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Visarjan

Visarjan

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  • Pages: 454p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183613316
  •  
    विसर्जन अपने पहले उपन्यास हलफ़नामे से प्रसिद्धि पानेवाले कथाकार राजू शर्मा का दूसरा और नया उपन्यास है विसर्जन। हिन्दी संसार में भूमंडलीकरण पर लगभग दो दशकों से चर्चा हो रही है किन्तु उस यथार्थ को बड़े औपन्यासिक ढाँचे में विन्यस्त और प्रकट करने का श्रेय विसर्जन के रचनाकार राजू शर्मा के ही हिस्से में जाता है। भूमंडलीकरण ने हमारी दुनिया की शक्ल को बुनियादी तौर पर बदलकर रख दिया है। यह कहना अत्युक्ति न होगी कि उसने मनुष्य के मूल्यों, आस्थाओं, संवेदनाओं, सम्बन्धों के इलाके में अब तक के इतिहास की सबसे भारी उथल-पुथल पैदा की है। मनुष्यता पर पड़नेवाले उसके प्रभाव पर केन्द्रित भले ही कुछ रचनात्मक दृष्टान्त हैं किन्तु भूमंडलीकरण की शक्ति-संरचना का उसी की जमीन पर विखंडन पहली बार विसर्जन में ही सम्भव हो रहा है। प्रधानमन्त्री, अर्थशास्त्री, प्रशासनिक मशीनरी, गुप्तचरी आदि के जरिए राजू शर्मा विसर्जन में ऐसा अद्भुत आख्यान रचते हैं कि उत्तर-पूँजीवादी दुनिया के ब्रह्मास्त्र और कवच भूमंडलीकरण का सारा भेद खुल जाता है। राजू शर्मा की रचनात्मक शक्ति इस मायने में भी आश्वस्त करती है कि वे भूमंडलीकरण के किले में प्रविष्ट होकर उसकी व्यूह रचना को उजागर करते हैं। विसर्जन में मनुष्यता के सम्मुख उपस्थित संकट की गहन खोज और उसका आखेट है, पर यह सब कुछ ऐसे गहरे रचनात्मक धैर्य और सूझ-भरी निस्संगता से मुमकिन किया गया है कि विसर्जन सत्य और गल्प, यथार्थ और कला, विचार और संवेदना, प्रतिबद्धता और निष्पक्षता जैसी विपर्यय दिखनेवाली सृजनात्मक सिद्धियों को एक साथ अर्जित करनेवाला उपन्यास बन जाता है। विसर्जन अपने अभिनव विषय की व्यापकता एवं गहराई के कारण महत्त्वपूर्ण है, वह इसलिए भी कीमती है कि यहाँ सच्चाई का अनुवाद नहीं, उसका गजब का पुनर्सृजन है। एक से एक अविस्मरणीय चरित्रों, वृत्तान्तों से सम्पन्न इस कृति में अर्थगर्भिता और व्यंजनाओं का ऐसा अभूतपूर्व वैभव है जो मौजूदा साहित्यिक परिदृश्य में दुर्लभ है। विसर्जन न केवल राजू शर्मा की कथायात्रा की अगली मंजिल है वरन् उसे हिन्दी उपन्यास की उपलब्धि के रूप में भी स्वीकार किया जाएगा, ऐसी उम्मीद बाँधना उचित ही होगा। - अखिलेश

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    Raju Sharma

    जन्म: 1959। दिल्ली विश्वविद्यालय के सेन्ट स्टीपें$स कॉलेज से भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर।

    लेखन के अलावा रंगकर्म, फिल्म व फिल्म-स्क्रिप्ट लेखन में विशेष रुचि व रुझान।

    प्रकाशित कृतियाँ

    उपन्यास: हलफ़नामे

    कहानी-संग्रह: शब्दों का खाकरोब, समय के शरणार्थी

    नाटक: भुवनपति, मध्यम वर्ग का आत्मनिवेदन या गुब्बारों की रूहानी उड़ान

    नेकरा सो व और राज़ (नाटक अनुवाद)

    सम्प्रति: 1982 से भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत।

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