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Pahali Barish

Pahali Barish

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  • Pages: 131p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183619226
  •  
    उर्दू में दुनिया की अहम तरीन शायरी मौजूद है, मैंने बहुत सारी ज़बानों की शायरी पढ़ी है लेकिन उर्दू शायरी की खूबसूरती और दिलकशी सबसे अलग है। नई उर्दू शायरी की मोतबर और तवाना आवाज़ों में अज़ीज़ नबील का नाम बहुत अहम है। उनकी शायरी में नाज़ुक ख्यालात की खुशबू, नए एहसासात की रोशनी और जि़न्दगी के मुख्तलिफ इन्किशाफात के रंग बखूबी देखे और महसूस किए जा सकते हैं। अज़ीज़ नबील की शायरी में जो बात सबसे ज़्यादा अपील करती है, वो ये है कि वह अपनी बातें सीधे-सीधे ना करते हुए अलामतों और तशबीहात के बहुत खूबसूरत इस्तिमाल से करते हैं, जिसकी वजह से उनके एक शे’र से ब-यक-वक्त कई-कई मतलब निकाले जा सकते हैं। एक और खास बात ये है कि अज़ीज़ नबील की शायरी का डिक्शन और उस्लूब उनका अपना है। उन्होंने इस्तिमाल-शुदा रास्तों से बचते हुए अपने लिए कुछ इस तरह एक अलग राह निकाली है कि जि़न्दगी को शायरी और शायरी को जि़न्दगी में शामिल करके पेश कर दिया है। —जस्टिस मार्कंडेय काटजू इक्कीसवीं सदी तेज़ी से बदलते हुए अकदार की सदी है, इस सदी में उर्दू शायरी की जो आवाज़ें बुलन्द हुई हैं, उनमें अज़ीज़ नबील का नाम तवज्जो का हामिल है। क्लासिकी अदब से वाबस्तगी और इस अहद की हिस्सियत की आमेजि़श ने उनकी शायरी को पुरकशिश बना दिया है। मुझे पूरी उम्मीद है कि सादा ज़बान और खूबसूरत अलामतों के फनकाराना इस्तिमाल से पुर इस शायरी को कारईन पसन्द फरमाएँगे। —जावेद अख्तर

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    Aziz Nabeel

    अज़ीज़ नबील

    पूरा नाम : अज़ीज़ुर्रहमान मुहम्मद सिद्दीक अंसारी।

    जन्म : 26 जून, 1976; मुम्बई।

    प्रकाशन : खाब समुद्र (शायरी मजमूआ–2011); फिराक गोरखपुरी (शख्सियत, शायरी और शनाख्त–2014); इरफान सिद्दीकी (हयात, ख़िदमात और शे’री कायनात–2015); पंडित आनंद नारायण मुल्ला (शख्सियत और फन–2016); पंडित बृज नारायण चकबस्त (2018); आवाज़ के पर खुलते हैं (शायरी मजमूआ–2018), किताबी सिलसिला दस्तावेज़  (सम्पादन–2010 से अब तक)।

    ‘साहिर लुधियानवी अवार्ड’, ‘अब्दुल गफूर शहबाज़ अवार्ड’, ‘फ़िराक गोरखपुरी अवार्ड’ आदि।

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