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Pashchatya Kavya Chintan

Pashchatya Kavya Chintan

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  • Pages: 266p
  • Year: 2016, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183615419
  •  
    भारतीय काव्यशास्त्र की भाँति पाश्चात्य काव्य-चिंतन की भी एक सुदीर्घ, समृद्ध एवं विस्तीर्ण परम्परा है जिसके विकास में पाश्चात्य विचारकों एवं काव्यांदोलनों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। पाश्चात्य विचारकों तथा आलोचकों ने अत्यंत प्राचीन काल से काव्य तथा कलाकृतियों में निहित सौंदर्य-तत्त्व की विभिन्न दृष्टिकोणों से गहराई में जाकर छानबीन की है और काव्य-चिंतन के अनेकों शिखर पार किए हैं। पाश्चात्य काव्य-चिंतन के इस व्यापक फलक के निर्माण में विविध चिंतन- सरणियों, विचारधाराओं, कवि स्वभावों, संस्कारों एवं देशकाल की परिस्थितियों का भी उल्लेखनीय योगदान रहा है। पाश्चात्य मनीषा ने काव्य-चिंतन के क्षेत्र में सदैव प्रयोग किए हैं और अपनी गतिशील सोच द्वारा परम्परा के साथ घात-प्रतिघात करते हुए उसे पुरस्कृत किया है। इन काव्यांदोलनों का महत्त्व पाश्चात्य विचारकों के योगदान की तुलना में ज्यादा ही है क्योंकि प्लेटो से लेकर जैक्स देरिदा तक यदि विचारकों की एक सुदीर्घ शृंखला उपलब्ध होती है तो काव्यांदोलनों की परम्परा और भी ज्यादा समृद्ध तथा विस्मयकारी है। ऐसी स्थिति में इन काव्यांदोलनों के समस्त आयामों को समेटते हुए उन्हें एक सूत्र में पिरोकर प्रस्तुत करने की अपेक्षा बरकरार है। प्रस्तुत पुस्तक इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

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    Karunashankar Upadhyay

    करुणाशंकर उपाध्याय

    जन्म : 15 अप्रैल, 1968 को घोरका तालुकदारी, शिवगढ़, प्रतापगढ़ (उ.प्र.)।

    शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी., एस.ई.टी.।

    पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च : पाश्चात्य काव्य-चिंतन के विविध आंदोलन पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अध्येतावृत्ति पर शोधकार्य । हिंदी आचार्य कवियों का काव्यशास्त्रीय चिंतन विषय पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रदत्त बृहद शोध प्रकल्प  ।

    प्रकाशित कृतियाँ : सर्जना की परख, साहित्यकार बेकल : संवेदना और शिल्प, आधुनिक हिंदी कविता में काव्य-चिंतन, मध्यकालीन काव्य-चिंतन और संवेदना, पाश्चात्य काव्य-चिंतन, विविधा, आधुनिक कविता का पुनर्पाठ, हिंदी कथा-साहित्य का पुनर्पाठ, आवाँ: विमर्श, हिंदी साहित्य : मूल्य और मूल्यांकन, वक्रतुंड : मिथक की समकालीनता, ब्लैक होल विमर्श, माया गोविन्द : सृजन के अनछुए सन्दर्भ तथा साहित्य और संस्कृति के सरोकार ।

    सम्मान/पुरस्कार : महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी का बाबूराव विष्णु पराडकर पुरस्कार तथा महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान, हिंदी सेवी सम्मान, पं. दीनदयाल उपाध्याय आदर्श शिक्षक सम्मान, आशीर्वाद राजभाषा सम्मान, विश्व हिंदी सेवा सम्मान, शिक्षक भारती गौरव सम्मान, मुंबई विश्वविद्यालय का सर्वोत्तम शिक्षक सम्मान, हिंदी साहित्य सम्मलेन, प्रयाग का सम्मलेन सम्मान, जीवंती फाउंडेशन का साहित्य गौरव सम्मान तथा भारती गौरव सम्मान।

    संपादन : दो दर्जन से ज्यादा पुस्तकों का संपादन ।

    सहलेखन : मानव मूल्यपरक शब्दावली का विश्वकोश तथा तुलनात्मक साहित्य का विश्वकोश ।

    संप्रति : प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई-400098

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