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Pratibandhit Hindi Sahitya : Vols. 1-2

Pratibandhit Hindi Sahitya : Vols. 1-2

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  • Pages: 383p
  • Year: 1999
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171194354
  •  
    प्रतिबंधित हिंदी साहित्य के दो खंडों में स्वाधीनता आदोलन के दिनों की प्रतिबंधित रचनाओं का संकलन किया गया है । आजादी की लड़ाई के दिनों की याद ताजा करने तथा उस समय के रचना-मूल्यों को समझने के लिए यह संकलन ऐतिहासिक महत्त्व का है । पुस्तक के पहले खंड में प्रतिबंधित कहानियाँ और उपन्यास संकलित हैं तथा दूसरे खंड में कविताएँ । जिन रचनाकारों की रचनाएँ इनमें संकलित हैं उन्होंने स्वाधीनता आदोलन के दौरान अपनी रचनाओं को हथियार की तरह इस्तेमाल किया । अपनी रचनाओं द्वारा उन्होंने साम्राज्यवादी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आम लोगों में विद्रोह और अवज्ञा की मानसिकता तैयार करने की कोशिश की । अंग्रेजों ने ऐसे लेखकों का दमन किया, उनकी क्रांतिकारी रचनाओं के लिए उन पर मुकद्‌दमा चलाया और प्रतिबंध लगा दिया । इन दो खंडों में हमने ऐसी ही प्रतिबंधित रचनाओं का संकलन किया है । श्री रुस्तम राय ने काफी मेहनत करके काल कोठरी के अँधेरे से ये रचनाएँ निकाल कर पाठकों तक पहुँचाने में हमारी मदद की है । आशा है, इन रचनाओं से उस दौर के साहित्य की कुछ अछूती विशेषताएँ हमारे सामने आएँगी । साथ ही हम स्वाधीनता आदोलन से सीधे जुड़े साहित्य का जायजा ले सकेंगे । आज भी देश की सामाजिक परिस्थितियों में कोई निर्णायक बदलाव नहीं आया है इसलिए ये रचनाएँ अब भी प्रासंगिक हैं । पुस्तक के पहले खंड में पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र', ऋषभ चरण जैन तथा मुनीश्वर दत्त अवस्थी की कहानियों के अलावा जिन कथाकारों की कहानियाँ शामिल ह्रैं उनके नाम हैं-यशपाल, लक्ष्मीचंद्र वाजपेयी 'चन्द्र', मुक्त, लीलावती बीए, जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज', आचार्य चतुर सेन शास्त्री, विश्वंभर नाथ शर्मा 'कौशिक तथा प्रेम बंधु । इस खंड में ब्रजेन्द्र नाथ गौड़ का उपन्यास 'पैरोल पर' भी संकलित है । इस उपन्यास ने स्वाधीनता आदोलन के दिनों में क्रांतिकारियों के बीच नया उत्साह पैदा कर दिया था । आशा है, ये रचनाएँ स्वाधीनता आदोलन से जुड़ी रचनाशीलता पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित करेंगी ।

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    Rustum Roy

    जन्म: 7 जनवरी, 1963, बिहार के सारण जिले के बनपुरा गाँव में।

    शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी), बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर। एम.फिल. (हिन्दी), पी-एच.डी. (हिन्दी), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली। राष्ट्रीय मेधा छात्रवृत्ति एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वरिष्ठ अनुसंधान फेलोशिप।

    प्रकाशन: प्रतिबन्धित हिन्दी साहित्य (दो खंडों में), मेघालय की लोककथाएँ और स्वाधीनता आन्दोलन और क्रान्तिकारी साहित्य नामक दो पुस्तकें शीघ्र प्रकाशित होने वाली हैं। इनके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक लेख, शोध-पत्र एवं समीक्षाएँ प्रकाशित।

    सम्प्रति: राजभाषा विभाग के केन्द्रीय हिन्दी प्रशिक्षण संस्थान/केन्द्रीय हिन्दी प्रशिक्षण योजना में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत।

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