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Pratinidhi Kahaniyan : Mamta Kaliya

Pratinidhi Kahaniyan : Mamta Kaliya

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  • Pages: 144p
  • Year: 2016, 2nd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126726509
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    ममता कालिया ने जब कहानियाँ लिखनी शुरू की, नई कहानी का आन्दोलन पूरी तरह समाप्त को चुका था और उसके बाद की पीढी कहानी में अपनी पहचान करा चुकी थी । इन कहानियों में मध्य और निग्न-मध्य यहाँ को विडम्बनाओं, हताशाओँ और पाखंड को गहरी संवेदनात्मक अंतर्दृष्टि के साथ अंकित किया गया था । ममता कालिया की कहानियाँ, भाषा एवं काव्योपकरणों के स्तर पर नईं कहानी वाली चित्रात्मकता और निर्मल वर्मा की कहानियों के प्रसंग में चर्चा में आई संगीतपूर्ण भाषा के उपयोग का कोई साक्ष्य नहीं देतीं । वे उस प्रतीक-विधान और बिम्ब-बहुलता से भी बचती है जिसके अतिरेक की चर्चा देवीशंकर अवस्थी ने राजेन्द्र यादव की कहानियों के प्रसंग में की थी । उनकी कहानियाँ प्रायः छोटे-छोटे घटना-प्रसंगों की कहानियाँ हैं । ममता कालिया की कहानियों में स्त्री अपने पूरे सामाजिक परिपेक्ष्य में अंकित है । चालू और फैशनेबुल स्त्री-विमर्श के नाम पर स्त्री की आजादी को वे न तो सिर्फ देह के स्तर पर उतारकर देखती हैं और न ही परिवार को स्त्री के लिए एक पिंजरा मानती हैं जिसे तोड़कर स्वच्छंद विचरने में ही उसकी मुक्ति है । जीवन और कलावाद की शाश्वत बहस में ममता कालिया किसके साथ हैं, इसे उनकी कहानी ‘सेमिनार’ में देखा जा सकता है । यह अकारण नहीं है कि उनकी भाषा में एक खास तरह की तुर्शी है जिसकी मदद से वे सामाजिक विद्रूपताओं पर व्यंग्य का बहुत सधा और सीधा उपयोग करती हैं ।

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    Mamta Kaliya

    ममता कालिया

    ममता कालिया का जन्म 2 नवम्बर, 1940 को बृन्दावन में  हुआ । शिक्षा दिल्ली, मुम्बई, पुणे, नागपुर और इन्दौर में ।  कहानी, नाटक, उपन्यास, निबन्ध, कविता और पत्रकारिता  अर्थात साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन । हिन्दी  कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से  निरन्तर बनी हुई है । वे महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी  विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका 'हिन्दी' की सम्पादक  रही हैं ।

    दो खडॉ में अब तक को सम्पूर्ण कहानियों ममता कालिया र्का कहानियाँ शीर्षक से प्रकाशित हैं । बेघर, नरक दर नरक, प्रेम कहानी, छुटकारा, दौड़, प्रतिदिन, उसका यौवन, आपकी छोटी लड़की, दुक्खम सुक्खम चर्चित पुस्तकें हैं ।

    अंग्रेजी में ट्रिब्यूट टू पापा एंड अदर पोयम्स प्रकाशित है । कई राष्ट्रीय सम्मानों से विभूषित । हिन्दी को चर्चित रचनाकार ।

    सम्पर्क : बी 3ए /3/3, सुशान्त एक्वापोलिस, क्रॉसिंग रिपब्लिक के सामने, एन. एच. 24, गाजियाबाद- 203016

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