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Nirmala : Patkatha

Nirmala : Patkatha

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  • Pages: 160
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183618908
  •  
    ‘निर्मला' प्रेमचन्द का सुपरिचित उपन्यास है जिस पर एकाधिक बार टीवी धारावाहिक ओर फिल्मों का निर्माण हो चुका हैं । मन्नू भंडारी लिखित इस उपन्यास की यह पटकथा हिंदी टेलीविज़न के दर्शकों को दूरदर्शन के उन दिनों में वापस ले जाएगी जब इस सरकारी चैनल ने एक से एक क्लासिक धारावाहिक प्रस्तुत किए थे । यह वह दौर था जब हिंदी के नामचीन लेखको ने दूरदर्शन के स्तरीय धारावाहिकों के लेखन में बड़ा योगदान दिया और हमारे सामने 'तमस’, 'मालगुडी डेज़', 'कक्काजी कहिन’, 'राग दरबारी' और 'निर्मला' जैसे धारावाहिक आए | यह दूरदर्शन और भारतीय टेलीविजन का मनोरंजन के क्षेत्र में स्वर्णकाल था | "निर्मला' उसी समय का धारावाहिक है जिसका स्क्रीनप्ले हिन्दी की लोकप्रिय आर बहुपठित कहानीकार मन्नू भंडारी ने लिखा। 'निर्मला' एक मध्यवर्गीय युवती की कथा है जो दुदैंव के चलते आजीवन कष्ट में रही और अन्ततः: कष्ट के अतिरेक में ही इस दुनिया को विदा कह गई | लेकिन उसके जीवन की दारुण यात्रा का आरम्भ ओर अन्त पारम्परिक भारतीय समाज में प्रचलित स्त्री-जीवन के प्रति नजरिए में है, जहाँ माना जाता रहा हैं कि लड़की सयानी हो गई है तो उसका समय रहते विवाह सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य है जिसे हर हाल में हो जाना है | इसी के चलते निर्मला को पहले दहेज का और फिर बेमेल विवाह का शिकार होना पड़त्ता है । बिवाह उसके कहीं बड़ी आयु के जिस व्यक्ति से होता है उसके तीन बच्चे हैं | परिणाम किस्म-किस्म की मानसिक जटिलताएँ और संघर्ष पैदा होते हैं और अन्ततः पूरा परिवार बिखर जाता है | बचे रह जाते है विधुर तोताराम । मन्नू जी ने एक स्त्री की निगाह से देखते हुए जिस तरह इस कहानी को कहा, उसने उनके नज़रिए को अत्यन्त परिपक्व रूप में परदे पर रूपायित क्रिया था |

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    Mannu Bhandari

    मन्नू भंडारी

    भानपुरा, मध्य प्रदेश में 3 अप्रैल, 1931 को जन्मी मन्नू भंडारी को लेखन-संस्कार पिता श्री सुखसम्पतराय से विरासत में मिले। स्नातकोत्तर के उपरान्त लेखन के साथ-साथ वर्षों दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में हिन्दी का अध्यापन। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचन्द सृजनपीठ की अध्यक्ष भी रहीं।

    ‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ आपकी चर्चित औपन्यासिक कृतियाँ हैं। अन्य उपन्यास हैं ‘एक इंच मुस्कान’ (राजेन्द्र यादव के साथ) तथा ‘स्वामी’। ये सभी उपन्यास ‘सम्पूर्ण उपन्यास’ शीर्षक से एक जिल्द में भी उपलब्ध हैं।

    कहानी-संग्रह : एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है  तथा सभी कहानियों का समग्र ‘सम्पूर्ण कहानियाँ’; एक कहानी यह भी आपकी आत्मकथ्यात्मक पुस्तक है जिसे आपने अपनी ‘लेखकीय आत्मकथा’ कहा है। महाभोज, बिना दीवारों के घर, उजली नगरी चतुर राजा नाट्य-कृतियाँ तथा बच्चों के लिए पुस्तकों में प्रमुख हैं—आसमाता (उपन्यास), आँखों देखा झूठ, कलवा (कहानी) आदि।

    आप 'व्यास सम्मान', 'शिखर सम्मान' (हिंदी अकादमी, दिल्ली), 'शब्द साधक शिखर सम्मान' आदि से सम्मानित की जा चुकी हैं।

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