• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Tatah Kim

Tatah Kim

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 125

Special Price Rs. 112

10%

  • Pages: 115p
  • Year: 2001
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171196926
  •  
    पुरुष शब्द की धातु चाहता है। उपसर्ग और प्रत्यय उसके लिए गौण होते हैं। और स्त्री...उसके लिए, उपसर्ग और प्रत्यय जीवन का उतना ही बड़ा सच होता है जितना शब्द की धातु। ये रिश्ते छतरी की तरह होते हैं। बारिश और धूप में जिनका साथ एक आदत होती है। जिनका होना असुरक्षा से मुक्ति का अहसास देता है। जिनके कहीं छूट जाने का भय हमेशा बना रहता है और जो कभी न कभी, कहीं न कहीं छूट ही जाते हैं। इसे हम छाते का छूटना नहीं, बल्कि कहीं भूल जाना कहते हैं। कितना मुश्किल है तारों की संख्या जान पाना। या शायद असम्भव। उसी तरह जिस तरह यह जाना पाना कि किसके मन में कितना राग, कितना अनुराग या कितना विराग है। बस शायद एक निर्वेद होता है जो पार्श्व के निर्जन में लगातार गिरता रहता है निर्झर-सा। कविता से गद्य में जाना यानी अमूर्त से मूर्त की ओर जाने की प्रक्रिया कभी-कभी प्रेम से विवाह की ओर प्रस्थान प्रतीत होती है। विचार-सरणियाँ कभी-कभी कानन को बाँह से खींचती हुई किसी अनजान मनःभूमि में ले जाती हैं जहाँ कुछ सरसराता है। गद्य पुरुष है और कविता स्त्री, ये दो अलग-अलग दुनिया हैं। इन दुनियाओं की अपनी-अपनी दुनिया है। अब आधी से ज्यादा उम्र काट लेने के बाद क्या किसी दूसरी दुनिया में जाना ! ऋचा, पूर्णिमाओं से डर लगता है मुझे... उसके बाद अवसान ही अवसान है... कृष्ण पक्ष की ओर...

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Meera Kant

    1958 में श्रीनगर में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम.ए. और जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय से पी-एच.डी.।

    अब तक हाइफन (कहानी-संग्रह), अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और हिन्दी पत्रकारिता (शोधपरक-ग्रंथ), नाम था उसका आसमानी (बाल साहित्य) प्रकाशित

    स्मृतियों के सान्निध्य में (संस्मरणात्मक पुस्तक) का सम्पादन।

    मीराँ: मुक्ति की साधिका प्रकाशन विभाग, भारत सरकार के प्रकाशनाधीन।

    पहल, समकालीन भारतीय साहित्य, आजकल, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, नवभारत टाइम्स, पश्यन्ती आदि में समय-समय पर कहानियाँ प्रकाशित।

    नुक्कड़ नाटकों और मंच के लिए गीतिनाट्यों की रचना। दूरदर्शन व रेडियो के लिए लेखन। फिल्म-लेखन के लिए स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से वर्ष 1992 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार से सम्मानित।

    एन.सी.ई.आर.टी. में बतौर सम्पादक कार्यरत।

    संपर्क: बी-95, गुलमोहर पार्क, नई दिल्ली-49

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144