ती है । 'ब्रह्मराक्षस' और 'अँधेरे में' दोनों ही फैंटास्टिक कविताएँ हैं, लेकिन एक की फैंटेसी जहाँ एक अखंड रूपक के रूप में है, वहाँ दूसरी की फैंटेसी एक पूरी चित्रशाला है । नवल ने बड़ी सूक्ष्मता से चारों लंबी कविताओं के शिल्पगत वैशिष्टय को उद्‌घाटित करते हुए उनकी उस अंतर्वस्तु पर प्रकाश डाला है, जोकि उससे अभिन्न है । समकालीन हिंदी आलोचना में रचना से साक्षात्कार की बहुत बात की जाती है, लेकिन उसका सामना होने पर प्राय: आलोचक बगल से निकल जाते हैं । नवल ने रचना कै अंतर्लोक में प्रवेश करते हुए उसके उस बृहत्तर संदर्भ को हमेशा याद रखा है, जिसमें ही कोई रचना अपनी सार्थकता अथवा प्रासंगिकता प्राप्त करती है । 'निराला और मुक्तिबोध : चार लंबी कविताएँ' नामक उनकी यह नवीनतम आलोचना-पुस्तक हिंदी कविता के मर्मग्राहियों के लिए निश्चय ही उपयोगी सिद्ध होगी ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Nandkishore Naval

    नंदकिशोर नवल

    जन्म: 2 सितंबर, 1937 (चाँदपुरा, वैशाली, बिहार)।

    शिक्षा: एम.ए., पी-एच.डी.(पटना विश्वविद्यालय)।

    वृत्ति: पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक। अब अवकाशप्राप्त। फिलहाल स्वतंत्र लेखन और संपादन।

    मौलिक मुख्य कृतियाँ: हिंदी आलोचना का विकास, मुक्तिबोध: ज्ञान और संवेदना, निराला: कृति से साक्षात्कार, उत्तर-छायावाद और रामगोपाल शर्मा ‘रुद्र’, मैथिलीशरण, तुलसीदास, आधुनिक हिंदी कविता का इतिहास, सूरदास, समकालीन काव्य-यात्रा, मुक्तिबोध की कविताएँ: बिंब-प्रतिबिंब, पुनर्मूल्यांकन, कविता: पहचान का संकट, निकष, दिनकर: अर्धनारीश्वर कवि, रीति काव्य, निराला-काव्य की छवियां, कविता के आर-पार।

    मुख्य संपादित कृतियाँ: निराला रचनावली (आठ खंड), दिनकर रचनावली (पाँच काव्य-खंड), स्वतंत्रता पुकारती, हिंदी साहित्यशास्त्र, मैथिलीशरण संचयिता, नामवर संचयिता, संधि-वेला, पदचिद्द, हिंदी साहित्य: बीसवीं शती, हिंदी की कालजयी कहानियाँ।

    मुख्य संपादित पत्रिकाएँ: ‘आलोचना’ (सह-संपादक के रूप में), कसौटी।

    वर्तमान पता: 301, राजप्रिया अपार्टमेंट, बुद्धा कॉलोनी, पटना-800 001

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144