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Teri Kurmai Ho Gai ?

Teri Kurmai Ho Gai ?

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  • Pages: 120p
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789386863188
  •  
    तेरी कुड़माई हो गई ? एक मार्मिक प्रेम कहानी है जो स्त्री विमर्श की दृष्टि से भी उत्कृष्ट है । गुलेरी जी की बहुचर्चित कहानी उसने कहा था के एक प्रसिद्ध वाक्य तेरी कुड़माई हो गई ? को कहानी शीर्षक दिया है । इस कहानी की विशेषता यह है कि गुलेरी जी की कहानी जहाँ पर समाप्त होती है, उसके आगे यह कहानी शुरू होती है । प्रेम में स्मृतियों का सुख है लेकिन स्मृतियाँ हमें बेचैन कर देती हैं ।पानी में बुलबुले उठते हैं और मिट जाते हैं । मैंने जवाब दिया लेकिन उस क्षण मुझे महसूस हो रहा था कि प्रेम में स्मृतियों का सुख है लेकिन स्मृतियाँ हमें बेचैन कर देती हैं । पानी में बुलबुले उठते हैं और मिट जाते हैं । स्मृतियों के अन्तहीन बुलबुले उठते हैं और तुरन्त मिट जाते हैं । उस समय मैं अतीत के बियावान में घूम रही थी । लहना के बोल मानों कानों में गूँजे-शालू , मेरे मरने पर तुम मुझे इसी रूप में याद रखना कि अमृतसर के बाजार में एक चंचल लड़का मिला था और अक्सर पूछता था- तेरी कुड़माई हो गई ? मैंने तुझे लाख भूलाने का प्रयास किया लेकिन कुछ भूलता ही नहीं । ग्रीष्म की दुपहरी के सन्नाटे में , चाँदनी रात के खामोश सन्नाटे में, सपनों के मनोरम संसार में मेरे कानों में ये ही बोल सुनाई पड़ते हैं- तेरी कुड़माई हो गई ?

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    Sunil Vikram Singh

    सुनील विक्रम सिंह

     जन्मः 29, अप्रैल 1969, वाराणसी जनपद की अकोढ़ा कलाँ गाँव  में ।

    शिक्षाः प्राथमिक शिक्षा कोरापुट (उड़ीसा)  जनपद के जामपुर शहर तथा गाँव की प्राथमिक पाठशाला से । इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. तथा एम.ए., ‘ जे.आर.एफ./नेट ’ परीक्षा उत्तीर्ण । बी.एच.यू. से ‘पी-एच.डी की’ उपाधि ।

    साहित्य सेवाः ‘आजकल’, ‘कादम्बिनी’, ‘उत्तर प्रदेश’, ‘वर्तमान साहित्य’, ‘नवगीत’, ‘नई धारा’, ‘लमही’, इत्यादि पत्रिकाओं में कविताएँ, कहानियाँ और व्यंग्य प्रकाशित । ‘काँपता हुआ इन्द्रधनुष’ (उपन्यास ), ‘हिन्दी साहित्य का कथेतर गद्य’ (समीक्षा), ‘मॉरिशस का कथा साहित्य और अभिमन्यु अनत’, ‘आधुनिक हिन्दी साहित्य’, (समीक्षा) ‘प्रहलाद रामशरणः मॉरिशस में हिन्दी साहित्य के अनन्य साधक’ (समीक्षा) प्रकाशित ।

    पुरस्कारः प्रतापनरायण युवा साहित्य सम्मान काव्यमित्र सम्मान, हिन्दी सेवी सम्मान से विभूषित ।

    सम्प्रतिः साहित्यिक संस्था संचेतना के संस्थापक और अध्यक्ष जनपद हिन्दी साहित्य सम्मेलन जौनपुर के अध्यक्ष ।

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