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Samay Nahin Hai

Samay Nahin Hai

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  • Pages: 109p
  • Year: 1994
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171191940
  •  
    ''दिशाहीन आकाश को असामान्य सूर्य, रुक जाके क्षण-भर रुको और साक्षी बनो/कि विकसित हो जाऊं मैं/पंखड़ी-दर-पंखड़ी/खुल जाऊँ कमल की भांति सुगंध, कमनीयता, प्राणवत्ता को/अंतिम बिंदु तक/ बांट दूं/निरंध्र अक्षमता को सराबोर कर जाऊं '' -'शबरी' इसी संग्रह से उद्धृत सुपरिचित उड़िया कवयित्री प्रतिभा शतपथी की ये कविता-पंक्तियां रचनाशीलता की उस भावनात्मक ऊंचाई को रेखांकित करती हैं, जहां पहुँचकर वह स्वयं को दूसरों के लिए लय करती है, और जहां उसका अपना सच सबका सच बन जाता है । प्रतिभा शतपथी के आठ कविता-संग्रहों में से अंतिम चार-'नियत वसुधा', 'निमिषे अक्षर' 'महामेघ' और 'शबरी'-से कुछ चुनिंदा कविताओं को यहां अनूदित-संकलित किया गया है । इसके अतिरिक्त छ: कविताएं यहां ऐसी भी हैं, जो अभी तक उनके किसी संग्रह में नहीं आ सकी हैं । ध्यान से देखा जाए तो प्रतिभा शतपथी भारतीय कविता की उस मूल्यवान परम्परा को आगे बढ़ाती हैं, जिसमें युग-यथार्थ को खंडश: नहीं देखा जाता । उनके पास उसे समग्रता में देखने और रचने की क्षमता है । उनकी कविताओं में भारतीय इतिहास, संस्कति और जीवन के भास्वर बिंदुओं की चमक देखी जा सकती है । वे गहन मानवीय संवेदनाओं से भरी हुई हैं और मनुष्य एवं ईश्वर के पारस्परिक रिश्ते के मर्म को बेहद सहजता से उद्‌घाटित करती हैं । वर्तमान यहां सिर्फ वर्तमान ही नहीं है, बल्कि अनन्त काल-प्रवाह में एक पड़ाव की तरह आता है । अनुभवों और अनुभूतियों की दृष्टि से भी ये कवि- ताएँ पाठकों को मुग्ध करती हैं । इनमें अत्यंत सघन बिम्बों और जीवंत प्रतीकों का निर्वाह हुआ है । कहना न होगा कि प्रतिभा शतपथी की ये कविताएँ समकालीन भारतीय कविता की महत्ता को और अधिक गहराई से रेखांकित करती हैं ।

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    Pratibha Satpathi

    जन्म: सन् 1945, सत्यभामापुर, कटक (उड़ीसा) में। शिक्षा: उड़िया भाषा में एम.ए., पी-एच.डी.। उड़िया कविता में एक प्रमुख और महत्वपूर्ण नाम। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत विभिन्न सुप्रसिद्ध साहित्यिक संस्थाओं से सक्रिय जुड़ाव।

    विसुव पुरस्कार - 1981 (प्रजातंत्र प्रचार समिति, उड़ीसा), राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार 1986 ‘निमिषे अक्षर’ के लिए एवं ‘शबरी’ के लिए सरला पुरस्कार 1992 से सम्मानित। इन दिनों राज्य सरकार के शिक्षा-विभाग में उड़िया भाषा-साहित्य के रीडर पद पर कार्यरत।

    प्रकाशित पुस्तकें: कविता-संग्रह: आम कविता (1962), अस्त जन्हर एलेजी (1969), ग्रस्त समय (1974), साहाड़ा सुंदरी (1978), नियत वसुधा (1980), निमिषे अक्षर (1985), महामेघ (1988), शबरी (1991)।

    अनुवाद: ‘अपापबिद्ध’ (पर्ल एस. बक का उपन्यास ‘द हिडन फ्लॉवर’), ‘क्रीतदास’ (आइज़क बी. सिंगर का उपन्यास ‘द स्लेव’), ‘कल्हण चरित’ और ‘नगर मंथन’ (दोनों केन्द्रीय साहित्य अकादमी की अनुवाद-योजना के अंतर्गत), ‘सुब्रह्मण्यम भारती’ (राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई दिल्ली के लिए)।

    साहित्यालोचना: कल्पनार अभिषेक, स्पंदनेर भूमि, प्रतिफलन।

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