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  • Pages: 323p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 817119611x
  •  
    सामान्यतः दो व्यक्तियों या परिवारों के बीच लिखे गए पत्र उनके निजी अखबार होते हैं और साहित्यकारों के पत्र उनके जीवन एवं साहित्य के अंतर्तम तक पहुँचने के चोर दरवाजे। इस संग्रह में (सन् 1951 से 1969 तक) अठारह सालों के बीच मोहन राकेश और उपेंद्रनाथ अश्क एवं श्रीमती कौशल्या अश्क द्वारा एक-दूसरे को लिखे गए लगभग सवा चार सौ पत्रों में से चुने हुए पत्र प्रस्तुत किए गए हैं। मोहन राकेश और उपेंद्रनाथ अश्क का व्यक्तित्व अपने बहुस्तरीय जटिल संबंधों के कारण काफी दिलचस्प और कुतूहल-भरा रहा है। उनके इन तमाम खतों में अश्क और राकेश के खून की गर्मी, दिल की धड़कन, दिमागी उथल-पुथल, बेताबी, बेसब्री, जद्दोजहद, हँसी-खुशी, दुःख-दर्द, भाव-अभाव और आत्मीयता-अंतरंगता के न मालूम कितने रंग बिखरे हुए मिलेंगे। उनके सम्मोहक व्यक्तित्व की तीखी-भीनी महक का भी अहसास होगा। हिंदी साहित्य के जाने-माने मुँहफट अश्क और बेबाक राकेश के इन पत्रों से जिन पाठकों को किसी विस्फोट या हंगामे की उम्मीद है, उन्हें शायद किसी हद तक निराश होना पड़े। जिन्हें इन दोनों महत्त्वपूर्ण लेखकों और विशेषतः मोहन राकेश के रचनाशील अंतर्मन को देखने तथा व्यक्तिगत जीवन-संघर्ष को जानने की अपेक्षा होगी, उन्हें इनके दर्शन यहाँ पूरी प्रामाणिकता एवं सहजता के साथ होंगे। तत्कालीन परिवेश, साहित्यिक-आंदोलनों और हलचलों की तसवीर भी साफ दिखाई देगी। अश्क और राकेश के जीवन, साहित्य और उनके समय में दिलचस्पी रखने वाले जिज्ञासुओं, अध्येताओं एवं इतिहासकारों को ये पत्र निश्चय ही इतिहास के कालजयी संदर्भ-स्रोत जैसे जरूरी और दस्तावेजी महत्त्व के प्रतीत होंगे। यह पुस्तक वास्तव में राकेश और परिवेश: पत्रों में का पुनश्च ही है, और इसे उसकी पूरक के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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    Jaidev Taneja

    जन्म: 15 मार्च, 1943 (ओकाड़ा - पाकिस्तान)।

    शिक्षा: एम.लिट्, पी-एच.डी. (दिल्ली विश्वविद्यालय)।

    प्रकाशन: आधुनिक हिन्दी/भारतीय नाटक और रंगमंच संबंधी पन्द्रह आलोचनात्मक पुस्तकें एवं बहुसंख्य नाट्य-लेख।

    मोहन राकेश सम्बन्धी लेखन: लहरों के राजहंस: विविध आयाम, मोहन राकेश: रंग-शिल्प और प्रदर्शन।

    संपादन: पूर्वाभ्यास (मोहन राकेश), नाट्य-विमर्श (मोहन राकेश), बी.एम. शाह, मनोहर सिंह, ब.व. कारंत, पुनश्च (राकेश और अश्क दंपति का पत्राचार), एकत्र (मोहन राकेश की असंकलित रचनाएँ), मोहन राकेश: रंग-शिल्प और प्रदर्शन, राकेश और परिवेश: पत्रों में।

    पुरस्कार: श्रेष्ठ साहित्यिक कृति पुरस्कार (हिन्दी अकादमी), विश्व रंगमंच दिवस सम्मान (दिल्ली नाट्य संघ), परिषद् सम्मान (साहित्य कला परिषद्), साहित्यकार सम्मान (हिन्दी अकादमी)। अंक (मुम्बई) तथा नटसम्राट (दिल्ली) द्वारा सम्मानित।

    सम्प्रति: दिल्ली विश्वविद्यालय (आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज) से रीडर पद से सेवा-निवृत्त। पत्रकारिता, आकाशवाणी तथा दूरदर्शन से भी सम्बद्ध। स्वतंत्र-लेखन।

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