• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Pul Kabhi Kahali Nahi Milte

Pul Kabhi Kahali Nahi Milte

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 160

Special Price Rs. 144

10%

  • Pages: 151p
  • Year: 2005
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 10: 8180310614
  •  
    सुधांशु उपाध्याय की ये कविताएँ भविष्य को जिस रूप में वर्तमानित करती हैं उससे वर्तमान और भविष्य और व्यतीत का चेहरा त्रिशिरा की तरह दिखायी पड़ने लगता है । वैसे तो कविता अपने समय की संवेदन शून्यता को पहचानने और उसे पूरने का काम करती ही है बल्कि ऐसा करके ही वे कविताएँ बनती हैं । सुधांशु की इन कविताओं में यह तत्त्व जिस मुहावरे में व्यक्त हुआ है उसे भाषा की सहज लाक्षणिकता कहा जा सकता है । सुधांशु की विशेषता यह है कि वे 'घटना' को काव्य वस्तु में बदलते समय उसकी वास्तविकता का निषेध नहीं करते हैं बल्कि उसके 'देश' को कभी-कभी काल के आयाम से मुक्त कर देते हैं फलत: मनुष्य की पीड़ा, बेचैनी, खीझ, कुढ़न और पूणा आदि चिंतनशीलता से भावित होकर ही कविता का रूप ग्रहण करती है । यह संकलन इसका प्रमाण है । गीतों की प्रमुख विशेषता मुहावरों का निमार्ण और विकास है । इस संकलन में कवि ने नये मुहावरों को अन्वेषित किया है । मुहावरों का प्रयोग कविता नहीं बनाता बल्कि मुहावरों का विकास कविता बनाता है । सामान्य शब्द जब अपना कोशीय अर्थ छोड्‌कर, 'संकेत बन जाते हैं तो गीत की निर्वचन क्षमता ग्रहीता प्रति ग्रहीता बदलती रहती है । इस संग्रह की कविताओं को काव्य रूढ़ियों से मुक्त होकर इस अर्थ में पढ़ा जाना चाहिए । 'वाह और ' आह' के तत्त्वों से रहित होने के कारण इन कविताओं का महत्व बढ़ जाता है । लगभग सभी गीतों में मनुष्य के प्रति गहरी संसक्ति है और इसीलिए मार्मिक चिन्ता भी । सुधांशु अपने पहले संग्रह से ही निरर्थक शब्दों के प्रयोग-प्रवाह से बचते रहे हैं । इस संग्रह में अब वह कवि की आदत हो गया है । इसलिए मैं मानता हूँ कि उनकी कविताओं में 'उक्तिवैचिय्य या अनूठापन के बजाय विम्बविधान की क्षमता है । इस अर्थ में मे कतार से कुछ भिन्न हैं और इसे उनके इस संग्रह से भलीभांति समझा जा सकता है । प्रो. सत्यप्रकाश मिश्र अध्यक्ष, हिन्दी विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Sudhanshu Upadhyay

    सुधांशु उपाध्याय जन्म- 04 दिसम्बर, 1955, गाजीपुर उग्र.) के गाँव रामपुर में । प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में, उच्च शिक्षा वाराणसी में । एम. ए; पत्रकारिता में स्नातकोत्तर उपाधि । प्रारम्भ में अध्यापन फिर सक्रिय पत्रकारिता में । प्रकाशन- नवगीत संग्रह ' समय की जरूरत है यह, और पत्रकारिता- आलेखों का संग्रह ' शब्द हैं साखी ' । प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का अन्‌वरत प्रकाशन । ' प्रयाग गौरव ' से सम्मानित । पत्रकारिता में विभिन्न पुरस्कार । सम्पर्क- देवगंगोत्री, ए- 1, पत्रकार कालोनी, अशोक नगर, इलाहाबाद- 211001 उग्र.) फोन : 0532 - 2622652 '

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144