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Visham Raag

Visham Raag

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  • Pages: 372p
  • Year: 2003
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126706368
  • ISBN 13: 9788126706365
  •  
    साहित्य के मौजूदा दौर में पाठ–सुख वाली कहानियाँ कम होती जा रही हैं । इस संकलन की कहानियों में पाठ–सुख भरपूर है । लेकिन यह सुख तात्कालिक नहीं है बल्कि ये निर्विवाद कहानियाँ देर तक स्मृति में बनी रहती हैं । लोकप्रियता और विचार–केन्द्रित कथा का मिजाज मुश्किल से मिलता है पर इन कहानियों मंे यह सुमेल इसलिए सम्भव हो पाया क्योंकि यहाँ पाठकों के प्रति गम्भीर सम्मान है । ये कहानियाँ पाठकों को उपभोक्ता नहीं, सहभोक्ताय श्रोता नहीं, सम्वादक बनने का अवसर देती हैं । इनमें विचार उपलाता नहीं, अन्तर्धारा की तरह बहता है, क्योंकि यह सृजन पाठक–लेखक सहभागिता पर टिका है । इस संकलन का कथा–क्षेत्र काफी खुला है । तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, बिहार, दिल्ली, पंजाब तक । नए–नए पेशे, नए दस्तकार हैं । ये जड़ परम्परा, नई परिस्थितियों से घिरे इनसानों की नाउम्मीदी, छोटी–छोटी उम्मीदों, कशमकशों, छटपटाहटों और उबरने की कोशिशों की कहानियाँ हैं । इनके चरित्रों में विभिन्न समुदायों, आस्थाओं, क्षेत्रों से आई स्त्रियाँ हैं जिनके दुख तो पुराने हैं पर उनसे टकराने के तरीके और सुख नए हैं । इनके झुग्गी–झोंपड़ी निवासी, आदिवासी, दलित और दस्तकार शाश्वत समस्याओं और बड़ी परिघटनाओं के भँवर में फँसे हैं । उनकी अदम्य जिजीविषा, राग–रंग और जिन्दगी से प्यार की कहानियों पर देश के आखिरी दो दशकों की छाया देखी जा सकती है । युग की प्रमुख आवाजों को सुरक्षित रखना इतिहास की जिम्मेवारी है, छोटी–छोटी अनुगूजों को सहेजना साहित्य की । मनुष्य विरोधी मूल्यों, सत्ताओं और संगठित संघर्षों की बड़ी उपस्थिति के बावजूद लघु, असंगठित और प्राय: व्यक्तिगत संघर्षों की बड़ी दुनिया है । इन कहानियों में उसी की अनुगूँजें हैं । ये कहानियाँ किसी एक शैली में नहीं बँधी हैं बल्कि हर कहानी का अलग और स्वतन्त्र व्यक्तित्व, नई भाषा, नई संरचना और आंतरिक गतिशीलता के सहारे निर्मित किया गया है । प्रयोगधर्मिता इन कहानियों का गुण तो है पर ये प्रयोग अटपटे या दिखावटी नहीं बल्कि सहज और स्वीकार्य हैं । कई पुरस्कारों से सम्मानित अरुण प्रकाश का यह पाँचवाँ संकलन है ।

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    Arun Prakash

    जन्म: 1948, बेगूसराय (बिहार)।

    शिक्षा: स्नातक, प्रबंध विज्ञान और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा।

    कहानी-संग्रह: भैया एक्सप्रेस, जल-प्रांतर, मँझधार किनारे, लाखों के बोल सहे, विषम राग।

    उपन्यास: कोंपल कथा।

    कविता संकलन: रात के बारे में।

    अनुवाद: अंग्रेजी से हिन्दी में विभिन्न विषयों की आठ पुस्तकों का अनुवाद।

    अनुभव: कुछ अखबारों, पत्रिकाओं का सम्पादन, कई धारावाहिकों, वृत्तचित्रों तथा टेलिफिल्मों से सम्बद्ध रहे। कई स्तम्भों का लेखन।

    प्रायः एक दशक से कथा-समीक्षा और आलोचना लेखन। अनेक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों में सहभागिता।

    सम्मान: साहित्यकार सम्मान, हिन्दी अकादमी, दिल्ली; कृति पुरस्कार, हिन्दी अकादमी, दिल्ली; रेणु पुरस्कार, बिहार शासन; दिनकर सम्मान; सुभाषचन्द्र बोस कथा सम्मान; कृष्ण प्रताप स्मृति कथा पुरस्कार।

    सम्प्रति: स्वतंत्र लेखन।

    संपर्क: पॉकेट ई/153बी, दिलशाद गार्डेन, दिल्ली-95

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