• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Viruddha

Viruddha

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 250

Special Price Rs. 225

10%

  • Pages: 131P
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183615877
  •  
    विरुद्ध उपन्यास का सुप्रसिद्ध कथाकार मृणाल पाण्डे की रचना–यात्रा में ऐतिहासिक महत्त्व है । यह उनका प्रथम उपन्यास है । अभिव्यक्ति की ताजगी के साथ सरोकारों की स्पष्टता विरुद्ध की विशेषता है । मानसिक ऊहापोह का मार्मिक अंकन और यथार्थ का तटस्थ चित्रण करता यह उपन्यास वस्तुत% अस्मिता की खोज का आख्यान है । रजनी और उदय के म/य घटित–अघटित को मृणाल पाण्डे ने कलात्मक सौन्दर्य के साथ सहेजा है । उन्होंने भाषा की अचूक व्यंजनाओं से कई बार रजनी के मनोलोक में भागती परछाइयों को विश्लेषित किया है । एक उदाहरणµ सूखी मिट्टी के लाल फैलाव के बीच जगह–जगह नीचे छिपी चट्टानों की काली नोकें दीख रही थीं । जाने अँ/ोरे की वजह से या जंगल की नीरव क्रूरता के कारण, रजनी को लगा जैसे कि उसके चारों तरफ उगे वे छोटे, नाटे और गठीले आकार दरख्त नहीं बल्कि कुछ जीवन्त उपस्थितियाँ हैं, एक काली हिकारत से दम सा/ो उसे घूरती हुई । है हिम्मत उसमें कि आगे बढ़ सके । उनके काईदार संशय की दमघोंटू चुप्पी के बीच ? सुशिक्षित रजनी उच्च वर्ग–बो/ा के बरक्स किस प्रकार अपने अस्तित्व से संवाद करती है, यह पठनीय है । विरुद्ध की आत्मीयता पाठक को अपना सहचर बना लेती है ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Mrinal Pandey

    मृणाल पाण्डे

    मृणाल पाण्डे का जन्म 26 फरवरी, 1964 को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में हुआ। प्रयाग विश्वविद्यालय, इलाहाबाद से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. और गन्धर्व महाविद्यालय से ‘संगीत विशारद’  के अलावा आपने कॉरकोरन स्कूल ऑफ आर्ट, वाशिंगटन में चित्रकला एवं डिजाइन का विधिवत् अध्ययन किया।

    कई वर्र्षों तक विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्यापन के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आईं। साप्ताहिक हिन्दुस्तान, वामा तथा दैनिक हिन्दुस्तान के बतौर सम्पादक समय-समय पर कार्य किया। स्टार न्यूज़ और दूरदर्शन के लिए हिन्दी समाचार बुलेटिन का सम्पादन किया। तदुपरान्त प्रधान सम्पादक के रूप में दैनिक हिन्दुस्तान, कादम्बिनी एवं नन्दन  से जुड़ीं। वर्ष 2010 से 2014 तक प्रसार भारती की  चेयरमैन भी रहीं।

    प्रकाशित पुस्तकें : सहेला रे, विरुद्ध, पटरंगपुर पुराण, देवी, हमका दियो परदेस, अपनी गवाही (उपन्यास); दरम्यान, शब्दवेधी, एक नीच ट्रैजिडी, एक स्त्री का विदागीत, यानी कि एक बात थी, बचुली चौकीदारिन की कढ़ी, चार दिन की जवानी तेरी (कहानी-संग्रह); ध्वनियों के आलोक में स्त्री (संगीत); मौजूदा हालात को देखते हुए, जो राम रचि राखा, आदमी जो मछुआरा नहीं था, चोर निकल के भागा, सम्पूर्ण नाटक और देवकीनन्दन खत्री के उपन्यास काजर की कोठरी  का इसी नाम से नाट्य-रूपान्तरण (नाटक); स्त्री : देह की राजनीति से देश की राजनीति तक, स्त्री : लम्बा सफर (निबन्ध); बन्द गलियों के विरुद्ध (सम्पादन);

    ओ उब्बीरी (स्वास्थ्य); मराठी की अमर कृति मांझा प्रवास : उन्नीसवीं सदी  तथा अमृतलाल नागर की हिन्दी कृति गदर के फूल  का अंग्रेजी में अनुवाद।

    अंग्रेज़ी : द सब्जेक्ट इज वूमन (महिला-विषयक लेखों का संकलन), द डॉटर्स डॉटर, माइ ओन विटनेस (उपन्यास), देवी (उपन्यास-रिपोर्ताज), स्टेपिंग आउट : लाइफ एंड सेक्सुअलिटी इन रुरल इंडिया।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144