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Yah Hamara Samay

Yah Hamara Samay

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  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126723287
  •  
    यह हमारा समय इधर हिन्दी का गद्यलेखन समृद्ध और सामाजिक जड़ता तथा रूढ़ियों पर अधिक उग्रता से प्रहार करने के लिए प्रतिबद्ध हुआ नज़र आता है। आज़ादी के लिए संघर्ष करते राष्ट्र-नायकों ने ‘समता और स्वतंत्रता’ के जिन दो महान् लक्ष्यों को पाने का संकल्प किया उन्हें धूमिल न होने का उत्साह हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य का केंद्र्र है। मैंने इस पुस्तक में संकलित आलेखों में ‘समता और स्वतंत्रता’ के लिए अपनी प्रतिबद्धता को ‘पुनरावृत्ति’ की सीमा तक अभिव्यक्त किया है। इस संकलन में उन्हीं सब संदर्भों और परंपराओं को खँगाला गया है जो समता के विचारों और पक्षों को मज़बूत करती हैं। ‘धर्म’ के उसी पक्ष को बार-बार रेखांकित किया है जो धर्म के स्थूल, बाहरी कर्मकांड को महत्त्वहीन मानता है लेकिन जो संवेदना के उन सब चमकदार पक्षों को शक्ति देता है जो सार्वजनिक जीवन को गरिमामय बनाते हैं। पुस्तक में अर्थ और बाज़ार केन्द्रित व्यवस्था के कारण हुई बरबादियों का बार-बार जिक्ऱ हुआ है। पुस्तक में कई विषयों पर लिखे आलेख हैं जिनमें समय के दबावों, उनको समता और स्वतंत्रता के वृहत्तर उद्देश्यों में बदलने वाले आन्दोलनों की चर्चा है। ‘समता’ ही केंद्र्रीय चिन्ता है जिसे अवरुद्ध करने के लिए विश्व की नयी पूंजीवादी शक्तियां अपने सांस्कृतिक एजेन्डा के साथ जुड़ी हुई है। ये आलेख किसी ‘तत्त्ववाद’ की भूमिका नहीं है। ये उन चिन्ताओं की अभिव्यक्ति और साधारणीकरण है जो भारत के जन-जीवन से जुड़ी और भविष्य के विकास की संभावनायें हैं। भारत की समृद्धि ‘समता और स्वतंत्रता’ की परंपराओं से जुड़ी है; यह बताना इस पुस्तक का प्रयोजन है। आलेख ‘निराशा का कर्त्तव्य’ डॉ. राममनोहर लोहिया का है। मैंने उसका प्रस्तुतिकरण किया है। भूमिका से

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    Nand Chaturvedi

    नन्द चतुर्वेदी

    जन्म : 21 अप्रैल, 1923 को रावजी का पीपत्या (पहले राजस्थान में अब मध्य प्रदेश में)।

    शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), बी.टी.।

    कर्म-क्षेत्र : 1950 से 1955 तक गोविन्दराम सेकसरिया टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में प्राध्यापक; 1956 से 1981 तक विद्याभवन रूरल इंस्टीट्यूट में हिन्दी प्राध्यापक।

    लेखन : ब्रजभाषा में कविता लिखना प्रारम्भ किया। कविता के लिए पहला पुरस्कार बारह वर्ष की आयु में। राष्ट्र की स्वाधीनता और सामाजिक-आर्थिक गैर-बराबरियों को रेखांकित करते हुए घनाक्षरी, सवैया, पद, दोहा पदों में रचनाएँ। हिन्दी (खड़ी बोली) में चतुष्पदियों, गीत से लगाकर अतुकान्त-आधुनिक कविताओं का सृजन। 'सप्तकिरण’, 'राजस्थान के कवि’ (भाग 1), 'इस बार’ (अध्यापकों का कविता संग्रह), 'जयहिन्द’ (समाजवादी साप्ताहिक) से लेकर 'जनमन’, 'जन-शिक्षण’, 'मधुमती’ तथा चिन्तन-प्रधान साहित्यिक पत्रिका 'बिन्दु’ का सम्पादन। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की उच्च कक्षाओं के लिए कहानी तथा गद्य की अन्य विधाओं का संग्रह सम्पादन। राजस्थान साहित्य अकादमी के लिए प्रान्त के प्रख्यात रचनाकारों पर 'मोनोग्राफ’ लेखन।

    प्रकाशित कृतियाँ : गा हमारी जिन्दगी कुछ गा, उत्सव का निर्मम समय, जहाँ उजाले की एक रेखा खींची है, यह समय मामूली नहीं, ईमानदार दुनिया के लिए, वे सोये तो नहीं होंगे (कविता संग्रह), शब्द संसार की यायावरी, यह हमारा समय, अतीत राग (गद्य), सुधीन्द्र (व्यक्ति और कविता), राजस्थान साहित्य अकादमी की पुरोधा शृंखला के अन्तर्गत प्रकाशित।

    सम्मान : मीराँ पुरस्कार—राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च पुरस्कार; बिहारी पुरस्कार—के.के. बिड़ला फाउंडेशन; लोकमंगल, मुम्बई पुरस्कार; अखिल भारतीय आकाशवाणी सम्मान (श्रेष्ठ वार्ताकार) आदि।

    यात्रा : छठे विश्व हिन्दी सम्मेलन, लन्दन में राजस्थान राज्य द्वारा भेजे गए प्रतिनिधि मंडल के सदस्य।

    सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन।

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