• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Tirohit

Tirohit

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 75

Special Price Rs. 67

11%

  • Pages: 171p
  • Year: 2007
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126713622
  •  
    गीतांजलि श्री के लेखन में अमूमन, और तिरोहित में ख़ास तौर से, सब कुछ ऐसे अप्रकट ढंग से घटता है कि पाठक ठहर–से जाते हैं । जो कुछ मारके का है, जीवन को बदल देने वाला है, उपन्यास के फ्रेम के बाहर होता है । जि“न्दगियाँ चलती–बदलती हैं, नए–नए राग–द्वेष उभरते हैं, प्रतिदान और प्रतिशोध होते हैं, पर चुपके–चुपके । व्यक्त से अधिक मुखर होता है अनकहा । घटनाक्रम के बजाय केन्द्र में रहती हैं चरित्र–चित्रण व पात्रों के आपसी रिश्तों की बारीकियाँ । पैनी तराशी हुई गद्य शैली, विलक्षण बिम्बसृष्टि और दो चरित्रोंµललना और भतीजाµके परस्पर टकराते स्मृति प्रवाह के सहारे उद्घाटित होते हैं तिरोहित के पात्र % उनकी मनोगत इच्छाएँ, वासनाएँ व जीवन से किए गए किन्तु रीते रह गए उनके दावे । अन्दर–बाहर की अदला–बदली को चरितार्थ करती यहाँ तिरती रहती है एक रहस्यमयी छत । मुहल्ले के तमाम घरों को जोड़ती यह विशाल खुली सार्वजनिक जगह बार–बार भर जाती है चच्चो और ललना के अन्तर्मन के घेरों से । इसी से बनता है कथानक का रूप । जो हमें दिखाता है चच्चो/बहनजी और ललना की इच्छाओं और उनके जीवन की परिस्थितियों के बीच की न पट सकने वाली दूरी । वैसी ही दूरी रहती है इन स्त्रियों के स्वयं भोगे यथार्थ और समाज द्वारा देखी गई उनकी असलियत में । निरन्तर तिरोहित होती रहती हैं वे समाज के देखे जाने में । किन्तु चच्चो/बहनजी और ललना अपने अन्तर्द्वन्द्वों और संघर्षों का सामना भी करती हैं । उस अपार सीधे–सच्चे साहस से जो सामान्य जि“न्दगियों का स्वभाव बन जाता है । गीतांजलि श्री ने इन स्त्रियों के घरेलू जीवन की अनुभूतियोंµ रोज“मर्रा के स्वाद, स्पर्श, महक, दृश्यµको बड़ी बारीकी से उनकी पूरी सैन्सुअलिटी में उकेरा है । मौत के तले चलते यादों के सिलसिले में छाया रहता है निविड़ दु%ख । अतीत चूँकि बीतता नहीं, यादों के सहारे अपने जीवन का अर्थ पाने वाले तिरोहित के चरित्रµललना और भतीजाµअविभाज्य हो जाते हैं दिवंगत चच्चो से । और चच्चो स्वयं रूप लेती हैं इन्हीं यादों में ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Geetanjali Shree

    गीतांजलि श्री

    गीतांजलि श्री के चार उपन्यास-माई, हमारा शहर उस बरस, तिरोहित, खाली जगह-और चार कहानी-संग्रह-अनुगूँज, वैराग्य, प्रतिनिधि कहानियां, यहाँ हाथी रहते थे-छप चुके हैं । अंग्रेजी में एक शोध ग्रन्थ और अनेक लेख प्रकाशित हुए हैं ।

    अंग्रेजी में एक शोध ग्रन्थ और अनेक लेख प्रकाशित हुए है ।

    इनकी रचनाओं के अनुवाद भारतीय और यूरोपीय भाषाओँ में हुए हैं ।

    गीतांजलि थियेटर के लिए भी लिखती हैं ।

    फेलोशिप, रेजिडेन्सी, लेक्चर आदि के लिए देश-विदेश की यात्राएँ करती हैं ।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144