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Shabdon Ka Khakrob

Shabdon Ka Khakrob

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  • Pages: 177p
  • Year: 1998
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171194087
  •  
    यह पहला प्रकाशित संकलन है राजू शर्मा की कहानियों का । इसमें जो कहानियाँ संगृहीत हैं वे एक लंबे समय अंतर के बीच लिखी गयी हैं । मसलन चिट्ठी के मार्फत' और मुकदमा' अस्सी के मध्य की कहानियाँ हैं । इसके बाद रिवर्स स्वीप', कूड़े का ढेर' और मोटी बातें' 1993 के आसपास की हैं । लंबी कहानी शब्दों का खाकरोब', 1995 के बाद की कहानी है और तभी के समय को रेखांकित करती है । लगभग सभी कहानियाँ एक विशेष ढंग से अपने समय और समस्या का अंकन और आकलन करती हैं । कहानियों का जोर उन सामाजिक और आर्थिक संरचनाओं पर है जो इंसान की मजबूरी, उसकी स्वायत्तता का सिकुड़ता दायरा और उसकी देर-सवेर की विकृतियों और विषमताओं को जन्म देती हैं । और उसे एक अजनबी पहचान प्रदान करती हैं । मोटी बातों का लगातार फूलता मन्नीलाल और रिवर्स स्वीप के उलटी दृष्टि प्राप्त ओझाजी ऐसे दो उदाहरण हैं । शब्दों का खाकरोब एक लम्बी, पूर्णत: राजनैतिक व नायाब कहानी है । यह एक रचनात्मक रूपक की तरह उद्‌घाटित होता एक घटना-निबन्ध है । वर्तमान बल्कि ताजा राजनीति के नाटकीय मोड़, साझा राजनीति के नये अनुभव, राजनीति की अनिवार्यता व उसकी मजबूरी, राजनैतिक दुराचरण की अभिशप्तता व उसके गहरे, दूसरे अर्थ-इस तरह के बहुत से सवालों, भव्यताओं, अजूबियत व चमत्कारी प्रभावों को समेकित करती है यह लम्बी कहानी । यह एक ऐसी कृति है जो राजनीति की आन्तरिक जटिलता को बड़ी सूक्ष्मता से पकड़ती है । इस संग्रह की हर कहानी सामाजिक यथार्थ का कोई न कोई पक्ष नये तरीकों से प्रस्तुत करती है । परंतु शब्दों का खाकरोब' एक ऐसी कहानी है जिस पर विशेष रूप से चर्चा होगी व होनी चाहिए ।

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    Raju Sharma

    जन्म: 1959। दिल्ली विश्वविद्यालय के सेन्ट स्टीपें$स कॉलेज से भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर।

    लेखन के अलावा रंगकर्म, फिल्म व फिल्म-स्क्रिप्ट लेखन में विशेष रुचि व रुझान।

    प्रकाशित कृतियाँ

    उपन्यास: हलफ़नामे

    कहानी-संग्रह: शब्दों का खाकरोब, समय के शरणार्थी

    नाटक: भुवनपति, मध्यम वर्ग का आत्मनिवेदन या गुब्बारों की रूहानी उड़ान

    नेकरा सो व और राज़ (नाटक अनुवाद)

    सम्प्रति: 1982 से भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत।

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