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Rusi Sanskriti : Udbhav Aur Vinash (Raza Pustak Mala)

Rusi Sanskriti : Udbhav Aur Vinash (Raza Pustak Mala)

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  • Pages: 327
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388183444
  •  
    कलाओं में भारतीय आधुनिकता के एक मूर्धन्य सैयद हैदर रज़ा एक अथक और अनोखे चित्रकार तो थे ही उनकी अन्य कलाओं में भी गहरी दिलचस्पी थी। विशेषत: कविता और विचार में। वे हिन्दी को अपनी मातृभाषा मानते थे और हालाँकि उनका फ्रेंच और अँग्रेज़ी का ज्ञान और उन पर अधिकार गहरा था, वे, फ्रांस में साठ वर्ष बिताने के बाद भी, हिन्दी में रमे रहे। यह आकस्मिक नहीं है कि अपने कला-जीवन के उत्तराद्र्ध में उनके सभी चित्रों के शीर्षक हिन्दी में होते थे। वे संसार के श्रेष्ठ चित्रकारों में, २०-२१वीं सदियों में, शायद अकेले हैं जिन्होंने अपने सौ से अधिक चित्रों में देवनागरी में संस्कृत, हिन्दी और उर्दू कविता में पंक्तियाँ अंकित कीं। बरसों तक मैं जब उनके साथ कुछ समय पेरिस में बिताने जाता था तो उनके इसरार पर अपने साथ नवप्रकाशित हिन्दी कविता की पुस्तकें ले जाता था : उनके पुस्तक-संग्रह में, जो अब दिल्ली स्थित रज़ा अभिलेखागार का एक हिस्सा है, हिन्दी कविता का एक बड़ा संग्रह शामिल था। रज़ा की एक चिन्ता यह भी थी कि हिन्दी में कई विषयों में अच्छी पुस्तकों की कमी है। विशेषत: कलाओं और विचार आदि को लेकर। वे चाहते थे कि हमें कुछ पहल करना चाहिये। २०१६ में साढ़े चौरानवे वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु के बाद रज़ा $फाउण्डेशन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हिन्दी में कुछ नये $िकस्म की पुस्तकें प्रकाशित करने की पहल रज़ा पुस्तक माला के रूप में की है, जिनमें कुछ अप्राप्य पूर्व प्रकाशित पुस्तकों का पुनर्प्रकाशन भी शामिल है। उनमें गांधी, संस्कृति-चिन्तन, संवाद, भारतीय भाषाओं से विशेषत: कला-चिन्तन के हिन्दी अनुवाद, कविता आदि की पुस्तकें शामिल की जा रही हैं। —आमुख से ''कवि कमलेश हमारे समय के सबसे पढ़े-लिखे व्यक्ति थे हालाँकि उन्होंने कभी विद्वता का कोई दावा नहीं किया। उनकी रुचि साहित्य के अलावा संस्कृति और विचार के अनेक अनुशासनों जैसे दर्शन, मनोविज्ञान, नृतत्व आदि में थी। महान् रूसी कवियों और उनके माध्यम से रूसी संस्कृति की उद्भव-गाथा और उसके विनाश की शोक-कथा प्रस्तुत करनेवाली यह अनूठी पुस्तक है : उसमें कवियों का सि$र्फ वैचारिक विश्लेषण भर नहीं है—कविताओं का हिन्दी अनुवाद भी है। किसी विदेशी भाषा के इतने सारे महान् कवियों और उनके माध्यम से किसी देश की संस्कृति के अध्ययन का ऐसा कोई दूसरा उदाहरण हिन्दी में तो क्या शायद किसी अन्य भारतीय भाषा में भी न होगा। इस अद्वितीय पुस्तक को रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। ÓÓ —अशोक वाजपेयी

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    Kamlesh

    कमलेश की कविताएँ 1958-59 से ही प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में छपती रही हैं। वे आलोचनात्मक और वैचारिक निबन्ध भी लिखते रहेे हैं। उनकी रचनाओं ने प्रायः विवेकशील पाठकों का ध्यान आकर्षित किया है।

    कमलेश वर्षों तक राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया है। उनकी पुस्तक ‘खुले में आवास’ (कविता संग्रह) राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित है।

    दलपत चौहान

    शिक्षा: बी.ए. अर्थशास्त्र (1964)।

    गुजराती दलित साहित्य के चखचत स्वर

    प्रकाशित कृतियाँ - काव्य संग्रह: ‘तो पछी क्याँ छे सूरज?’ (श्रेष्ठ पुस्तक पारितोषिक गुजरात साहित्य अकादमी, 2000)। उपन्यास: ‘मुलक’, ‘गिð’ (सन्तोक बा सुवर्ण चंद्रक, 2000), भरभांखलुं। कहानी संग्रह: ‘मूंझारो’। नाटक संग्रह: ‘अनार्यावर्त’ (अखिल भारतीय रेडियो नाट्य लेखन प्रतियोगिता पुरस्कार -  1987/1989-1990, श्रेष्ठ पुस्तक पारितोषिक गुजरात साहित्य अकादमी - 2000), ‘हरिफाई’ (गुजराती साहित्य परिषद पारितोषिक - 1998-99)

    सम्पादन: दूंदूभी, वणबोटी वार्ताओ, कवि नर¯सह महेता दलित साहित्य अवार्ड 2001-2002 (गुजरात सरकार)।

     

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