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Stree : Lamba Safar

Stree : Lamba Safar

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  • Pages: 128p
  • Year: 2015, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183615273
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    मैं इस बारे में ज्यादा जिरह नहीं करना चाहती कि स्त्री-मुक्ति का विचार हमें किस दिशा में ले जायेगा, लेकिन मुझे हमेशा लगता रहा है, कि अपनी जिस संस्कृति के सन्दर्भ में मैं स्त्री-मुक्ति की चर्चा करना और उसके स्थायी आधारों को चीन्हना चाहती हूँ, उसमे पहला चिंतन भाषा पर किया गया था ! जब डॉ शब्दों का संस्कृत में समास होता है, तो अक्सर अर्थ में अंतर आ जाता है ! इसलिए स्त्री, जो हमारे मध्यकालीन समाज में प्रायः मुक्ति के उलट बंधन, और बुद्धि के उलट कुटिल त्रिया-चरित्र का पर्याय मानी गई, मुक्ति से जुड़ कर, उन कई पुराने संदर्भो से भी मुक्त होगी, यह दिखने लगता है ! अब बंधन बन कर महाठगिनी माया की तरह दुनिया को नाचने-वाली स्त्री जब मुक्ति की बात करे, तो जिन जड़मतियों ने अभी तक उसे पिछले साथ वर्षों के लोकतान्त्रिक राज-समाज की अनिवार्य अर्द्धांगिनी नहीं माना है, उनको खलिश महसूस होगी ! उनके लिए स्त्री की पितृसत्ता राज-समाज परंपरा पर निर्भरता कोई समस्या नहीं, इसलिए इस परंपरा पर उठाए उसके सवाल भी सवाल नहीं, एक उद्धत अहंकार का ही प्रमाण हैं ! इस पुस्तक के लेखों का मर्म और उनकी दिशा समझने के लिए पहले यह मानना होगा कि एक जीवित परंपरा को समझने के लिए सिर्फ मूल स्थापनाओं की नजीर नाकाफी होती है, जब तक हमारी आँखों के आगे जो घट रहा है, उस पूरे कार्य-व्यापार पर हम खुद तटस्थ निर्ममता से चिंतन नहीं, करते, तब तक वैचारिक श्रृंखला आगे नहीं बढ़ सकती !

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    Mrinal Pandey

    जन्म: 26 फरवरी, 1946 को टीकमगढ़, मध्य प्रदेश में।

    शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेजी साहित्य), प्रयाग विश्वविद्यालय, इलाहाबाद। गन्धर्व महाविद्यालय से ‘संगीत विशारद’ तथा कॉरकोरन स्कूल ऑफ आर्ट, वाशिंगटन में चित्रकला एवं डिजाइन का विधिवत् अध्ययन।

    कई वर्ष विभिन्न विश्वविद्यालयों (प्रयाग, दिल्ली, भोपाल) में अध्यापन के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आईं। साप्ताहिक हिन्दुस्तान व वामा की सम्पादक तथा दैनिक हिन्दुस्तान की कार्यकारी सम्पादक रहीं। स्टार न्यूज और दूरदर्शन के लिए हिन्दी समाचार बुलेटिन का सम्पादन किया। दैनिक हिन्दुस्तान, कादम्बिनी एवं नन्दन की प्रमुख सम्पादक रहीं।

    प्रकाशित पुस्तकें: विरुद्ध, पटरंगपुर पुराण, देवी, हमका दियो परदेस, अपनी गवाही (उपन्यास); दरम्यान, शब्दवेधी, एक नीच टेªजिडी, एक स्त्री का विदागीत, यानी कि एक बात थी, बचुली चौकीदारिन की कढ़ी, चार दिन की जवानी तेरी (कहानी-संग्रह); मौजूदा हालात को देखते हुए, जो राम रचि राखा, आदमी जो मछुआरा नहीं था, चोर निकल के भागा, सम्पूर्ण नाटक (नाटक) और देवकीनन्दन खत्री के उपन्यास काजर की कोठरी का इसी नाम से नाट्य-रूपान्तरण, परिधि पर स्त्री, स्त्री: देह की राजनीति से देश की राजनीति तक, स्त्री: लम्बा सफर (निबन्ध); बन्द गलियों के विरुद्ध (सम्पादन), ओ उब्बीरी (स्वास्थ्य)।

    अंग्रेज़ी: द सब्जेक्ट इज वूमन (महिला-विषयक लेखों का संकलन), द डॉटर्स डॉटर, माई ओन विटनेस (उपन्यास), देवी (उपन्यास-रिपोर्ताज), स्टेपिंग आउट: लाइफ एंड सेक्सुअलिटी इन रूरल इंडिया।

    सम्प्रति: अध्यक्ष, प्रसार भारती।

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