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Sumitranandan Pant Granthavali : Vols. 1-7

Sumitranandan Pant Granthavali : Vols. 1-7

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  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126709878
  •  
    ग्रंथावली के इस प्रथम खंड में पंतजी की वे पाँच आरम्भिक कृतियाँ सम्मिलित हैं जिनकी रचना उन्होंने काल–क्रमानुसार, सन् 1935 से पूर्व की थी । हिन्दी कविता के प्रसिद्ध छाया–युग की विशिष्ट देन के रूप में ये बहुचर्चित रही हैं । पहली कृति हार एक उपन्यास है जिसकी रचना उन्होंने सोलह– सत्रह वर्ष की अल्प वय में की थी । विश्व प्रेम को वाणी देनेवाली यह कथा–कृति रचनाकार के समस्त कृतित्व के अन्त:स्व को अनु/वनित करती है । वीणा भावमय प्रगीतों का संग्रह है जिसमें कवि–मन की सहज कोमलता, माधुर्य और भोलापन है, साथ ही एक ‘दुधमुँही आत्मा की सुरभि’ भी । ग्रन्थि एक लघु खंंडकाव्य है, इसकी वियोगान्त प्रणय–कथा इतनी मर्मस्पर्शी है कि इससे सहज ही कवि की ‘आपबीती’ का भ्रम होने लगता है । पल्लव की कविताएँ प्रकृति और मानव–हृदय के तादात्म्य के मोहक भावचित्र प्रस्तुत करती हैं, विश्वव्यापी वेदनानुभूति इनमें पूरी प्रभावकता से अभिव्यंजित है । गुञ्जन के गीत सौन्दर्य–सत्य के साक्षात्कार के गीत हैं । ‘सुन्दरम्’ के आराधक कवि इनमें क्रमश: ‘शिवम्’ की ओर उन्मुख होते हैं । ये गीत वस्तुत: व्यापक जीवन–चेतना के मुखरित उल्लासराग हैं । ज्योत्स्ना एक प्रतीकात्मक गद्य–नाटक है जिसमें ज्योतिर्मय प्रकाश से जाज्वल्यमान सुन्दर– सुखमय जग–जीवन की कल्पना को कलात्मक अभिव्यक्ति मिली है, इसमें गीतिकाव्य–सा सम्मोहन है ।

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    Sumitranandan Pant

    सुमित्रानंदन पंत

    जन्म: 20 मई, 1900 कौसानी (उत्तरांचल में) ।

    शिक्षा: प्रारम्भिक शिक्षा कौसानी के वर्नाक्यूलर स्कूल में। 1918 में कौसानी से काशी चले गए, वहीं से प्रवेशिका परीक्षा पास की।

    प्रकाशित पुस्तके :

    कविताा-संग्रह: वीणा, ग्रन्थि, पल्लव, गुंजन, ज्योत्स्ना, युगपथ, युगवाणी, ग्राम्या, स्वर्णकिरण, स्वर्णधूली, मधुज्वाल, उत्तरा, रजत-शिखर, शिल्पी, सौवर्ण, युगपुरुष, छाया, अतिमा, किरण-वीणा, वाणी, कला और बूढ़ा चाँद, पौ फटने से पहले, चिदंबरा, पतझर (एक भाव क्रान्ति), गीतहंस, लोकायतन, शंखध्वनि,शशि की तरी, समाधिता, आस्था, सत्यकाम, गीत-अगीत,संक्रांति, स्वच्छंद !

    कथा-साहित्य : हार, पांच कहानियां !

    आलोचना एवं अन्य गद्य-साहित्य : छायावाद : पुनर्मूल्यांकन, शिल्प और दर्शन, कला और संस्कृति, साठ वर्ष : एक रेखांकन !

    पुरस्कार : 1960 में कला और बूढा चाँद पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार, 1961 में पद्मभूषण की उपाधि, 1965 में लोकायतन पर सोवियत लैंड नेहरु पुरस्कार, 1969 में चिदंबरा पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार !

    28 दिसम्बर 1977 को देहावसान !

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