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Patta Patta Boota Boota

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  • Pages: 188
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728107
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    काशीनाथ सिंह ने कई विधाओं में रचना की है ! यह उनकी अभी तक असंकलित रचनाओं का संग्रह है जिसमे उनकी कुछ कहानियों के साथ कुछ अन्य गद्य रचनाओं को शामिल किया गया है ! इनमे से कुछ कहानियों को काशीनाथ जी ने ख़ारिज के खाते में दाल रखा था लेकिन किसी भी रचनाकार की संरचना को पूरी तरह समझने के लिए यह आवश्यक है कि उसकी उन रचनाओं को भी पढ़ा जाए जिन्हें वह खुद महत्त्पूर्ण नहीं मानता ! कई बार ऐसा भी होता है कि अपनी जिन चीजों को लेखक बहुत अहमियत नहीं देता, वे वास्तव में पाठकों के लिए बहुत महत्त्पूर्ण साबित होती हैं ! संभव है कि इनमे भी आपको कुछ ऐसी रचनाएँ दिख जाएँ ! काशीनाथ सिंह लोक-बोध से संपन्न रचनाकार रहे हैं ! वे चीजों को वहां से देखने के हिमायती हैं जहाँ हम खड़े होते हैं, वहां से नहीं जहाँ से देखने का रिवाज चल निकलता है और हर कोई जिसे या तो फैशन के चलते या पोलिटिकल करेक्टनेस के कारण अपनाने लगता है ! इस पुस्तक में शामिल रचनाओं में हमें उनकी अपनी दृष्टि से देखि हुई चीजे मिलती हैं जो हमें आगे अपनी दृष्टि विकसित करने, अपने पक्ष को परिभाषित करने का आधार दती हैं ! इस पुस्तकीय प्रस्तुति का उददेश्य काशीनाथ सिंह की पचास वर्षों के व्यापक कालखंड में बिखरे रचना-स्फुलिंगों को एकत्रित करना और उनके उस लेखक को समझना है जो इस बीच बना, साथ ही उसके बनने की प्रक्रिया को भी !

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    Kashinath Singh

    काशीनाथ सिंह

    जन्म : 1 जनवरी, 1937, बनारस जिले के जीयनपुर गाँव में ।

    शिक्षा : आरम्भिक शिक्षा गाँव के पास के विद्यालयों में। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. (1959) और पीएच.डी. (1963)।

    काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रहे।

    पहली कहानी ‘संकट’ कृति पत्रिका (सितम्बर, 1960) में प्रकाशित।

    कृतियाँ : लोग बिस्तरों पर, सुबह का डर, आदमीनामा, नई तारीख, सदी का सबसे बड़ा आदमी, कल की फटेहाल कहानियाँ, कहानी उपख्यान, प्रतिनिधि कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ (कहानी-संग्रह); घोआस (नाटक); हिन्दी में संयुक्त क्रियाएँ (शोध); आलोचना भी रचना है (समीक्षा); काशी का अस्सी, रेहन पर रग्घू, महुआचरित, उपसंहार (उपन्यास); याद हो कि न याद हो, आछे दिन पाछे गए, घर का जोगी जोगड़ा (संस्मरण); गपोड़ी से गपशप (साक्षात्कार)।

    अपना मोर्चा का जापानी एवं कोरियाई भाषाओं में अनुवाद। जापानी में कहानियों का अनूदित संग्रह। कई कहानियों के भारतीय और अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद। उपन्यास और कहानियों की रंग-प्रस्तुतियाँ। ‘तीसरी दुनिया’ के लेखकों-संस्कृतिकर्मियों के सम्मेलन के सिलसिले में जापान-यात्रा (नवम्बर, 1981)।

    सम्मान : भारत भारती पुरस्कार, कैफी आज़मी अवार्ड, कथा सम्मान, समुच्चय सम्मान, शरद जोशी सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान और ‘रेहन पर रग्घू’ उपन्यास  के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, रचना समग्र पुरस्कार।

    सम्प्रति : बनारस में रहकर स्वतंत्र लेखन।

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