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Raat Chor Aur Chand

Raat Chor Aur Chand

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  • Pages: 304p
  • Year: 2014
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180318580
  •  
    पालीसिंह बहुत सालों बाद अपने गाँव लौटा है। लारी से उतरकर पाँच कोस चलकर गाँव पहुँचता है। जहाँ बचपन की उसकी सारी यादें-रास्ते, पेड़ों, पगडण्डियों हर कोने-कोने में छाई हुई है। बचपन की यादें एक छोटे बच्चे की उत्सुकता भरी निगाहों की तरह उसके अन्दर उन लोगों के बारे में जानने की इच्छा पैदा कर देता है जिन्हें वो सालों पहले छोड़ महानगर कलकत्ता भाग गया था। जैसे-जैसे वह गाँव की तरफ बढ़ता वैसे ही हवाओं की मस्ती उसे पुरानी यादों से मदमस्त करती जाती और फिर उसे याद आती है अपनी सरनों की जिसे बचपन में वह बहुत तंग किया करता। बलवन्त सिंह का यह उपन्यास अतीत की ललक को बखूबी उभारता हुआ अहिस्ते से इस बात का भी अहसास कराता चलता है कि वर्तमान अकसर वैसा नहीं होता जैसा हम सोचते हैं। समय अकसर अपने दाँवपेंच बदलता रहता है और इसी दाँवपेंच के बीच कैसा है पालीसिंह, जो अपने अतीत को पूरी तरह छोड़ नहीं पाता। पालीसिंह सरनों से प्यार करता है और उसे पाने के लिए वह अपने आप को हर पल बदलने की कोशिश भी करता है। पालीसिंह ने पहली बार अपने जीवन में प्रेम को महसूस किया है पर इंसानी फितरत और नियत को कभी-कभी खुद इंसान भी समझ नहीं पाता है। लेकिन बलवंत सिंह ने अपने सरल और सीधे अंदाज में इस जटिलता को पाठकों के सामने पेश किया है।

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    Balwant Singh

    जन्म : 1925,  गुजराँवाला, पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान) ।

    शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक।

    हिंदी कथा-साहित्य में अकेले ऐसे कृतिकार जिन्होंने पंजाब के ऐतिहासिक काल से लेकर आधुनिक मनोभूमि के विराट चित्र अपनी कृतियों में प्रस्तुत किए हैं। इनकी कितनी ही औपन्यासिक कृतियों को महाकाव्य कहा जा सकता है। जनजीवन के सामाजिक यथार्थ की ऐसी विश्वसनीयता हिंदी साहित्य में प्रायः विरल है। परिवेश ऐतिहासिक हो या समसामयिक - उनकी रचनाओं में संवेदना का तरल प्रवाह विद्यमान है । 12-13 वर्ष की आयु में पहली गद्य रचना । 1964 तक व्यवसाय।

    प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें : रात चोर और चाँद, काले कोस, रावी पार, सूना आसमान, साहिबे-आलम, राका की मंज़िल, चकपीराँ का जस्सा, दो अकालगढ़, एक मामूली लड़की, औरत और आबशार, आग की कलियाँ, बासी फूल (उपन्यास); पहला पत्थर, चिलमन, मेरी प्रिय कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ (कहानियाँ); अमृता प्रीतम (आलोचना)।

    निधन: 27 मई, 1986

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