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Wakeel Paradhi

Wakeel Paradhi

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  • Pages: 292p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183614474
  •  
    वकील पारधी ब्रिटिश शासनकाल में जिन समुदायों को अपराधी के श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया था, उनमें एक पारधी समाज भी है। कभी जंगलों में रहकर अपना जीवनयापन करने वाले इस समाज ने स्वतंत्रता संग्राम में भी खासी भूमिका निभाई थी। आजादी मिलने के बाद देश की सरकार ने उन्हें अपराधी के कलंक से तो मुक्त कर दिया लेकिन पुलिस, प्रशासन और पुलिस की दृष्टि में उन्हें सम्मान आज तक नहीं मिला। यह उपन्यास इसी पारधी समाज की यंत्रणा, पुलिस द्वारा उसके उत्पीड़न और प्रशासनिक उपेक्षा की मार्मिक कहानी बयान करता है। दलित-दमित समाज के हित में लगातार कलम चलाते आ रहे मराठी लेखक लक्ष्मण गायकवाड़ ने इस उपन्यास में बताया है कि रोजी-रोटी की तलाश में खानाबदोश जीवन जीने वाले इस समाज के लोगों को पुलिस किस तरह झूठे मामलों में फँसाकर कैद कर लेती है, फिर अपने अनसुलझे मामलों में उनसे झूठी गवाही दिलवाती है, और उनकी औरतों के साथ बदसलूकी करती है। अपने इस यातनाग्रस्त समाज के लिए लड़ने को हौसले के साथ वकील बनने का सपना सँजोने वाले एक बालक के रास्ते में ताकतवर समाज द्वारा पैदा की जाने वाली अड़चनों के माध्यम से इसमें पारधी समाज के प्रति शेष समाज के रवैये को भी बखूबी स्पष्ट किया गया है। उपन्यास से हमें पारधी समाज के सांस्कृतिक और परिवेशगत जीवन-मूल्यों, उनके दैनिक जीवन की अन्य समस्याओं और सामाजिक संरचना का भी प्रामाणिक परिचय मिलता है।

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    Laxman Gaiakwad

    लक्ष्मण गायकवाड़

    जन्म: 23 जुलाई, 1956 को धनेगाँव-लातूर में।

    ‘उचल्या’ पुस्तक का अनुवाद हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड़, तेलगू, उर्दू, फ्रेंच, बंगाली भाषाओं में। उनकी ‘वडारवेदना’ चर्चित रही। वे राष्ट्रीय साहित्य अकादेमी के भूतपूर्व जूनियर मेम्बर, सोसायटी फॉर कम्यूनल हार्मनी, दिल्ली के भूतपूर्व जूनियर मेम्बर और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य रह चुके हैं।

    सम्मान : राष्ट्रीय साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली का पुरस्कार, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हाथों मिला एक लाख रुपयों का पुरस्कार, पानघंटी, पुणे का समता पुरस्कार, संजीवनी पुरस्कार। शोषित, पीड़ित समाज के लिए किए गए कार्य के लिए पुणे, पिंपरी, चिंचवड़, कोल्हापुर, औरंगाबाद की महानगरपालिकाओं ने आपका नागरिक सत्कार किया। ‘सार्क’ राष्ट्रों द्वारा दिए जानेवाले अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित।

    शोषित, पीड़ित समुदायों में सामाजिक परिवर्तन लानेवाले और विमुक्त,घुमन्तू जमातों के लोगों को न्याय और उनके अधिकार्दिलाने के लिए वे 1978से कार्यरत हैं। महाराष्ट्र में'विमुक्त भटके (घुमन्तू) संघर्ष महासंघ' के वे व्यवस्थापकीय अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। कामगार, खेती मजदूर, होटेल बॉयज, स्त्री-मुक्ति इत्यादि आंदोलनों में सक्रिय सहभागी। 1984 में निकली विमुक्त घुमन्तू लोगों की शोधयात्रा के संयोजक थे।

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