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Yves Ke Naam Patra

Yves Ke Naam Patra

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  • Pages: 112
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388183352
  •  
    पियर बेरजे फ़्रांस के प्रसिद्ध उद्योगपति थे और कला, फैशन तथा अन्य सामाजिक-राजनीतिक कार्यों के प्रोत्साहन के लिए अपने संसाधनों का प्रयोग करते थे। ईव सांलौरां (1 अगस्त, 1936—1 जून , 2008) के साथ मिलकर उन्होंने एक फैशन-लेबल की स्थापना की। ईव बीसवीं सदी के अग्रणी फैशन डिजाइनरों में गिने जाते हैं और माना जाता है कि उन्होंने फैशन उद्योग को ही नहीं, फैशन कला को भी एक नई दिशा दी। रेडी-टू-वियर परिधानों की ईजाद का श्रेय उन्हें ही जाता है। यह पुस्तक इन दोनों के प्रेम की मार्मिक दास्तान है। ईव की मृत्यु ब्रेन कैंसर से हुई थी और उससे पहले उनका कलाकार-मन अपने व्यक्ति-सत्य और आन्तरिक सुख की तलाश में कुछ खतरनाक रास्तों पर भी भटका था। पियर बेरजे से ईव की मुलाकात 1958 में हुई थी और पहली ही निगाह में बेरजे उनसे आत्मा की गहराइयों से प्यार करने लगे थे। बीच में वे अलग भी हुए लेकिन जो रिश्ता बेरजे के हृदय की शिराओं में बिंध चुका था, उसे उन्होंने न सिर्फ ईव के जीवन के अन्त तक बल्कि अपने जीवन के अन्त तक निभाया। पत्र-शैली में लिखी इस किताब के पत्र बेरजे ने ईव के निधन के उपरान्त लिखने शुरू किए। गहन शोक और अन्तरंगता के हृदय-द्रावक उद्गारों से सम्पन्न इन पत्रों में हम प्रेम के हर उस रंग को देख सकते हैं जो किसी भी सच्चे प्रेम में सम्भव है और जाहिर है उनकी जीवन-कथा के सूत्र तो इसमें शामिल हैं ही। साथ ही फैशन के इतिहास के कुछ महत्त्वपूर्ण क्षणों से भी हमारा साक्षात्कार यहाँ होता है। लेकिन इस बात को सबके लिए नहीं कहा जा सकता। अगर तुमने और मैंने एक सामान्य जीवन बिताया है तो वह इसलिए क्योंकि हम समलैंगिक ही थे; हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था। यह कहना काफी अपमान जनक है कि समलैंगिक लोग यह विकल्प अपनी इच्छा से चुनते हैं। मैं अपने किरदार को काफी अच्छी तरह से जानता हूँ : जब मैं तुमसे मिला, तुम सिर्फ इक्कीस वर्ष के थे और तुम कभी किसी पुरुष के साथ नहीं रहे थे। यह आसान नहीं था किन्तु मैंने तुम्हें यह दिखाया कि यह सम्भव था, जरूरत सिर्फ ईमानदार होने की थी। ...मैंने तुम्हें उस पत्र के बारे में बताया ही है जो मेरी माँ ने मुझे लिखा था, जब मैं अट्ठारह वर्ष का था और पेरिस आने के लिए रौशेल को छोड़ चुका था। वह पत्र खो गया है लेकिन मैं उसे भूला नहीं हूँ। मुझे तरह-तरह की खबरें देने के बाद मेरी माँ ने कहा, ‘‘अब मैं तुम्हारी समलैंगिकता के बारे में बात करना चाहती हूँ। तुम जानते हो कि मुझे किसी चीज से धक्का नहीं लगता और मेरी पहली इच्छा यही है कि तुम खुश रहो लेकिन तुम्हारी संगत मुझे चिन्तित करती है। अगर तुम किसी वर्ग की नकल करने के लिए या फिर महत्त्वाकांक्षा और अहंकार के लिए समलैंगिक होते तो यह समझ लेना कि मैं इसको अनुचित समझती।’’ मैं तो किसी की नकल नहीं कर रहा था और न ही उच्च वर्ग तक पहुँचने के लिए समलैंगिकता का सहारा ले रहा था। मैं उसी राह पर चल रहा था जो मैंने बगैर यह जाने पकड़ी थी कि वह मुझे कहाँ ले जाएगी। एक दिन वह मुझे तुम तक ले आई। —इसी पुस्तक से

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    Pierre Berge

    पियर बेरजे

    पियर बेरजे (14 नवम्बर, 1930-8 सितम्बर, 2017) फ़्रांस के विख्यात उद्योगपति एवं कला-संरक्षक | उनकी माता एक प्रगतिशील अध्यापिका थीं और पिता टैक्स-ऑफिस में कर्मचारी | शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने घर छोड़ दिया और पेरिस आ गए जहाँ उनकी मुलाकात ज्यां पॉल सार्त्र और अल्बेयर काम्यू जैसे लेखकों से हुई |

    बेरजे को सामाजिक सोच के लिहाज से उदारवादी लेकिन अपने राजनीतिक झुकाव के लिहाज से पुरातनपंथी माना जाता है | 1988 में उन्होंने 'ग्लोब' नाम से एक फैशन-पत्रिका शुरू की जिसने राष्ट्रपति-चुनावों में फ्रंसवा मीत्रों का समर्थन किया था | ओपेरा के लिए बेरजे के प्रेम को देखते हुए मीत्रों ने उन्हें ओपेरा बेस्टिले का अध्यक्ष बनाया | इस पद पर उन्होंने 1994 तक काम किया | वे उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के संगीत के संग्रहालय मेडियाथेक मुजिकेल माह्लर के अध्यक्ष भी रहे | समलैंगिक-अधिकार आन्दोलन को भी उनका समर्थन प्राप्त था | उन्होंने एड्स-विरोधी संगठन एक्ट-अप पेरिस को सहायता दी | फ़्रांस की प्रमुख गे-पत्रिका 'टेटू' और यूरोप के दूसरे बड़े गे-टीवी चैनल 'पिंक टीवी' के स्वामित्व में हिस्सेदार रहे | उन्होंने कुछ संग्रहालयों की स्थापना में भी सहयोग और प्रोत्साहन दिया |

    सन 2010 में उन्होंने 'लेटर्स अ 'ईव' शीर्षक पुस्तक को प्रकाशित कराया जिसका अंग्रेजी अनुवाद 2014 में 'ईव सांलौरां : ए मोरोक्कन पैशन' शीर्षक से आया | इसी वर्ष ईव के जीवन पर आधारित एक फिल्म भी बनी जिसमे पियर बेरजे और ईव सांलौरां की फ्रांसीसी फैशन-उद्योग के विकास में भूमिका और उनके अपने रिश्तों को रेखांकित किया गया |

    उद्योगपति और कला-संरक्षक के रूप में उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया |

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