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Pratinidhi Kavitayen : Shamsher Bahadur Singh

Pratinidhi Kavitayen : Shamsher Bahadur Singh

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  • Pages: 192p
  • Year: 2018, 9th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126707485
  •  
    निराला को अपना आदर्श माननेवाले शमशेर बहादुर सिंह हिंदी में 'कवियों के कवि' शमशेर सिंह के रूप में विख्यात हैं | इस कृति में उनकी चुनिन्दा कविताओं को संकलित किया गया है | शमशेर एक खास सोच और तेवरवाले कवि है | उनकी कविता शब्दों तक सीमित नहीं होती, बल्कि ऐसे तमाम शब्द है - जिन्हें वे बहुत चुनकर, सोच-समझकर अपनी बात के लिए इस्तेमाल करते हैं - काव्यानुभवों की एक व्यापक और जरा जटिल दुनिया भी रचते हैं | अपनी काव्य-वस्तु के चयन और उसके शिल्प-संगठन में वे बेहद सजग हैं | इसके लिए उन्हें विचार से मार्क्सवादी और शिल्प में रूपवादी-जैसे आरोप भी सहने पड़े हैं, जबकि उनकी स्पष्ट राय है कि कला के संघर्ष को सामाजिक संघर्ष से काटकर नहीं देखा जा सकता | वास्तव में उनकी कविता सीधे-सरल तरीके से सामाजिक संघर्ष की कविता नहीं है, बल्कि उसे उनकी कविता-भाषा की बहुस्तरीयता को बेधकर ही समझा जा सकता है; और यह संकल्प उनकी कविताओं की तमाम रचनात्मक विशेषताओं को पूरी विविधता के साथ हमारे सामने रखता है |

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    Shamsher Bahadur Singh

    शमशेर बहादुर सिंह

    जन्म: 13 जनवरी, 1911, देहरादून (उ.प्र.)।

    शिक्षा: प्रारम्भिक शिक्षा देहरादून में। बाद की शिक्षा गोंडा और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में। 1935-36 में उकील बंधुओं से कला-प्रशिक्षण लिया।

    साहित्यिक कार्यक्षेत्र: ‘रूपाभ’, इलाहाबाद में कार्यालय सहायक (1939), ‘कहानी’ में त्रिलोचन के साथ (1940), ‘नया साहित्य’, बम्बई में कम्यून में रहते हुए (1946), ‘माया’ में सहायक सम्पादक (1948-54), ‘नया पथ’ और ‘मनोहर कहानियाँ’ में सम्पादन- सहयोग। दिल्ली विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की एक महत्त्वपूर्ण परियोजना ‘उर्दू-हिन्दी कोश’ का सम्पादन (1965-77)। प्रेमचंद सृजनपीठ, विक्रम विश्वविद्यालय (मध्य प्रदेश) के अध्यक्ष (1981-85)।

    सन् 1978 में सोवियत संघ की यात्रा। विभिन्न भाषाओं में कविताओं के अनुवाद।

    प्रकाशित कृतियाँ: कुछ कविताएँ व कुछ और कविताएँ, चुका भी हूँ नहीं मैं, इतने पास अपने, उदिता: अभिव्यक्ति का संघर्ष, बात बोलेगी, काल तुझसे होड़ है मेरी, टूटी हुई बिखरी हुई, कहीं बहुत दूर से सुन रहा हूँ (कविता); कुछ और गद्य रचनाएँ (निबन्ध)।

    सम्मान: मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् तुलसी पुरस्कार (1977); साहित्य अकादेमी पुरस्कार (1977); मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार; कबीर सम्मान (1989)।

    निधन: 12 मई, 1993

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