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Pratinidhi Kahaniyan : Rameshchandra Shah

Pratinidhi Kahaniyan : Rameshchandra Shah

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  • Pages: 158
  • Year: 2018, 3rd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788171783205
  •  
    रमेशचन्द्र शाह की कहानियों में शहरी मध्यवर्ग की जिंदगी धड़कती है । अपनी कहानियों में उन्होंने इस वर्ग की अंतहीन महागाथा को नया विस्तार दिया है । इस विस्तार का नयापन बहुस्तरीय है । विवरण और विश्लेषण के शिल्प में कहानी लिखते हुए भी शाह जी कहीं एकरस नहीं होते । असल में शाह जी प्रथमत: कवि हैं, इसलिए उनके कथ्य और भाषा में गहरी ऐन्द्रिकता और संवेदनशीलता है । उनकी रचना का यह गुण उनके कथाकार व्यक्तित्व की एक अलग श्रेणी बनाता है । शाह जी के पात्र मध्यवर्गीय परिस्थिति की विडम्बनाओँ में फँसे हैं । लेकिन जीवन विरोधियों के बीच भी वे जीबन जीने की गहरी इच्छा से जुड़े हैं । पात्रो की यह महत्त्वपूर्ण विशेषता है । उनके चरित्र जिवंत और अविस्मरणीय हैं । अविस्मरणीय इसलिए कि कथा में अपने प्रवेश के साथ ही वे चरित्र हमारी जिंदगी में शामिल हो जाते हैं । इन चरित्रों से मिलते ही लगता है कि उनसे हमारा पहले से ही गहरा परिचय और आत्मीयता है । शाह जी के इन चरित्रों से रूबरू होते आपको भी अपने वे परिचित सहज ही मिल जाएँगे जो कहीं दूर छूट गए हैं लेकिन आज भी आपके जीवन में लगातार शामिल हैं ।

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    Ramesh Chandra Shah

    जन्म : वैशाखी त्रयोदशी, 1937 अल्मोड़ा, उत्तरप्रदेश।

    शिक्षा : अल्मोड़ा  तथा  प्रयाग विश्वविद्यालय में।

    प्रकाशित कृतित्व—काव्य : कछुए की पीठ पर, हरिश्चन्द्र आओ, नदी भागती आई, प्यारे मुचकुन्द को, चाक पर समय तथा देखते हैं शब्द भी अपना समय के अतिरिक्त तीन बाल कविता-संग्रह। उपन्यास : गोबरगणेश, कि़स्सा ग़ुलाम, पूर्वापर, आखि़री दिन, पुनर्वास। छठा उपन्यास 'विभूतिबाबू की आत्मकथा’ शीघ्र प्रकाश्य। 'कि़स्सा ग़ुलाम’ आठ भारतीय भाषाओं में अनूदित। कहानी-संग्रह : जंगल में आग, मुहल्ले का रावण, मानपत्र, प्रतिनिधि कहानियाँ (राजकमल सीरीज़); थिएटर। निबन्ध-संग्रह : शैतान के बहाने, रचना के बदले, पढ़ते-पढ़ते, सबद निरन्तर, आड़ू का पेड़, स्वधर्म और कालगति तथा स्वाधीन इस देश में। यात्रा-वृत्तान्त : बहुवचन में दो यात्रा-वृत्तान्त संकलित तथा एक लम्बी छाँह। अंग्रेज़ी में : येट्स एंड एलियट : पर्सपैक्टिव्ज़ ऑन इंडिया, जयशंकर प्रसाद तथा टेमेनोए अकादमी लन्दन द्वारा चार व्याख्यानों की पुस्तिका प्रकाशित।

    सम्मान : सर्जनात्मक उपलब्धियों के लिए मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग का शिखर-सम्मान, कविता-संग्रह नदी भागती आई के लिए मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् का भवानीप्रसाद मिश्र पुरस्कार, उपन्यास पूर्वापर के लिए भारतीय भाषा परिषद्, कलकत्ता तथा निबन्ध-संग्रह स्वधर्म और कालगति के लिए उत्तरप्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा सम्मानित।

    सम्प्रति : भोपाल के हमीदिया कॉलेज से अंग्रेज़ी विभाग के प्रोफ़ेसर-विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त होने के उपरान्त निराला सृजनपीठ, भोपाल के निदेशक पद पर कार्यरत।

    सम्पर्क : निराला  सृजनपीठ  सी-165/1, प्रोफ़ेसर्स कालोनी, भोपाल-462 002

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