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Suraj Ko Angootha

Suraj Ko Angootha

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  • Pages: 144p
  • Year: 2020, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789389577846
  •  
    सूरज को अँगूठा दिखाते हुए ठहाके लगाने का साहस करती जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताओं का प्राणतत्व राजनीति और समाजनीति—दोनों के समान योग से निर्मित है। यही कारण है कि जितेन्द्र की कविताएँ इकहरी नहीं, बहुस्तरीय हैं। मनुष्य और मनुष्यता की चिन्ता करने के क्रम में यह कवि सत्ताकांक्षी राजनीति और वर्चस्ववादी सामाजिक संरचना की गहरी पड़ताल करता है। यह अकारण नहीं है कि वह बात करता है सपनों की, इच्छाओं की और चुप्पी के समाजशास्त्र की! पिछले तीन दशकों से हिन्दी कविता में निरन्तर सक्रिय, स्वीकृत और सम्मानित जितेन्द्र श्रीवास्तव गृहस्थ जीवन के सिद्ध और अद्वितीय कवि हैं। उनकी कविता से ही एक शब्द लेकर कहें तो पारिवारिक विन्यास के रास्ते जीवन की विविधता को प्रकट करने का कौशल उनकी कविताओं का जीवद्रव्य है। जितेन्द्र श्रीवास्तव की भाषा में अपूर्व और दुर्लभ आत्मीयता है। चिन्तन करते हुए, समस्याओं पर विचार करते हुए, दुःख बतियाते हुए, पत्नी से कुछ कहते हुए, छोटे भाई की शादी में माँ की चर्चा करते हुए, पिता को याद करते हुए, पुराने मित्र से मिलते हुए, बहुत दिनों के बाद अपनी पुश्तैनी खेती-बारी को निहारते हुए, आत्मबल को बटोरते हुए—आप कविताओं में विन्यस्त इन सभी रंगों से गुजरते हुए पाएँगे कि जितेन्द्र की काव्य-भाषा में 'आत्मीयता' आश्चर्यजनक रूप से बनी रहती है। न कोई दिखावे की तल्खी, न नफ़रत का अतिरिक्त प्रदर्शन—फिर भी पक्षधरता में कोई विचलन नहीं! यह रक्त और विवेक में समाई हुई पक्षधरता है जिसे व्यक्त करने के लिए कवि को अलग से कोई उद्यम नहीं करना पड़ता। उम्मीद है उनका यह नया संग्रह हिन्दी कविता के पाठकों को एक नया आस्वाद देगा।

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    Jitendra Srivastava

    जितेन्द्र श्रीवास्तव

    उ.प्र. के देवरिया जिले की रुद्रपुर तहसील के एक गाँव सिलहटा में जन्मे प्रतिष्ठित कवि-आलोचक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने बी.ए तक की पढ़ाई गाँव

    और गोरखपुर में की। तत्पश्चात् जे.एन.यू., नई दिल्ली से हिन्दी साहित्य में एम.ए., एम.फिल और पीएच.डी। 

    इनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं : इन दिनों हालचाल, अनभै कथा, असुन्दर सुन्दर, बिल्कुल तुम्हारी तरह, कायान्तरण, कवि ने कहा, बेटियाँ, उजास (कविता-संग्रह); भारतीय समाज की समस्याएँ और प्रेमचंद, भारतीय राष्ट्रवाद और प्रेमचंद शब्दों में समय, आलोचना का मानुष-मर्म, भारतीय समाज, राष्ट्रवाद और प्रेमचंद, सर्जक का स्वप्न, विचारधारा, नए विमर्श और समकालीन कविता, उपन्यास की परिधि, रचना का जीवद्रव्य, कहानी का क्षितिज (आलोचना)। इनके अतिरिक्त कई पुस्तकों का सम्पादन कार्य भी किया है। प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके लगभग 200 आलेख प्रकाशित हैं। इनकी कई कविताओं का अंग्रेजी, मराठी, उर्दू, उड़िया और पंजाबी में अनुवाद हुआ है।

    हिन्दी के साथ-साथ भोजपुरी में भी लेखन-प्रकाशन ।

    पुरस्कार : कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार और आलोचना के लिए देवीशंकर अवस्थी सम्मान सहित हिन्दी अकादमी, दिल्ली का कृति सम्मान, उ.प्र. हिन्दी संस्थान का रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार, उ.प्र. हिन्दी संस्थान का विजयदेव नारायण साही पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता का युवा पुरस्कार, डॉ. रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान और परम्परा ऋतुराज सम्मान से सम्मानित।

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