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23 Hindi Kahaniyan

23 Hindi Kahaniyan

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  • Pages: 264p
  • Year: 2009
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 23HK1
  •  
    प्रस्तुत पुस्तक ' 23 हिन्दी कहानियाँ' में हिन्दी जगत के श्रेष्ठतम साहित्यकारों की तेईस श्रेष्ठ कहानियाँ संग्रहीत हैं । कहानीकारों ने अपनी कहानियों के माध्यम से समाज को जगाने की कोशिश की है । कथ्य में कथानक से अधिक मर्मस्थितियों के चित्रण और मानसिक उद्‌घाटन पर बल दिया गया है । जीवन के आरम्भ से आज तक कहानी का एक ही उद्देश्य रहा है, जीवन के उपकरणों द्वारा अपने को व्यक्त करना । और जहाँ तक रूपों का प्रश्न है, वह कहानी कहनेवाले या लिखनेवाले पर निर्भर है । हर व्यक्ति अपने आपमें अपवाद है । उसके व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति के रूप में उसकी कहानी की विशिष्टताएँ भी होती हैं । न हों, तो कहानी क्या? जो सर्वसामान्य को प्राप्त है; उसे देने का प्रयोजन नहीं रहता । इसीलिये हर कहानीकार का निजी वैशिष्ट्य ही उसकी कहानी के आकर्षण की रचना करता है । आशा है सामाजिक परिवेश के वातावरण की कहानियाँ पाठकों के लिए संग्रहणीय होंगी ।

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    Jainendra Kumar


    जैनेन्द्र कुमार
    जन्म : सन् 1905, स्थान : कौड़ियागंज  (जिला अलीगढ़ ।
    शिक्षा : इनके मामा ने हस्तिनापुर में एक गुरुकुल की स्थापना की थी । वहीं जैनेन्द्र की प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा हुई । सन् 1912 में उन्होंने गुरुकुल छोड़ दिया । प्राइवेट रूप से मैट्रिक परीक्षा में बैठने की तैयारी के लिए वह बिजनौर आ गये । 1919 में उन्होंने यह परीक्षा बिजनौर से न देकर पंजाब से उत्तीर्ण की । जैनेन्द्र की उच्च शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हुई ।
    गतिविधियाँ : सन् 1921 से 23 के बीच जैनेन्द्र ने अपनी माता की सहायता से व्यापार किया, जिसमें इन्हें सफलता भी मिली । परन्तु सन् 23 में वे नागपुर चले गये और वहाँ राजनीतिक पत्रों में संवाददाता के रूप में कार्य करने लगे । जीविका की खोज में ये कलकत्ता भी गये, परन्तु वहाँ से भी इन्हें निराश होकर लौटना पड़ा । इसके बाद इन्होंने लेखन कार्य आरम्भ किया ।
    प्रकाशित कृतियाँ : उपन्यास : परख, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी, विवर्त, सुखदा, व्यतीत तथा जयवर्धन । कहानी संग्रह : फाँसी, वातायन, नीलम देश की राजकन्या, एक रात, दो चिड़ियाँ, पाजेब, जयसन्धि तथा जैनेन्द्र की कहानियाँ (सात भाग); निबन्ध संग्रह : प्रस्तुत प्रश्न, जड़ की बात, पूर्वोदय, साहित्य का श्रेय और प्रेय, मंथन, सोच विचार, काम, प्रेम और परिवार, तथा ये और वे; अनुवादित ग्रंथ-मन्दालिनी, प्रेम में भगवान तथा पाप अरि प्रकाश ।

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