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Premchand : Kahani Ka Rahanuma

Premchand : Kahani Ka Rahanuma

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  • Pages: 248p
  • Year: 2008, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 10: 8180310329
  •  
    .... प्रेमचन्द की रचनाएँ आधुनिक भारत को समझने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है, क्योंकि उन्हीं के समय से भारतीय पुनर्जागरण का प्रारम्भ होता है, जिसके पैरों की आहट उनकी रचनाओं में महसूस होती है । राष्ट्रीय जीवन की परिवर्तनशीलता, क्रिया- प्रतिक्रिया, प्रगति एवं प्रतिक्रियावादिता, धर्म तथा मानवता की परछाइयाँ प्रेमचन्द की रचनाओं में झलकती हैं । प्रेमचन्द की अनुभूति नदी के किनारे खड़े किसी दर्शक के समान नहीं है वरन् उन्होंने राष्ट्रीय जीवन के गहरे पानी में उतरकर समस्याओं से बोझिल नैया को किनारे जाने में अपने सहयोगियों का हाथ बँटाया था ।.... प्रेमचन्द के विषय में विभिन्न प्रकार के विचार व्यक्त किये गये हैं । किसी विचार में प्रेमचन्द प्राचीन भारत का गौरवगान करते हैं । कोई उन्हें किसानों तथा मजदूरों का साथी बताता है, किसी के विचार में प्रेमचन्द गांधीवादी हैं, कोई उन्हें साम्यवादी कहता है । आधुनिक वैज्ञानिक तथा भौतिक स्रोतों को जीवन का आधार माननेवालों को प्रेमचन्द में पाश्चात्य चिंतन दीख पड़ता है । कोई उनकी चर्चा आधुनिक भारतीय संवेदना की आधारभूमि मानता है । इस रंगारंगी में प्रस्तुत पुस्तक प्रेमचन्द के अध्ययन एवं अध्यापन को अधिक व्यापक करने के विचार से अपने मन्तव्य प्रस्तुत करती है ।

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    Jafar Reja

    जाफ़र रज़ा

    प्रख्यात विद्वान, साहित्यकार एवं चिन्तक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा का जन्म 1 दिसम्बर, 1939 ई. को इलाहबाद में गंगा पार के उतराँव में हुआ । ये स्वतंत्रता-सेनानी एवं लेखक स्वर्गीय सैय्यद खैरात हसन के सुपुत्र हैं । इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उर्दू तथा हिंदी में दो बार 'डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी' की उपाधियाँ प्राप्त कीं तथा कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर ने प्रकाशित शोधग्रंथों की मान्यतारूपेण 'डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स' की उपाधि प्रदान की ।

    इलाहबाद विश्वविद्यालय के गौरवपात्रिक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा 35 वर्षों तक अध्यापन कर प्रेमचंद पीठाचार्य एवं उर्दू विभागाध्यक्ष पद से 2000 ई. में सेवानिवृत्त हुए ।

    प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा का व्यक्तित्व बहुआयामी है । हिंदी तथा उर्दू भाषाओँ एवं साहित्य के अतिरिक्त संस्कृति, इतिहास, दर्शन, इस्लाम धर्म आदि विषयों पर लगभग तीन दर्जन प्रकाशित ग्रन्थ हैं । अनेक बार राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत एवं अलंकृत हुए ।

    कुछेक महत्त्वपूर्ण हिंदी पुस्तकों में भारतीय इस्लामी संस्कृति, इस्लाम का सैद्धान्तिक परिवेश, इस्लाम के धार्मिक आयाम : हुसैनी क्रान्ति के परिप्रेक्ष्य में, भारतीय साहित्य में मुसलमानों का अवदान, कथाकार प्रेमचंद, प्रेमचन्द कहानी का रहनुमा, उर्दू शायरी आज़ादी के बाद, हिंदी-उर्दू शब्दकोश आदि उल्लेखनीय हैं ।

    प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा की भारतभूमि के प्रति समर्पण, मानवप्रेम में ईशप्रेम की सहज अनुभूति, बरबस भारतेंदु के शब्द स्मृति में गूँजते हैं--इन मुसलमान भक्तजनन पर कोटिन हिन्दू वारिये !

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