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Usane Bhee Dekha

Usane Bhee Dekha

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  • Pages: 120p
  • Year: 1993
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: UBD346
  •  
    पिछले 14 वर्षो से राकेश तिवारी की कहानियाँ सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं । इस संग्रह में उनकी चुनी हुई कहानियाँ संकलित हैं । ये कहानियां धर्मयुग, सारिका, रविवार, साप्ताहिक हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, जनसत्ता आदि द पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं । सारिका में प्रकाशित 'आओ खेल जाएं' का पंजाबी और तेलुगू में अनुवाद हुआ है । यह कहानी 'खेल कथाएं' ( संकलन, सं ० अवधनारायण मुद्‌गल) में भी ली गई है । खेल कथाओं पर आधारित और दूर- दर्शन द्वारा 'प्राइम टाइम' के लिए मंजूर एक धारा- वाहिक में भी यह कहानी शामिल है । 'धर्मयुग' में छपी कहानी 'दरोगा जी से ना कय्यो' का लेखक ने स्वयं नाट्‌य रूपांतरण किया था । करीब एक घंटे के उस नाटक का 'साहित्य कला परिषद्, के आठवें युवा महोत्सव के दौरान दिल्ली के सप्रू हाउस में मंचन हो चुका है । 'दंगा गली छेदीलाल का ' कहानी 'जुनूनिए' नाम से 'काला नवंबर' ( सं ० सुरेंद्र तिवारी) में संकलित है । निम्न और मध्यवर्गीय जीवन की ये कहानियां सामाजिक वर्गभेद, शोषण और नारी-उत्पीड़न को बखूबी उजागर करती हैं । कुछ कहानियों में पर्वतीय अंचल की व्यथा है, तो कुछेक में मरती मानवीय संवेदना और घटते जीवन-मूल्यों की चिंता भी । राकेश तिवारी की ग्यारह कहानियों का यह पहला संग्रह है ।

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    Rakesh Tiwari

    राकेश तिवारी

    राकेश तिवारी, रॉकी का जन्म 2 अक्टूबर, 1953 को सीतापुर जिले के बिसवाँ गाँव में हुआ। वैसे ये मूल निवासी उत्तर-प्रदेश के बस्ती जिला के हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विषय में स्नातकोत्तर के बाद मिर्जापुर के चित्रित शैलाश्रयों पर अवध विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की। लगभग चार दशक तक देश के विभिन्न भागों में पुरातात्त्विक सर्वेक्षण एवं उत्खनन तथा गंगा-घाटी को दक्षिण भारत से जोडऩेवाले प्राचीन ‘दक्षिणा-पथ’ की यात्रा एवं गहन अध्ययन का अनुभव। तद्विषयक दो सौ से अधिक शोध-पत्र, रिपोर्ट आदि प्रकाशित। महानिदेशक भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के पद से सेवानिवृत्त।

    घूमने और लिखने में सहज रुचि। कई देशों की यात्राएँ।

    प्रकाशन : लखनऊ से काठमांडू तक साइकिल से नेपाल की यात्रा पर आधारित यात्रा वृत्तांत ‘पहियों के इर्द-गिर्द’; दिल्ली से कलकत्ता तक की नौका-यात्रा पर आधारित यात्रा-वृत्तांत ‘सफर एक डोंगी में डगमग’; उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी भू-भाग के सर्वेक्षण एवं सैर पर आधारित संस्मरण ‘पवन ऐसा डोलै’ तथा समय-समय पर पत्र-पत्रिकाओं में लेखन।

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