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Sangeet Kavita Hindi Aur Mughal Badshah

Sangeet Kavita Hindi Aur Mughal Badshah

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  • Pages: 372p
  • Year: 2020, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789389742442
  •  
    'संगीत कविता हिन्दी और मुगल बादशाह' शीर्षक यह किताब प्रो.अजय तिवारी के परिश्रम, उनकी संग्रहवृत्ति और गम्भीर शोध की उपलब्धि है। इस विषय से सम्बन्धित इधर जो काम हुए हैं उनसे अलग और महत्वपूर्ण यह किताब हमारी समझ के तमाम जालों को साफ़ करती है। मुगल बादशाहों की हिन्दी कविता और हिन्दुस्तानी संगीत में गहरी रुचि थी। बादशाह अकबर से लेकर भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के सेनानी बहादुरशाह ज़फर तक लगभग सभी मुगल बादशाहों ने संगीत के अनुशासन में बंध कर परम्परा से चले आ रहे 'ध्रुपद' को आधार बनाकर काव्य-सृजन किया। इन कवियों की कविताओं के साथ संगीत के रागों और तालों का उल्लेख है। इसलिए, सिर्फ हिन्दी कविता के विकास ही नहीं बल्कि हिन्दी क्षेत्र के सांस्कृतिक विकास को जानने और समझने के लिए इन कविताओं और उसमें संगीत की संगति को देखना ज़रूरी है। इन मुगल बादशाहों के अपने धार्मिक आग्रह जो भी रहे हों अथवा राजकाज की भाषा भले ही फ़ारसी रही हो किन्तु, मुगल बादशाहों के भाषिक व्यवहार में हिन्दी ही प्रचलित थी। जब एक ओर राजनीतिक एकता टुकड़े-टुकड़े हो रही थी उन्होंने आज के हिन्दी-भाषी क्षेत्र के लिए बड़े मनोयोग से एक सर्वमान्य भाषाई माध्यम निर्मित कर डाला। पूरे क्षेत्र को एक समान रुचि और काव्यभंगिमा दी। मुगल बादशाह रंगीले के बाद जब मुग़ल सत्ता भीतर से टूट रही थी और बादशाह अंग्रेजों के बाकायदा पेंशनयाफ्ता हो गए तो इसी पतनशील दौर में भाषा के तौर पर उर्दू और संगीत के क्षेत्र में खयाल और टप्पा का विकास हुआ। इस किताब की मूल प्रेरणा चन्द्रबली पाण्डेय का 1940 में लिखा गया वह लेख है जो मुगल बादशाहों की हिन्दी कविता पर केन्द्रित था। पुस्तक के परिशिष्ट में वह मूल लेख मौजूद है जिसका आज के सन्दर्भो में पुनःपाठ किया जा सकता है। भारतीय समाज, साहित्य और संगीत से मुगल बादशाहों के अन्तर्मिश्रण और अंतर्सम्बन्धों की पड़ताल के साथ ही हमारे सांस्कृतिक विकास की पहचान के लिए यह एक ज़रूरी पुस्तक साबित होगी, ऐसा मेरा विश्वास है। -विवेक निराला

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    Ajay Tiwari

    डॉ. अजय तिवारी

    जन्म : 6 मई, 1955, इलाहाबाद।

    शिक्षा : हाईस्कूल तक राधारमण इण्टर कॉलेज, इलाहाबाद से; एम.ए. (हिन्दी), पी-एच डी. तक उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से।

    साहित्य सेवा : प्रगतिशील कविता के सौन्दर्य मूल्य, नागार्जुन की कविता, कुलीनतावाद और समकालीन कविता, साहित्य का वर्तमान, पश्चिम का काव्य विचार, आलोचना और संस्कति, राजनीति और संस्कति व्यवस्था का आत्मसंघर्ष, आधुनिकता पर पुनर्विचार, शिल्प और समाज, हिन्दी कविता : आधी शताब्दी, हिन्दी कविता : सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रक्रिया, केदारनाथ अग्रवाल (साहित्य अकादमी), उत्तर आधुनिकता, कुलीनतावाद और समकालीन कविता, रचना की परख, साहित्य की समझ और आलोचना, इतिहास की रणभूमि और साहित्य, संचार, बाज़ार और भूमंडलीकरण इत्यादि। सम्पादन कवि मित्रों से दूर (केदारनाथ अग्रवाल से संवाद), केदारनाथ अग्रवाल, तुलसीदास : पुनर्मूल्यांकन, आज के सवाल और मार्क्सवाद (रामविलास शर्मा से संवाद), रामविलास शर्मा के संकलित निबन्ध ( नेशनल बुक ट्रस्ट)।

    यात्राएँ : स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्पेन, इटली और वेटिकन।

    सम्मान : केशव स्मृति सम्मान 1997, भिलाई, देवीशंकर अवस्थी सम्मान 2002, डॉ. भगवतशरण उपाध्याय सम्मान 2005, बलिया, शमशेर सम्मान 2017,खण्डवा।

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