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Orhan Aur Anya Kavitayen

Orhan Aur Anya Kavitayen

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  • Pages: 160p
  • Year: 2014
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183616515
  •  
    'आँधी में टूटकर गिरा हुआ मकान तूफान में सूखकर रेत हुई नदी थककर गिरा हुआ आदमी ज़्यादे भरोसे का होता है अपनी-अपनी सम्भावनाओं में समर्पित सफलता से ज़्यादा मूल्यवान होती है तनी हुई विफलता।' श्रीप्रकाश शुक्ल के ताज़ा कविता-संग्रह 'ओरहन और अन्य कविताएँ' में शामिल कविता 'तनी हुई विफलता' की ये पंक्तियाँ रचनाकार के पक्ष को स्पष्ट कर देती है। प्रत्येक सजग और समर्थ रचनाकार बार-बार निजी और सामाजिक अनुभवों को चेतना की कसौटी पर कसता है। इसे 'पुन:पाठ' कहें या 'अर्थान्तर' सच्चाई यही है कि हर शब्द एक अनुभव माँगता है और हर अनुभव एक जीवन। इस आन्तरिक प्रक्रिया से गुज़रकर जो कवि समय को व्यक्त कर रहे हैं, उनमें श्रीप्रकाश शुक्ल महत्त्वपूर्ण हैं। प्रस्तुत संग्रह को पढ़ते हुए यह लगना अनायास नहीं कि 'बनारस' इसकी केन्द्रीयता है। बनारस के अनेक प्रसंग, स्थान और स्वभाव कविताओं में निहित व निनादित हैं।...और एक 'सनातन नगर' के बहाने कवि ने आधुनिकता के श्वेत-श्याम आवासों को टटोला है। श्रीप्रकाश शुक्ल में यह कहने का साहस व सलीका भी है कि, 'सब कुछ बहुवचन में नहीं सोचा जा सकता।' अपने तरीके से सोचते हुए उन्होंने 'ओरहन', 'एक कवि की तलाश में', 'हमारे समय का एक शोकगीत', 'एक स्त्री घर से निकलते हुए भी नहीं निकलती है' व 'छठ की औरतें' जैसी कई उदाहरणीय कविताएँ रची हैं। इस संग्रह में 'स्त्री' को लेकर कुछ बेहद $खास कविताएँ हैं। बिना शब्दों का डमरू बजाए। निजी देसी मुहावरे में श्रीप्रकाश 'लरिकोर' जैसी अनूठी कविता लिखते हैं। भाषा के स्वीकृत विन्यास को सतर्क चुनौती देते हुए रची गई ये कविताएँ हमें संवेदनाओं के एक सघन संसार में ले जाती हैं जहाँ अपेक्षित भाषाई मुखरता के साथ एक आत्मसंवादी स्वर भी है जिसमें प्रकृति के साहचर्य से दूर जाते समाज की चालाकियों का पर्दाफाश भी है।

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    Shriprakash Shukla

    जन्म : 18 मई, 1965, बरवाँ, सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)।

    शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), पी-एच.डी. (हिन्दी) (इलाहाबाद विश्वविद्यालय)।

    प्रकाशित कृतियाँ  :

    कविता-संग्रह : अपनी तरह के लोग, जहाँ सब शहर नहीं होता, बोली बात, रेत में आकृतियाँ।

    आलोचना : साठोत्तरी हिन्दी कविता में लोक-सौन्दर्य, नामवर की धरती।

    सम्पादन : साहित्यिक पत्रिका 'परिचय’ का प्रकाशन / सम्पादन।

    पुरस्कार : रेत में आकृतियाँ पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का नरेश मेहता कविता पुरस्कार, बोली बात पर वर्तमान साहित्य का मलखान सिंह सिसोदिया पुरस्कार, परिचय पत्रिका सम्पादन हेतु उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सर्जना पुरस्कार।

    सम्प्रति : प्रोफेसर हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221005

    सम्पर्क : सुमेधस, 909, काशीपुरम कालोनी, सीरगोवर्धन, पोस्ट डाफी, वाराणसी-221011

    मो. : 09415890513

    email : shriprakashshuklabhu@gmail.com

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