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Vaachikata : Aadivasi Darshan, Sahitya Aur Saundaryabodh

Vaachikata : Aadivasi Darshan, Sahitya Aur Saundaryabodh

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  • Pages: 152p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183619479
  •  
    आदिवासी दर्शन प्रकृतिवादी है। आदिवासी समाज धरती, प्रकृति और सृष्टि के ज्ञात-अज्ञात निर्देश, अनुशासन और विधान को सर्वोच्च स्थान देता है। उसके दर्शन में सत्य-असत्य, सुन्दर-असुन्दर, मनुष्य-अमनुष्य जैसी कोई अवधारणा नहीं है, न ही वह मनुष्य को उसके बुद्धि-विवेक अथवा च्मनुष्यताज् के कारण 'महान' मानता है। उसका दृढ़ विश्वास है कि सृष्टि में जो कुछ भी सजीव और निर्जीव है, सब समान है। न कोई बड़ा है, न कोई छोटा है। न कोई दलित है, न कोई ब्राह्मण। सब अर्थवान है एवं सबका अस्तित्व एकसमान है—चाहे वह एक कीड़ा हो, पौधा हो, पत्थर हो या कि मनुष्य हो। वह ज्ञान, तर्क, अनुभव और भौतिकता को प्रकृति के अनुशासन की सीमा के भीतर ही स्वीकार करता है, उसके विरुद्ध नहीं। अन्वेषण, परीक्षण और ज्ञान को आदिवासी दर्शन सुविधा और उपयोगिता की दृष्टि से नहीं देखता, बल्कि धरती, प्रकृति और समस्त जीव-जगत के साथ सहजीवी सामंजस्य और अस्तित्वपूर्ण संगति के बतौर देखता है। मानव की सभी गतिविधियों और व्यवहारों को, समूची विकासात्मक प्रक्रिया को प्रकृति व समष्टि के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके पूरक के रूप में देखता है। उन सबका उपयोग वह वहीं तक करता है, जहाँ तक समष्टि के किसी भी वस्तु अथवा जीव को, प्रकृति और धरती को कोई गम्भीर क्षति नहीं पहुँचती हो। जीवन का क्षरण अथवा क्षय नहीं होता हो। आदिवासी साहित्य इसी दर्शन को लेकर चलता है।

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    Vandana Tete

    वंदना टेट

    जन्म : १३ सितम्बर, १९६९।

    सामाजिक कार्य (महिला एवं बाल विकास) में राजस्थान विद्यापीठ से स्नातकोत्तर।

    हिन्दी एवं खड़िया में लेख, कविताएँ, कहानियाँ स्थानीय एवं राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित तथा आकाशवाणी, रांची एवं उदयपुर से लोकगीत, वार्ता व साहित्यिक रचनाएँ प्रसारित।

    सामाजिक विमर्श की पत्रिका 'समकालीन ताना-बाना', बाल-पत्रिका 'पतंग' (उदयपुर से प्रकाशित) का सम्पादन-प्रकाशन एवं झारखण्ड आन्दोलन की राजनीतिक पत्रिका 'झारखण्ड खबर' (रांची) का उप-सम्पादन। झारखण्ड की पहली बहुभाषायी पत्रिका 'झारखण्डी भाषा, साहित्य, संस्कृति : अखड़ा' (२००४ से), खड़िया मासिक पत्रिका 'सोरिनानिङ' (२००५ से) तथा नागपुरी मासिक पत्रिका 'जोहार सहिया' (२००६ से) का सम्पादन-प्रकाशन।

    प्रकाशित पुस्तकें : कवि मन जनी मन, पुरखा लड़ाके, किसका राज है, झारखण्ड : एक अन्तहीन समरगाथा, पुरखा झारखण्डी साहित्यकार और नये साक्षात्कार, असुर सिरिंग, आदिवासी साहित्य : परम्परा और प्रयोजन, आदिम राग, कोनजोगा, एलिस एक्का की कहानियाँ, आदिवासी दर्शन और साहित्य आदि।

    समाज के शोषित एवं वंचित समुदाय, विशेषकर आदिवासी, महिला, शिक्षा, साक्षारता, स्वास्थ्य और बच्चों के मुद्दों पर पिछले ३० वर्षों से लगातार सक्रिय।

    महिला सवालों एवं सामाजिक, शैक्षणिक व स्वास्थ्य विषयों पर नुक्कड़ नाटकों में अभिनय तथा कई नाट्य कार्यशालाओं का निर्देशन-संचालन।

    वर्तमान में झारखण्ड की आदिवासी एवं देशज भाषा-साहित्य व संस्कृति के संरक्षण, संवर्द्धन और विकास के लिए प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन, रांची के साथ सृजनरत।

    सम्पर्क : द्वारा रोज केरकेट्टा, चेशायर होम रोड, बरियातु, रांची-८३४००९ (झारखंड)।े

     

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