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Patthar Par Doob

Patthar Par Doob

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  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126723225
  •  
    सुपरिचित युवा कवि और पत्रकार सुन्दर चन्द ठाकुर का यह पहला उपन्यास ‘पत्थर पर दूब’ ऊपरी तौर पर पहाड़ की सुन्दरता और निश्छलता से निकलकर मैदानी कठोरताओं और संघर्षों की ओर जानेवाला कथानक लग सकता है, लेकिन अपनी गहराई में उसका ताना-बाना तीन स्तरों पर बुना हुआ है। इन स्तरों पर तीन समय, तीन पृष्ठभूमियाँ और तीन घटनाक्रम परस्पर आवाजाही करते हैं। कथा साहित्य में फ्लैशबैक का उपयोग एक पुरानी और परिचित प्रविधि है, लेकिन ‘पत्थर पर दूब’ में इस तकनीक का इस्तेमाल इतने नए ढंग से हुआ है कि तीनों समय एक ही वर्तमान में सक्रिय होते हैं। कुमाऊँ के एक गाँव से निकलकर फौज में गए नौजवान विक्रम के जीवन का सफर अगर एक तरफ उसके आन्तरिक द्वन्द्वों और ऊहापोहों को चिद्दित करता है तो दूसरी तरफ उसमें फौजी तंत्र में निहित गिरावट की चीरफाड़ भी विश्वसनीय तरीके से मिलती है। सुन्दर चन्द ठाकुर ने इस कथानक को मुम्बई पर हुए आतंकी हमलों से निपटने के लिए की गई कमांडो कार्रवाई से जोड़कर एक समकालीन शक्ल दे दी है। घर-परिवार से विच्छिन्न होता हुआ और पिता और प्रेमिका को खो चुका यह नौजवान कमांडो जिस जाँबाजी का प्रदर्शन करता है, उसके फल से भी वह वंचित रहता है। इसके बावजूद वह किसी त्रासदी का नायक नहीं है, बल्कि हमारे युग का एक ऐसा प्रतिनिधि है जो एक सफर और एक अध्याय के पूरा होने पर किसी ऐसी जगह और ऐसे धुंधलके में खड़ा है जहाँ से उसे आगे जाना है और अगली यात्रा करनी है जिसका गन्तव्य भले ही साफ न दिखाई दे रहा हो। सुन्दर चन्द ठाकुर इससे पहले अपने दो कविता-संग्रहों - ‘किसी रंग की छाया’ और ‘एक दुनिया है असंख्य’ - से एक महत्त्वपूर्ण कवि के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। उनकी कई कहानियाँ भी चर्चित हुई हैं और अब उनका पहला उपन्यास उनकी रचनात्मक प्रतिभा और सामर्थ्य के एक उत्कृष्ट नमूने के रूप में सामने है। किसी रचना का पठनीय होना कोई अनिवार्य गुण नहीं होता, लेकिन अगर अच्छे साहित्य में पाठक को बाँधने और अपने साथ ले चलने की क्षमता भी हो तो उसकी उत्कृष्टता बढ़ जाती है। ‘पत्थर पर दूब’ के शिल्प में पहाड़ी नदियों जैसा प्रवाह है जिसमें पाठक बहने लगता है और भाषा में ऐसी पारदर्शिता है कि कथावृत्त में घटित होने वाले दृश्य पड़ने लगते हैं। उपन्यास जीवन की कथा के साथ-साथ मनुष्य के मन और मस्तिष्क की कथा भी कहता है और इस लिहाज से ‘पत्थर पर दूब’ एक उल्लेखनीय कृति बन पड़ी है। - मंगलेश डबराल

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    Sunder Chand Thakur

    जन्म: 11 अगस्त, 1968, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में।

    शिक्षा: 1990 में विज्ञान में ग्रेजुएशन। बाद में मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी। 1992 में सेना में कमिशन। मार्च 1992 से अप्रैल 1997 तक भारतीय सेना में। इस दौरान पन्द्रह महीने के लिए सोमालिया में संयुक्त राष्ट्र शान्ति सेना के सदस्य के रूप में तैनाती।

    उन्होंने अपने साहित्यिक लगाव के चलते ही सेना से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ली और दिल्ली में टाइम्स ऑफ इंडिया समूह में प्रशासनिक पद पर कार्य सँभाला। 2003 में वह प्रशासनिक पद छोड़कर नवभारत टाइम्स से जुड़े। 2010 में उनका मुम्बई तबादला जहाँ वह आज भी नवभारत टाइम्स, मुम्बई के स्थानीय सम्पादक हैं।

    सेना छोड़कर आने के बाद पंकज बिष्ट द्वारा सम्पादित मासिक पत्रिका ‘समयांतर’ से जुड़े, जिसके लिए उन्होंने कई वर्षों तक विशेषांकों के आधार लेख, समीक्षाएँ लिखने और अनुवाद का काम किया। इस वक्त तक उनकी कविताएँ सभी प्रमुख साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगी थीं। 2001 में उनका पहला कविता संग्रह ‘किसी रंग की छाया’ प्रकाशित। उनकी कहानियाँ हंस, ज्ञानोदय, वागर्थ आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं। हंस में उनका लेख ‘धर्म, सेक्स और नैतिकता’ चर्चित। 2008 में उन्होंने रूस के चर्चित कवि येव्गिनी येव्तुशेंको की जीवनी का अनुवाद किया, जो ‘एक अजब दास्तां’ के नाम से प्रकाशित हुआ। 2009 में उनका दूसरा संग्रह ‘एक दुनिया है असंख्य’ आया। उनकी कविताओं के जर्मन, बांग्ला, मराठी, अंग्रेजी आदि भाषाओं में अनुवाद हुए हैं।

    सम्मान: 2001 में भारतीय भाषा परिषद का युवा पुरस्कार और 2003 में भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार।

    क्रिकेट में विशेष रुचि रखने वाले सुन्दर चन्द ठाकुर नवभारत टाइम्स के लिए पिछले कई वर्षों से ‘दूसरा पहलू’ शीर्षक से चर्चित कॉलम लिख रहे हैं। मुम्बई में उनका शहर के जीवन पर आधारित कॉलम ‘मुम्बई मेरी जान’ भी लोकप्रिय है।

    सुन्दर चन्द ठाकुर अपनी पत्नी डॉ. शशिकला, बेटी सम्राज्ञी और माँ के साथ नवी मुम्बई में रहते हैं।

    सम्पर्क: सम्पादक, नवभारत टाइम्स, टाइम्स बिल्डिंग, डॉ. डी.एन. रोड, मुम्बई-400 001

    मोबाइल: 09987500520 स ईमेल: ेनदकमतण्जींानत/हउंपसण्बवउ

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