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Sahitya Samaj Aur Jivan

Sahitya Samaj Aur Jivan

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  • Pages: 240p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211833
  •  
    ‘साहित्य, समाज और जीवन’ रविनंदन सिह का दूसरा निबंध-संग्रह है। इसमें अधिकतर निबंध साहित्यिक है । लगभग एक दर्जन निबंध समाज के विविध पहलुओं तथा सामाजिक विसंगतियों पर केंद्रित हैं। कुछ निबंध मनुष्य की जीवन शैली तथा जीवन दर्शन से संबंधित है । रविनंदन सिह जब कोई विषय चुनते है तो उस विषय की गहन पड़ताल करते है एवं उस विषय की परतों को खोलकर रख देते है । वे विषय का विश्लेषण तथा मूल्यांकन बिना किसी आग्रह के, निरपेक्ष होकर करते है । उनके निबंधों को पढ़ने से उस विषय की तस्वीर बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है । वे विषय को उलझाते नहीं बल्कि उलझे हुए विषय को भी सुलझाकर प्रस्तुत करते हैं। उनके निबंधों की भाषा सरल, सहज एवं प्रवाहपूर्ण हैँ। उनके निबंध अत्यंत सारगर्भित एवं बोधगम्य है । भाषा एवं संवेदना से समृद्ध इन निबंधों से गुजरना एक रोचक अनुभव की तरह है। स्नातक, स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों एवं शोध छात्रों के लिए ये निबंध अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे ।

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    Ravinandan Singh

    रविनन्दन सिंह

    जन्म-ग्राम-पोस्ट-बरुईन, जमानियां (रे.स्टे.), गाजीपुर ।

    शिक्षा-स्नातकोत्तर (हिन्दी एवं अंग्रेजी साहित्य)

    प्रकाशित पुस्तकें :

    काव्य संग्रह-जब मै रिक्त होता हूँ, मेरे और तुम्हारे बीच, मैँ इतिहास की जेब में हूँ, सभी रंग एक नहीं हो सकते, है लहरों की तरह जीवन, भाषा; आलोचना और समाज-चिंतन संबधी-भाषा, रचना और आलोचना, हिन्दी, उर्दू और खडी बोली की ज़मीन, भारतीय आर्यभाषा हिन्दी, भारतीय धार्मिंक चेतना के आयाम, साहित्य, समाज और जीवन, लहरें टूटती नहीं, हिंदुस्तानी एकेडेमी का इतिहास, संपादन कर्म-कबीर और कबीर के प्रतिबिम्ब, तुलसी साहित्य: अभिव्यक्ति के विविध स्वर, जायसी: आलोचना के निकष पर, अदब के सुख़नवर और उनका अंदाजे बयां, रामविलास शर्मा और हिन्दी आलोचना, काव्य संवेदना और हिन्दी कविता, हिदी, उर्दू और हिंदुस्तानी: एक विमर्श, लोक साहित्य: अभिव्यक्ति और अनुशीलन, हिन्दुस्तानी एकेडमी : एक परिचय, फिराक : शख्शियत और फ़न, निराला : काव्य चेतना के अंतर्द्धद्व ।

    सम्माम-पुरस्कार-उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का नरेश मेहता सम्मान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का महावीर

    प्रसाद द्विवेदी सम्मान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का डॉ धीरेन्द्र वर्मा सम्मान, संचेतना का सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सम्मान, समन्वय संस्था का फादर डॉ. कामिल बुल्के सम्मान, साहित्यकार संघ वाराणसी का सेवक स्मृति सम्मान, भारतीय वांग्मय पीठ कोलकाता का साहित्य शिरोमणि सारस्वत सम्मान, राष्ट्रीय पुस्तक मेला प्रयाग का साहित्य शिरोमणि सम्मान, भारत लोकरंग महोत्सव का लोक कलाविद सम्मान आदि ।

    सम्प्रति-संपादक-‘हिन्दुस्तानी' शोध त्रैमासिक

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