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Aadhi Aabadi Ka Sangharsh

Aadhi Aabadi Ka Sangharsh

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  • Pages: 354p
  • Year: 2006
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126711628
  •  
    राजस्थान में देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा रजवाड़ों और जागीरदारों का जबर्दस्त दबदबा रहा, लेकिन जैसे ही सामन्ती व्यवस्था हटी तो औरतों के लिए अवसर आए, शिक्षा का प्रचार-प्रसार हुआ। अपनी स्थिति पर उनके बीच चर्चा व मंथन की शुरुआत हुई तथा राजस्थान की आम औरतों ने अपनी आवाज को बुलन्द करना शुरू किया। यह एक पुनर्जागरण की शुरुआत थी। राजस्थान में कार्यरत कई स्वयंसेवी संस्थाएँ जो औरतों के मुद्दों पर काम करती थीं, उन्होंने संस्थाओं में घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव तथा बलात्कार जैसे मुद्दों पर चर्चाओं के माध्यम से जोरदार माहौल बनाया। सन् 1985 में एक महिला मेले के दौरान पूरे राजस्थान से आई औरतों ने किशनगढ़ क्षेत्रा में बलात्कार जैसी सामाजिक बुराई के विरुद्ध एक रैली निकाली। मजदूर महिलाओं को सड़क पर उतरकर, मुट्ठी बाँधकर, आक्रोश के साथ बुलन्द नारे लगाते, मंचों पर अत्याचारों के विरुद्ध बेखौफ बोलते देखकर मध्यवर्गीय औरतों में भी हिम्मत आई। अक्सर घर-परिवार तक ही सीमित रहकर शोषण व जुल्म को सहनेवाली औरतों ने भी दहेज, घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों के खिलाफ उठ खड़ी होने का साहस जुटाया तथा महिलाओं पर हिंसा का प्रभावी विरोध शुरू किया। नगरीय समुदाय की मध्यवर्गीय औरतों तथा विश्वविद्यालय की महिलाएँ, जिन्होंने घरेलू हिंसा के मुद्दे से जुड़कर काम शुरू किया, अब वे महिला आन्दोलन की नेतृत्वकर्त्री बनकर औरतों के कई मुद्दों पर जमकर संघर्ष करती हुई नजर आती हैं। एक उल्लेखनीय बात और भी रही कि राजस्थान के महिला आन्दोलन की बागडोर मुख्यतः मजदूर महिलाओं के हाथों में रही इसलिए उसने कभी भी समाज के ध्रुवीकरण का रास्ता नहीं लिया। कहना चाहिए कि इस आन्दोलन का रुझान पुरुषों के खिलाफ न होकर बराबरी और अवसरों की समानता की तलाश की ओर ही अधिक रहा। विविधा महिला आलेखन एवं सन्दर्भ केन्द्र व विविधा फीचर्स, जयपुर ने राजस्थान की आधी आबादी के गुमनाम सफर का इस पुस्तक में दस्तावेजीकरण करने का काम किया है। यह केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि भारतीय महिला आन्दोलन के स्वरूप को समझने का एक सार्थक उपक्रम है।

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    Mamta Jeitali

    राजस्थान के महिला आन्दोलन में पिछले 20 वर्षों से सक्रिय ममता जैतली मीडिया में महिलाओं की सकारात्मक छवि स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं। वे पिछले बारह वर्षों से ग्रामीण मासिक समाचार पत्र ‘उजाला छड़ी’ का प्रकाशन कर रही हैं। राजस्थान के जाने-पहचाने महिला विकास कार्यक्रम के साथ स्वैच्छिक संस्था ‘राज्य इदारा’ के माध्यम से महिलाओं के सशक्तीकरण प्रशिक्षण व सूचना सम्प्रेषण के कार्य से वे जुड़ीं।

    इसी दौरान रूपकँवर विधवा दहन, भटेरी सामूहिक बलात्कार विरोधी आन्दोलन में वे सक्रिय रहीं। 1996-97 में भारतीय प्रतिष्ठान एन.एफ.आई. दिल्ली की मीडिया फैलोशिप के तहत राजस्थान में बालिकाओं की स्थिति पर उन्होंने अध्ययन किया। वर्ष 1998 से अब तक वे विविधा महिला आलेखन व सन्दर्भ केन्द्र के समन्वयक का पदभार सँभाल रही हैं। वर्ष 2001 में महिला व वंचित वर्ग की मीडिया एडवोकेसी के लिए विविधा न्यूज व फीचर सर्विस के सम्पादन का दायित्व सँभाला। वर्ष 2001 में पंचायती राज संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की भूमिका पर हिन्दी भाषा में सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए उन्हें सरोजनी नायडू पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    49 वर्षीय श्रीप्रकाश शर्मा का समूचा जीवन बहुआयामी संघर्ष की मिसाल रहा। बनारस के स्थानीय अखबार से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्रीप्रकाश जी ने निर्भीकतापूर्वक लेखनी चलाई। राजस्थान आने के बाद वे यहाँ यूनीवार्ता के राज्य ब्यूरो प्रमुख बने। फिर यूनीवार्ता के दिल्ली ब्यूरो में भी कार्यरत रहने के दौरान अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी। नब्बे के दशक में वे जन-आन्दोलनों की ओर प्रवृत्त हुए और राज्य के वंचित वर्ग के प्रहरी के रूप में उभरे।

    पिंकसिटी प्रेस क्लब, जयपुर के संस्थापक सदस्य एवं प्रथम निर्वाचित अध्यक्ष तथा कुल तीन बार पिंकसिटी प्रेस क्लब जयपुर के अध्यक्ष रहे। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के महासचिव रहे। सामाजिक सरोकार के विविध विषयों पर वे अनवरत लेखन करते रहे। कई संस्था संगठनों में वे मीडिया सलाहकार रहे, उन्होंने ‘विकासात्मक पत्रकारिता प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान’ की स्थापना की तथा दलित चेतना जैसे मुद्दों पर उनका पाक्षिक ‘राज: ष्टि’ एक आन्दोलन बनकर सामने आया। 

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