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Panchwan Pahar

Panchwan Pahar

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  • Pages: 168p
  • Year: 1997
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8171785956
  •  
    सुविख्यात पंजाबी कथाकार गुरदयालसिंह का यह महत्त्वपूर्ण उपन्यास एक विधवा स्त्री के अनथक जीवन-संघर्ष को यथार्थवादी फलक पर उकेरता है । भारतीय समाज में सामंती संस्कारों का सबसे बड़ा शिकार नारी ही रही है । उसकी कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं, कोई पहचान नहीं, और अगर वह विधवा या पुनर्विवाहिता है तो न उसके जीवन में मानवीय भावनाओं का कोई स्थान है और न प्राणिक संवेदनाओं का । समाज में वह सिर्फ पाषाण-प्रतिमा की तरह जीवित रह सकती है अथवा 'देवी' की तरह मात्र पूजनीय बने रहकर । यही कारण है कि जब तक हीरा देवी समाज के इस जड़ परम्परावादी चौखटे में जड़ी रही, तब तक तो वह 'देवी' थी, पर जैसे ही उसने उसे तोड़ा, वैसे ही 'कुलटा' और 'कुलबोरनी' हो गई । इसके बावजूद, हीरा एक अपराजेय नारी-चरित्र है, और लेखक ने उसे अपनी गहरी प्रगतिशील जीवन,-दृष्टि और पैने इतिहास-बोध के सहारे रचा है । हीरा देवी के अतिरिक्त केसरी, मदन मोहन और सुरेंद्र इस कथाकृति के दूसरे ऐसे जीवंत चरित्र हैं, जो कि हीरा के संघर्ष में प्रेरक और सहायक की भूमिका निभाते हैं । पंजाबी से इस उपन्यास का हिंदी अनुवाद स्वयं लेखक ने किया है, इसलिए मूल कृति का समूचा साहित्यिक और सांस्कृतिक वैभव इसमें सहज सुरक्षित है ।

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    Gurdayal Singh

    जन्म: 10 जनवरी 1933। जन्म स्थान:  जैतो, जिला फरीदकोट (पंजाब)। स्नातकोत्तर शिक्षा के बाद जीविका के लिए लगातार अध्यापन-कार्य।

    बाह्य घटनाओं के आन्तरिक अनुभव और आन्तरिक भावजगत के बाह्य अभिव्यक्तिकरण द्वारा पाठक को गहन मानवीय अनुभवों तथा भारतीय जन-जीवन के विभिन्न पहलुओं को उकेरनेवाले सुविख्यात पंजाबी उपन्यास।

    प्रकाशित पुस्तकें:

    उपन्यास: मढ़ी दा दीवा, अणहोये, कुवेला, रेते दी इक्क मुट्ठी, अध चाँदनी रात, आथण, उग्गण, अन्हें घोड़े दा दान, पहुफटाले तों पहलाँ (1922)।

    कहानी-संग्रह: सग्गी फुल्ल, ओपरा घर, चन्न दा बूटा, कुत्ता ते आदमी, मस्ती बोता, बेगाना पिंड, रुखे मिस्से बन्दे, पक्का ठिकाना, करोर दी ढिगरी।

    बालोपयोगी साहित्य: बकलम खुद, टुक खोह लये काँवाँ, बाबा खेमा तथा सात पुस्तकें प्रकाश्य।

    हिन्दी में अनूदित: अध चाँदनी रात, मढ़ी दा दीवा, घर और रास्ता, पाँचवाँ पहर, परमा तथा सब देस पराया (उपन्यास)।

    पुरस्कार: सोवियत लैण्ड नेहरू पुरस्कार - 1986, साहित्य अकादमी पुरस्कार - 1979, नानकसिंह नावलिस्ट पुरस्कार - 1972 (‘अध चाँदनी रात’ के लिए) चार उत्तम गल्प-साहित्य-रचनाओं के लिए भाषा विभाग, पंजाब की ओर से - 1966, 67, 68, 72 पुरस्कार। शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार - 1993।

    सम्प्रति: ब्रजेन्द्र कॉलेज, फरीदकोट में पंजाबी भाषा साहित्य के व्याख्याता।

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