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Sadi Ka Sabse Bada Admee

Sadi Ka Sabse Bada Admee

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  • Pages: 157p
  • Year: 1998
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8171780164
  •  
    इस संग्रह में शामिल कहानियों के बारे में स्वयं लेखक कायह कहना कि, 'ये कहानियाँ आपके पास आ रही हैं-उठने- बैठने के लिए, बोलने-बतियाने के लिए, संग-साथ- के रिपर' ' '- उतनी ही सार्थक टिप्पणी है जितनी कि ये कहानियाँ 1 अपनी रचना की जनपक्षीय भूमिका के प्रात आश्वस्त रचनाकार ही ऐसी आत्मीय बात कह सकता है? समकालीन हिन्दी कथाकारों में काशीनाथ सिंह क्त महत्त्वपूर्ण स्थान है 1 उन्होंने अपने कथा- पात्रों को न तो उनके सास्कृतिक सामाजिक और ऐतिहासिक विकासक्रम से काटकर प्रस्तुत किया है और न ही रचना पर बौद्धिक या कलात्मक कुहासे की चादर ढंकी है । अपने समाज और अपने लोगों से गहरे प्यार और उनकी तमाम खामियों- खूबियों की बेबाक समझ से पैदा हुई ये कहीनियाँ हमें अभिभूत कर लेती हैं साथ ही हम न सिर्फ अपने इर्द-गिर्द को बल्कि स्वयं को भी ज्यादा ईमानदारी से पहचानने लगते हैं 1 संक्षेप में कहें तो बातचीत का एक सहज अन्दाज, जिसमें विषयगत परिवेश और उसके जटिलतर अन्तर्विरोध उजागर होते चले आते हैं इन कहानियों की एक खास खूबी है 1

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    Kashinath Singh

    काशीनाथ सिंह

    जन्म : 1 जनवरी, 1937, बनारस जिले के जीयनपुर गाँव में ।

    शिक्षा : आरम्भिक शिक्षा गाँव के पास के विद्यालयों में। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. (1959) और पीएच.डी. (1963)।

    काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रहे।

    पहली कहानी ‘संकट’ कृति पत्रिका (सितम्बर, 1960) में प्रकाशित।

    कृतियाँ : लोग बिस्तरों पर, सुबह का डर, आदमीनामा, नई तारीख, सदी का सबसे बड़ा आदमी, कल की फटेहाल कहानियाँ, कहानी उपख्यान, प्रतिनिधि कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ (कहानी-संग्रह); घोआस (नाटक); हिन्दी में संयुक्त क्रियाएँ (शोध); आलोचना भी रचना है (समीक्षा); काशी का अस्सी, रेहन पर रग्घू, महुआचरित, उपसंहार (उपन्यास); याद हो कि न याद हो, आछे दिन पाछे गए, घर का जोगी जोगड़ा (संस्मरण); गपोड़ी से गपशप (साक्षात्कार)।

    अपना मोर्चा का जापानी एवं कोरियाई भाषाओं में अनुवाद। जापानी में कहानियों का अनूदित संग्रह। कई कहानियों के भारतीय और अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद। उपन्यास और कहानियों की रंग-प्रस्तुतियाँ। ‘तीसरी दुनिया’ के लेखकों-संस्कृतिकर्मियों के सम्मेलन के सिलसिले में जापान-यात्रा (नवम्बर, 1981)।

    सम्मान : भारत भारती पुरस्कार, कैफी आज़मी अवार्ड, कथा सम्मान, समुच्चय सम्मान, शरद जोशी सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान और ‘रेहन पर रग्घू’ उपन्यास  के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, रचना समग्र पुरस्कार।

    सम्प्रति : बनारस में रहकर स्वतंत्र लेखन।

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