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Yah Mera Hi Ansh Hai

Yah Mera Hi Ansh Hai

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  • Pages: 103p
  • Year: 1999
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171195229
  •  
    रवीन्द्र भारती की कविताओं में चारों ओर की वास्तविकताओं से मनुष्य के लिए रचनात्मक संस्कार खोजने की शक्ति दीखती है । अपनापे का यह अनुभव छायावादोत्तर रोमानी मिठास का नहीं, एक संघर्षरत मनुष्य के लौकिक-भौतिक प्रेम का अनुभव है । सबसे बड़ी बात तो यह है कि उनकी कविता उन दृश्यों को भी साकार कर देती है, जो उसमें लिखे नहीं गए परंतु छाया की भाँति इसके तथ्यों से निसृत है । कई आयामों को एक में समाहित कर सकने की यह सामर्थ्य आज की कविता में दुर्लभ ही है । रवीन्द्र भारती की कविताएँ गाँव, घर. खेत, लोग आदि सबके दृश्यमान यथार्थ के पीछे करुणा के आयामों को खोलती और संपूर्ण अनुभव के आयामों को गहरा करती है । आज के दौर में जहाँ सरल भाषा में दुरूह कविता खुलेआम स्वीकृत की जा रही है. वहाँ यह कवि सरल भाषा में गहराई का अन्वेषण कर रहा है और भावुकता को आत्मदया बनाने से बचता हुआ सहानुभूति को व्यापक अर्थ देकर काव्य-भाषा को समृद्ध कर रहा है । रघुवीर सहाय 'रविवार'. 15-21 नवंबर, 1987 रवीन्द्र भारती ने इतनी तीव्र और मर्मांतक संवेदना से अपने अनुभवों को जो काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी है. उसने मुझे बराबर प्रभावित किया हैर । गांव के अनुभवों की जो संपदा आप अपने भीतर समोये हैं. वह अथाह जान पड़ती है-और जब उनमें से कुछ को चुनकर अभिव्यक्त करते हैं-बिलकुल अपने निजी मुहावरे में-तो लोग, लैंडस्केप और चारों तरफ की पीड़ा का प्रदेश आलोकित हो उठता है । निर्मल वर्मा पत्रांश. 1 ०-5- 1981

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    Ravindra Bharti

    जन्म: 1951

    कविता-संग्रह : जड़ों की आखिरी पकड़ तक, धूप के और करीब, यह मेरा ही अंश है, नचनिया !

    कविताएँ कई भाषाओँ में अनूदित !

    नाटक : कंपनी उस्ताद, फूकन का सुथन्ना, जनवासा, अगिन तिरिया अरु कौआहंकनी (फिल्म निर्माण) !सम्मान और पुरस्कार : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् से विशिष्ट साहित्य सेवा सम्मान, मानव संसाधन मत्रालय, भारत सरकार से सीनियर फेलोशिप !

    1975 में आपातकाल के दौरान कविता पर कारावास !

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