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Azadi Ki Aadhi Sadi : Swapna Aur Yatharth

Azadi Ki Aadhi Sadi : Swapna Aur Yatharth

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  • Pages: 179p
  • Year: 2011, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126700017
  • ISBN 13: 9788126700011
  •  
    पूरन चन्द्र जोशी की नवीनतम कृति स्वप्न और यथार्थ % आजादी की आधी सदी उनके हाल के लिखे सारगर्भित आठ निबन्धों और दो संवादों का एक विचारोत्तेजक भूमिका के साथ तैयार किया गया अत्यन्त महत्त्वपूर्ण संग्रह है । भारतीय इतिहास के इस निर्णायक कालखंड का समाज–विज्ञान की बहुआयामी और बहुमुखीµ ऐतिहासिक, तुलनात्मक और मानकीयµदृष्टियों से अवलोकन, विवेचन और मूल्यांकन ही इन निबन्धों की विशेषता है । वैचारिकता और संवेदना के मेल में ही इन निबन्धों की ताजगी और जीवन्तता है । यह संग्रह अर्थ, समाज, राजनीति, संस्कृति और इतिहास के विद्वानों के लिए इस महत्त्वपूर्ण कालखंड पर नई दृष्टि, व्याख्याएँ और नए निष्कर्ष प्रस्तुत तो करता ही हैय संभावनाओं और अवरोधों, उपलब्धियों और अपूर्णताओं के द्वंद्व की इस आधी सदी की विस्तार और गहराई में खोज के नए क्षितिज के उजागर के साथ यह देश की, विशेषकर हिन्दी प्रदेश की, वर्तमान दुविधाग्रस्त स्थिति और दिशाहीन भविष्य से चिन्तित विचारशील नागरिक समुदाय को भी नई सोच, नई चेतना और नई दिशा के संघर्ष में भागीदार बनाता है । उपनिवेशवाद से स्वायत्त राष्ट्रवाद में संक्रमण की यह आधी सदी क्यों विशाल जन–साधारण के लिए स्वप्न–भंग बनती गई है और उसे ‘चरैवेति चरैवेति’ की चुनौती में बदलने की वैचारिक दिशा और रणनीति क्या होगी, इस खोज में ही इस संकलन की सार्थकता है । संक्रमण के इस दौर में प्रभुत्व के आकांक्षी नव मध्यम वर्ग और सच्चे ‘स्वराज’ से वंचित जन–साधारण के बीच अलगाव और टकराव जहाँ इस त्रासदी के मुख्य कारण हैं वहाँ प्रबुद्ध बुद्धिजीवी समुदाय और सचेत जनसाधारण के बीच संवाद द्वारा ही इस त्रासदी से मुक्ति संभव है । जोशी जी के मत में यही नवजागरण और स्वाधीनता संघर्ष की असली विरासत है और आज के दौर का आग्रह भी । इस दृष्टि से स्वप्न और यथार्थ एक शोध–ग्रंथ ही नहीं, जन–मुक्ति का घोषणा–पत्र भी है ।

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    Puran Chandra Joshi

    डॉ– पूरनचंद्र जोशी
    जन्म : 9 मार्च, 1928; ग्राम दिगोली, अल्मोड़ा (उत्तराखंड); प्रारम्भिक शिक्षा : मॉडल स्कूल और गवर्नमेंट इंटर कॉलेज, अल्मोड़ाय उच्च शिक्षा : बी–ए– ऑनर्स, एम–ए– और पी–एच–डी–, लखनऊ स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड सोशियोलोजी, लखनऊ विश्वविद्यालय ।
    भारतीय समाजशास्त्र के उच्चकोटि के अध्यापन और चिन्तन और बंगाली भाषा में साहित्य और समाजशास्त्र को जोड़ने की दिशा में सृजन के लिए जाने–माने डी–पी– साहब से प्रेरणा पाकर ‘साहित्य की सामाजिक भूमिका’ और ‘हिन्दी साहित्य में किसान’ विषयों पर विचारोत्तेजक लेखन । युवा काल से मार्क्स से प्रेरणा पाकर ‘सामाजिक क्रान्ति’ और ‘उत्पीड़ितों के समाजशास्त्र’ की दिशा में मौलिक लेखन ।
    भूमिसुधार, कृषि–विकास, ग्रामीण श्रमिक हितकारी नीतियों तथा संचार और सम्प्रेषण की विकास में भूमिका के प्रश्नों पर उच्चस्तरीय कमेटियों के चेयरमैन या सदस्य के रूप में कई वर्षों तक सक्रिय ।
    सम्मान : समाजशास्त्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय समाजशास्त्र परिषद् द्वारा ‘लाइफ टाइम एचीवमेंट एवार्ड’ द्वारा सम्मानित । रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, कलकत्ता द्वारा डी–लिट्– आनरिस कौजर की उपाधि से सम्मानित । हिन्दी के प्रमुख संस्थानों द्वारा हिन्दी में अर्थ और समाजशास्त्र के मौलिक शोध और लेखन के लिए पुरस्कृत ।
    प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ : भारतीय ग्रामय परिवर्तन और विकास के सांस्कृतिक आयामय आजादी की आधी सदी : स्वप्न और यथार्थय अवधारणाओं का संकटय महात्मा गांधी की आर्थिक दृष्टि : जीवन्तता और प्रासंगिकताय मेरे साक्षात्कारय संचार, संस्कृति और विकास (हिन्दी अनुवाद); अंग्रेजी में एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन । इसके अतिरिक्त प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं में समय–समय पर प्रकाशित  महत्त्वपूर्ण लेख ।
    विदेश यात्राएँ : अमेरिका, रूस, चीन, थाइलैंड आदि कई देशों की यात्राएँ ।
    सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन ।

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