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Shreshth Jatak Kathayen

Shreshth Jatak Kathayen

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  • Pages: 304p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211574
  •  
    जातक कथाएँ भगवान बुद्ध के द्वारा समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर दिये गये उपदेशों पर आधारित कथारूष में संग्रह है । जातक कथाएँ इन त्रिपिटकों से एक सुत्तपिटक में सन्निहित हैं। ये कथाएँ बौद्ध धर्म की महत्त्वपूर्ण साहित्यिक रचनाएँ हैं । इनमें गौतम बुद्ध के सैकडो पूर्व जन्मों की कथाएँ है । यहाँ वे बोधिसत्व कहे गये हैं । बोधिसत्व का अर्थ है पूर्ण बुद्धत्व की ओर बढ़ता व्यक्तित्व । जातक कथाओं ने न केवल हमारे देश के परवर्ती कथासाहित्य जैसे पंचतन्त्र की कहानियाँ, हितोपदेश, कथासरितसागर आदि को प्रभावित किया हैं वरन अनेक विदेशी कथाएँ, जैसै, ईसप की कहानियाँ तथा अलिफ लैला के किस्से आदि भी इससे प्रभावित हुये है । सरल भाषा में किन्तु मूल पाठ को ध्यान में रखते हुये आम लोगों तक इन्हें पहुंचाने के लिये लेखक ने इन्हें अपने शब्दों में लिखा है । इसके साथ ही शोधार्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिये भी यह इस अर्थ में उपयोगी है कि तत्कालीन समाज, राजनीति,राजपरिवार, सामान्य एवं निम्न वर्ग की स्थिति, नैतिकता, स्त्रियों के प्रति भावनाएँ, समाज में धर्म के नाम पर फैले अंधविश्वास, इतिहास, भूगोल आदि का बोध भी होता है । इसके अतिरिक्त उस काल में समाज किस प्रकार बुद्ध के विचार से प्रभावित हो रहा था , राजाओं,रानियों तथा राजपरिवार के अन्य सदस्यों के मध्य बुद्ध की शिक्षा का क्या असर था, प्रव्रज्या लेने में लोगों की रुचि कितनी थी, बुद्ध के भिक्षुसंघ तथा भिक्षुणीसंघ की क्या स्थिति थी, भिक्षुगणों का स्वभाव कैसा था, शिक्षा के केन्द्र कहाँ और कैसे थे, आदि के विषय में भी हमें इन कथाओं से तथ्य ज्ञात होते हैं । विविध विषयों पर कही गई ये कथाएँ आज भी प्रासंगिक हैं ।

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    Shobha Nigam

    शोभा निगम

    डॉ. शोभा निगम ने 1970 में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान

    प्राप्त करते हुये एम.ए. की उपाधि तथा इसी विश्वविद्यालय से सन् 1980 में पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है । सन् 1973 में आप छतीसगढ़ महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र की व्याख्याता नियुक्त हुई। तब से 2008

    तक आपने लगातार दर्शनशास्त्र का, करीब 35 साल तक , अध्यापन किया है । इस बीच वे इसी महाविद्यालय में रहते हुये प्रोफेसर भी बनी और फिर शासकीय महाविद्यालय आरंग में प्राचार्य पद का दायित्व निर्वहन करते हुये सन् 2010 में सेवानिवृत्त हुई है ।

    प्रकाशित पुस्तकें

    पाश्चात्य दर्शन के सम्प्रदाय,श्रीमद्वाल्लभाचार्यः उनका शुद्धाद्वैत एवं पुष्टिमार्ग, नीतिदर्शन, आधुनिक पाश्चात्य दर्शन, भारतीय दर्शन, दर्शन, मानब और समाज, सुकरात : एक महात्मा , सन्त सेन,

    पाश्चात्यदर्शन का ऐतिहासिक सर्वेक्षण, अन्य पुरुष (कथा संग्रह), व्यास-कथा,यूनानी दार्शनिक चिंतन, शक्तिशाली विचार करें सपने साकार, सलीब पर टंगा एक मसीहा : ईसा, वाल्मीकि रामायण के पात्र ।

    सम्मान

    डालमिया पुरस्कार, 1983, श्रीमद्वल्लभाचार्य: उनका शुद्धाद्वैत एवं पुष्टिमार्ग, पुस्तक पर वागीश्वरी पुरस्कार, 1992,

    सुकरात : एक महात्मा, पुस्तक पर

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