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Ujali Nagari Chatur Raja

Ujali Nagari Chatur Raja

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  • Pages: 100p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183616331
  •  
    'उजली नगरी चतुर राजा' यशस्वी कथाकार मन्नू भंडारी की नई नाट्य कृति है। सामाजिक विसंगतियों, विरूपताओं व अव्यवस्था का विरोध उनकी अनेक रचनाओं का केन्द्रीय स्वर रहा है। इस सन्दर्भ में उनके अत्यन्त चर्चित उपन्यास 'महाभोज' का स्मरण किया जा सकता है। प्रस्तुत नाटक सत्ता और व्यवस्था में गहरे तक पैठ चुके भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन-आक्रोश को अभिव्यक्ति देता है। समकालीन जीवन की अनेक स्थितियाँ और घटनाएँ इसमें अनुभव की जा सकती हैं। इस नाटक का शीर्षक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत 'अंधेर नगरी चौपट राजा' पर एक रचनात्मक टिप्पणी है। उजास व चतुराई जैसे शब्दों का एक भिन्न अर्थ मन्नू भंडारी ने रेखांकित किया है। व्यंजना यह है कि आज अनेक सकारात्मक शब्दों, प्रतीकों और धारणाओं को निहित स्वार्थ ने भ्रष्ट कर दिया है। आठ दृश्यों में विभक्त 'उजली नगरी चतुर राजा' के पात्रों राजा, बड़ा मंत्री, छोटा मंत्री, खजांची, नगर मंत्री, खोजी और हिम्मती आदि में परिचित चरित्रों की अनुगूंज है। लोकतंत्र, चुनाव, महँगाई, भ्रष्टाचार, असुरक्षा आदि मुद्दों पर यह नाटक व्यापक विमर्श का प्रस्ताव रखता है। जन प्रतिरोध के स्वर इन शब्दों में मुखर हैं— 'न करेगा अब कोई फरियाद, न फैलाएगा राजा के आगे हाथ! जो अधिकार हमारे हैं, उन्हें तो हम लेके रहेंगे।' प्रासंगिक व प्रभावी कथ्य के साथ भाषा और शिल्प की दृष्टि से भी यह नाटक उल्लेखनीय है। मौलिक नाट्यालेखों की कमी को पूरा करती प्रस्तुत कृति पाठकों व रंगकर्मियों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है।

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    Mannu Bhandari

    मन्नू भंडारी

    भानपुरा, मध्य प्रदेश में 3 अप्रैल, 1931 को जन्मी मन्नू भंडारी को लेखन-संस्कार पिता श्री सुखसम्पतराय से विरासत में मिले। स्नातकोत्तर के उपरान्त लेखन के

    साथ-साथ वर्षों दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में हिन्दी का अध्यापन। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचन्द सृजनपीठ की अध्यक्ष भी रहीं।

    ‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ आपकी चर्चित औपन्यासिक कृतियाँ हैं। अन्य उपन्यास हैं ‘एक इंच मुस्कान’ (राजेन्द्र यादव के साथ) तथा ‘स्वामी’। ये सभी उपन्यास ‘सम्पूर्ण उपन्यास’ शीर्षक से एक जिल्द में भी उपलब्ध हैं।

    कहानी-संग्रह : एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है  तथा सभी कहानियों का समग्र ‘सम्पूर्ण कहानियाँ’; एक कहानी यह भी आपकी आत्मकथ्यात्मक पुस्तक है जिसे आपने अपनी ‘लेखकीय आत्मकथा’ कहा है। महाभोज, बिना दीवारों के घर, उजली नगरी चतुर राजा नाट्य-कृतियाँ तथा बच्चों के लिए पुस्तकों में प्रमुख हैं—आसमाता (उपन्यास), आँखों देखा झूठ, कलवा (कहानी) आदि।

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