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Samkaleen Rang-Paridrishya

Samkaleen Rang-Paridrishya

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Special Price Rs. 896

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  • Pages: 400p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183619349
  •  
    इस पुस्तक के लेख और समीक्षाएँ लेखक की लम्बी यात्रा के दस्तावेज हैं। इसमें नाटक और रंगमंच से जुड़े हर पहलू पर न सिर्फ व्यापक रूप से चर्चा की गई है, बल्कि कई समकालीन सवालों और समस्याओं का हल भी तलाशने की कोशिश की गई है। थियेटर के व्यावसायिक होने की चिन्ताओं पर विमर्श जहाँ कई जरूरी बातों को रेखांकित करता है, वहीं भारतीय रंगमंच-निर्देशन और अभिनय की दुनिया की विरल प्रतिभाओं के अप्रतिम योगदान के अतिरिक्त जिन विशिष्ट निर्देशकों-अभिनेताओं ने अपने अद्वितीय प्रस्तुतीकरण से रंग-जगत को अमिट स्मृतियों से समृद्ध किया—हबीब तनवीर, इब्राहिम अल्काज़ी, श्यामानन्द जालान, ब.व. कारन्त—उन पर भी पर्याप्त सामग्री दी गई है। हिन्दी रंगमंच के विकास की दिशा बहुमुखी रही है, उसे सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए कुछ लेख ऐसे हैं जो न केवल रंगमंच के इतिहास के कुछ पहलुओं या स्थितियों को जानने में मदद करते हैं, बल्कि उनके परवर्ती प्रभावों की महत्ता को भी स्पष्ट करते हैं; जैसे—'इच्छा-शक्ति का इतिहास और इप्टा की सीमाएँ’, 'जब्तशुदा साहित्य, पत्रकारिता और पारसी थियेटर’, 'विद्रोही वृत्ति का मंत्र बना नीलदर्पण का प्रकाशन’, 'पचास वर्षों में भी सामाजिकचर्या नहीं बना : दिल्ली का रंगकर्म’, 'दिल्ली का पंजाबी रंगमंच’। पुस्तक के कुछ लेख संस्मरणात्मक हैं—'आपबीती के बहाने नाट्यालोचन पर एक विमर्श’, 'बुल्ला...की जाने...मैं कौन!’, 'कारन्त की समकालीनता’। 'क्रान्ति का विचार और संस्कृत नाटक’ इस लेख में प्रचलित छवि से हटकर, संस्कृत नाटक के एक अछूते पक्ष को लेखक ने नई दृष्टि के साथ उजागर किया है। वहीं नाट्य-पुस्तक हो या रंगकर्म सम्बन्धित कोई मुद्दा या गतिविधि, उसकी अन्तर्वस्तु से उठते या जुड़े इतर सवालों को, समीक्षा लिखते समय उसके शीर्षक के माध्यम से प्रतिध्वनित किया गया है—'विद्रोह के लुभावने स्वर’, 'युद्ध के निमित्त राष्ट्र-प्रेम और राजनीति’, 'औपनिवेशिक परिवेश में विदेशी भाषाओं के नाट्यानुवाद’, 'प्रासंगिकता के दबाव से घिरे कुछ नाटक’ आदि। 'समकालीन रंग-परिदृश्य’ लेखक के अपने विषय के प्रति वर्षों से लगाव, गहरी दिलचस्पी तथा अपने दृष्टिकोण की खोज का एक विशिष्ट परिणाम है।

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    Satyendra Kumar Teneja

    सत्येन्द्र कुमार तनेजा

    नाट्य-समीक्षक एवं रंग-अध्येता

    रचनाएँ

    1.            हिन्दी नाटक : पुनर्मूल्यांकन (1971)

    2.            नाटककार भारतेन्दु की रंग-परिकल्पना (1976) (दूसरा संशोधित संस्करण-2002)

    3.            प्रसाद का नाट्य-कर्म (1988)

    4.            नाटककार जयशंकर प्रसाद (1997)

    सम्पादन

    1.            कथा हीर-रांझनि की (1961)

    2.            नवरंग (एकांकी-संग्रह) (1981)

    3.            अभिनय विशेषांक (1978-1981)

    4.            दीर्घा

    अग्रणी पत्र-पत्रिकाओं में हिन्दी नाटक एवं रंगमंच पर शोधपरक लेखन।

    संगीत नाटक अकादेमी, साहित्य कला परिषद, हिन्दी अकादमी की गतिविधियों से सम्बद्ध।

    पुरस्कार

    1.            'नाटककार भारतेन्दु की रंग परिकल्पना’ पर मानव संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार का 'भारतेन्दु पुरस्कार’।

    2.            'प्रसाद का नाट्य-कर्म’ पर हिन्दी अकादमी दिल्ली का 'साहित्यिक कृति पुरस्कार’।

    3.            हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा वर्ष 2001-02 का 'साहित्यकार सम्मान’।

    कार्य : सेवा-निवृत्त रीडर, हंसराज कॉलेज, दि.वि. दिल्ली।

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